UP News: उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प को गति देते हुए राज्य सरकार ने लखनऊ और नोएडा में दो अत्याधुनिक ‘यू-हब’ (डीप-टेक हब) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. यह पहल प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में शोध और नवाचार का नया अध्याय शुरू करेगी.
387.5 करोड़ रुपये का बजट और तीन साल की योजना
इस महत्वाकांक्षी योजना पर अगले तीन वर्षों में लगभग 387.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 100 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान तय किया गया है, जिसमें 70 करोड़ रुपये पूंजीगत (कैपिटल) और 30 करोड़ रुपये परिचालन (ऑपरेशनल) खर्च के लिए रखे गए हैं.
विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन ढांचा
शुरुआती ढांचा: प्रथम चरण के तहत नोएडा और लखनऊ दोनों स्थानों पर 25-25 हजार वर्ग फुट का क्षेत्र विकसित किया जाएगा, जहां स्टार्टअप्स के लिए साझा कार्यस्थल (को-वर्किंग स्पेस), प्रोटोटाइपिंग सुविधाएं और निवेशकों के लिए समर्पित स्थान उपलब्ध होंगे. दीर्घकालिक योजना के तहत नोएडा में 4 लाख वर्ग फुट और लखनऊ में 2 लाख वर्ग फुट के विशाल स्थायी परिसर निर्मित किए जाएंगे.
यू-हब का गठन कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में होगा. इसका संचालन 11 सदस्यीय निदेशक मंडल करेगा, जिसकी अध्यक्षता आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) के निदेशक करेंगे. दोनों केंद्रों के प्रशासनिक संचालन के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की जाएगी.
दोनों केंद्रों की अपनी-अपनी विशेषज्ञता
नोएडा यू-हब: क्वांटम तकनीक, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर डिजाइन, OSAT, फिजिकल AI, रोबोटिक्स, डिफेंस टेक और एडवांस्ड बायोटेक्नोलॉजी पर मुख्य रूप से केंद्रित रहेगा.
लखनऊ यू-हब: एप्लीकेशन आधारित AI, गवटेक (GovTech), हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल AI, एग्री-बायोटेक और डायग्नोस्टिक्स से जुड़े स्टार्टअप व रिसर्च को प्रोत्साहित करेगा.
नवाचार से रोजगार तक का रोडमैप
यू-हब का मुख्य उद्देश्य शोध संस्थानों में तैयार होने वाली प्रयोगशाला तकनीकों को बाजार के अनुकूल व्यावसायिक उत्पादों में बदलना है. यह मंच स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत, निवेशकों और नीति निर्माताओं को एक साथ लाएगा. डीप-टेक स्टार्टअप्स को विश्वस्तरीय सुविधाएं, फंडिंग तक सीधी पहुंच और रणनीतिक साझेदारियां मिलने से राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्टार्टअप्स की सफलता दर में बढ़ोतरी होगी.


