देहरादून, 30 अगस्त 2026: सड़क हादसे में घायल किसी अनजान व्यक्ति की समय पर मदद उसकी जान बचाने में अहम हो सकती है. लेकिन कई लोग पुलिस कार्रवाई या पूछताछ के डर से हादसे में घायल व्यक्ति की मदद करने से पीछे हट जाते हैं. इसी झिझक को दूर करने के लिए उत्तराखंड सरकार गुड सेमेरिटन यानी राह-वीर योजना चला रही है.
इस योजना के तहत सड़क हादसे के बाद गोल्डन ऑवर यानी शुरुआती एक घंटे के भीतर घायल को अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में मदद करने वाले नेक नागरिक को 25 हजार रुपये तक का पुरस्कार दिया जाता है.
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योजना की खास बात यह है कि मददगार को अनावश्यक पुलिस पूछताछ और कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा देने का प्रावधान है. जरूरत पड़ने पर उसकी पहचान को गोपनीय भी रखा जा सकता है.
गोल्डन ऑवर में मदद करने पर 25 हजार तक इनाम
सड़क हादसे के बाद शुरुआती एक घंटा काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी अवधि को गोल्डन ऑवर कहा गया है. उत्तराखंड की राह-वीर योजना में ऐसे व्यक्ति को प्रोत्साहित किया जाता है जो हादसे में घायल किसी अनजान शख्स की मदद के लिए आगे आता है.
अगर कोई नागरिक घायल को समय रहते अस्पताल पहुंचाने और उसकी जान बचाने में मदद करता है, तो उसे 25 हजार रुपये तक का पुरस्कार दिया जा सकता है.
इसका मकसद हादसे के बाद लोगों को सिर्फ तमाशबीन बने रहने के बजाय जरूरतमंद की मदद के लिए आगे आने के लिए प्रोत्साहित करना है.
पुलिस कार्रवाई के डर को दूर करने की कोशिश
हादसे के बाद मदद करने से कई लोग इसलिए बचते हैं क्योंकि उन्हें पुलिस पूछताछ या कानूनी प्रक्रिया में फंसने का डर रहता है.
गुड सेमेरिटन या राह-वीर योजना में ऐसे मददगार को अनावश्यक पुलिस पूछताछ और कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा देने की बात कही गई है. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर मदद करने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जा सकती है.
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह भरोसा पैदा करना है कि घायल की मदद करने वाला नागरिक खुद किसी परेशानी में न फंसे.
एक साल में पांच बार तक पुरस्कार
योजना के तहत एक व्यक्ति को एक साल में अधिकतम पांच बार पुरस्कार मिल सकता है.
यानी कोई नागरिक अलग-अलग सड़क हादसों में जरूरतमंदों की मदद करता है, तो उसे निर्धारित नियमों के तहत एक साल में पांच बार तक सम्मानित किया जा सकता है.
इस व्यवस्था के जरिए बार-बार लोगों की मदद करने वाले नागरिकों को भी प्रोत्साहन देने की कोशिश की गई है.
देश के 10 सर्वश्रेष्ठ राह-वीरों को मिलेगा बड़ा सम्मान
गुड सेमेरिटन योजना सिर्फ राज्य स्तर पर आर्थिक पुरस्कार तक सीमित नहीं है. हर साल देश के 10 सर्वश्रेष्ठ राह-वीरों को भी सम्मानित किया जाता है.
इन चयनित राह-वीरों को एक लाख रुपये, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाता है.
इससे सड़क हादसों में लोगों की मदद करने वाले नागरिकों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और सम्मान देने का प्रयास किया जाता है.
घायल को देखकर आगे बढ़ने के बजाय हाथ बढ़ाएं
योजना का मूल संदेश यही है कि सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अकेला छोड़कर आगे निकलने के बजाय उसकी मदद के लिए कदम बढ़ाया जाए.
किसी अनजान व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने जैसी छोटी-सी कोशिश उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. खासकर हादसे के बाद शुरुआती समय में मदद मिलने से घायल को समय पर चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाया जा सकता है.
सरकार की राह-वीर योजना इसी तरह की मानवीय पहल को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है.
राह-वीरों के अनुभव भी बने प्रेरणा
इस पहल से जुड़े लोगों के अनुभव भी दूसरे नागरिकों को आगे आने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. इस विषय पर ओम प्रकाश डोभाल, जो सेमेरिटन अवार्ड विजेता हैं, ने भी अपने अनुभव साझा किए हैं.
वहीं डॉ. राजीव पाल सिंह, CMO, चमोली की बाइट भी इस अभियान और सड़क हादसों में समय पर मदद की अहमियत से जुड़ी है.
योजना का उद्देश्य सिर्फ पुरस्कार देना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटना के बाद मदद करने के लिए समाज में भरोसा और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है.
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आपकी छोटी मदद किसी की जिंदगी बचा सकती है
सड़क हादसे के बाद घायल व्यक्ति की मदद करना केवल मानवीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी बचाने का मौका भी हो सकता है. राह-वीर योजना के जरिए सरकार ऐसे नागरिकों को आर्थिक पुरस्कार और सुरक्षा का भरोसा देने की कोशिश कर रही है.
गोल्डन ऑवर में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को 25 हजार रुपये तक का पुरस्कार, एक साल में अधिकतम पांच पुरस्कार और देश के 10 सर्वश्रेष्ठ राह-वीरों के लिए एक लाख रुपये, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र का प्रावधान इस पहल को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया है.
संदेश सीधा है, सड़क पर हादसे में किसी घायल को देखकर आगे बढ़ने से पहले मदद के लिए हाथ बढ़ाइए. आपकी छोटी-सी पहल किसी की जिंदगी बचाने में मदद कर सकती है.


