Delhi Slum Rehabilitation: दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को डूसिब (दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड) संशोधन विधेयक-2026 पारित हो गया, जिससे राजधानी की झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टरों में रहने वाले लाखों लोगों के पुनर्वास का मार्ग प्रशस्त हो गया है. इस नए संशोधन के तहत पुनर्वास के लिए कट-ऑफ तिथि को वर्ष 2006 (अथवा पूर्व में तय 2015) से बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 कर दिया गया है.
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विधेयक के मुख्य बिंदु और सरकार का रुख
शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट किया कि 1 जनवरी 2025 से पहले अस्तित्व में आई झुग्गियों के निवासियों को ही सरकार द्वारा पक्के मकान दिए जाएंगे. योजना को लागू करने के लिए सरकार शीघ्र ही दिल्ली भर में सर्वे कराएगी. मंत्री ने बताया कि झुग्गीवासियों को उनकी बस्तियों के पास ही मकान उपलब्ध कराए जाएंगे. मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पिछली ‘आप’ सरकार ने केवल नारे दिए, लेकिन झुग्गीवासियों के विकास के लिए कोई काम नहीं किया.
जमीनी स्तर पर लागू करना बड़ी चुनौती
यद्यपि विधेयक पास हो चुका है, परंतु इसे लागू करने में प्रशासनिक चुनौतियां आ सकती हैं. दिल्ली में अंतिम बार झुग्गियों का आधिकारिक सर्वे वर्ष 2014-15 में हुआ था, जिसमें लगभग 3.5 लाख झुग्गियों की पहचान की गई थी. इसके बाद का सटीक आंकड़ा उपलब्ध न होने के कारण सरकार को पहले व्यापक सर्वे कर वास्तविक संख्या तय करनी होगी, जिसके बाद ही आवंटन प्रक्रिया शुरू हो सकेगी.
विधानसभा में सीएजी रिपोर्ट पर हंगामा, सीएम का ‘आप’ पर हमला
कैग (CAG) रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखे प्रहार किए. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ‘आप’ शासनकाल के भ्रष्टाचार रूपी दीमक को साफ करने का काम कर रही है. भाजपा सरकार ने डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में 19 सीएजी रिपोर्टें सदन के पटल पर रखी हैं, जबकि पिछली सरकार में न तो रिपोर्ट रखी जाती थी और न ही पीएसी (PAC) की बैठकें होती थीं. उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली सब्सिडी और दिल्ली जल बोर्ड में घोटालों का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र से मिलने वाली सहायता राशि भी इस्तेमाल न होने के कारण वापस लौट जाती थी.
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विधानसभा परिसर में तिरंगा यात्रा
सदन की कार्यवाही के इतर, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, कैबिनेट मंत्रियों और विधायकों ने विधानसभा परिसर में तिरंगा यात्रा निकाली. महात्मा गांधी की प्रतिमा से शुरू होकर डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर समाप्त हुई इस यात्रा के दौरान अध्यक्ष ने तिरंगे को लोकतंत्र की धड़कन बताया, वहीं मुख्यमंत्री ने इसे 140 करोड़ भारतीयों की एकता और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग का प्रतीक करार दिया.


