Delhi-Howrah Rail Route: देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल दिल्ली-हावड़ा रेल कॉरिडोर को और अधिक तेज और सक्षम बनाने की कवायद तेज हो गई है. इस रूट पर चौथी रेल लाइन बिछाने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है. चौथी लाइन बनने के बाद ट्रेनों की गति मौजूदा 90-100 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर करीब 130-160 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की उम्मीद है. उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में इसके लिए सर्वे और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है. अलीगढ़ से कानपुर सेंट्रल होते हुए प्रयागराज तक तीसरी लाइन के लिए सर्वे इसी महीने शुरू होने की तैयारी है. वहीं प्रयागराज से पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन तक चौथी लाइन के लिए सर्वे अगले महीने तक शुरू होने की बात कही गई है.
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दो महीने में तैयार होगी DPR
इस पूरे रेल कॉरिडोर में कानपुर सेंट्रल की भूमिका बेहद अहम है. स्टेशन निदेशक अकांशु गोविल के मुताबिक, संबंधित क्षेत्र में सर्वे पूरा होने के बाद करीब दो महीने में डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी. इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी. फिलहाल गाजियाबाद-अलीगढ़ सेक्शन पर तीन लाइनों के जरिए ट्रेनों का संचालन हो रहा है, जबकि चौथी लाइन के लिए सर्वे का काम चल रहा है.
चौथी लाइन से क्या बदलेगा?
चौथी लाइन बनने से दिल्ली-हावड़ा रूट पर ट्रेनों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी. व्यस्त रेलखंड पर ट्रेनों को रोककर दूसरी ट्रेन को रास्ता देने की जरूरत कम होगी. इससे यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों का संचालन भी अधिक सुचारु तरीके से किया जा सकेगा. अतिरिक्त लाइन के कारण भविष्य में इस रूट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और उनकी गति सुधारने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी.
मालगाड़ियों को भी मिलेगा फायदा
नई रेल लाइन का फायदा सिर्फ यात्री ट्रेनों तक सीमित नहीं रहेगा. माल परिवहन की क्षमता बढ़ने से रेलवे पर माल ढुलाई का दबाव बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा. इससे परिवहन लागत घटाने और रेल परिवहन को अधिक कुशल एवं पर्यावरण के लिहाज से बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.
कानपुर सेंट्रल के लिए क्यों है बड़ा बदलाव?
दिल्ली-हावड़ा रेल कॉरिडोर में कानपुर सेंट्रल एक प्रमुख परिचालन केंद्र है. यहां से बड़ी संख्या में एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और मालगाड़ियां गुजरती हैं. ऐसे में चौथी लाइन और अन्य लाइन विस्तार का सीधा असर कानपुर से गुजरने वाली ट्रेनों के संचालन पर पड़ेगा. भविष्य में ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी गति बढ़ाने के लिए भी यह अतिरिक्त लाइन महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इससे दिल्ली से हावड़ा के बीच रेल नेटवर्क की क्षमता और रफ्तार दोनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.


