नई दिल्ली: अच्छी सेहत की शुरुआत हमारी थाली से होती है. हम रोज क्या खाते हैं, कितनी मात्रा में खाते हैं और भोजन में अलग-अलग पोषक तत्वों का कितना संतुलन है, इसका सीधा असर शरीर की ऊर्जा, रोग प्रतिरोधक क्षमता, विकास और लंबे समय तक स्वस्थ रहने पर पड़ता है. इसी उद्देश्य से हर साल 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है.
राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के दौरान लोगों को balanced diet, पोषण और healthy eating habits के बारे में जागरूक किया जाता है. इसका मकसद यह समझाना है कि खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी जरूरी है.
1982 में हुई थी राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की शुरुआत
भारत में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की शुरुआत 1982 में की गई थी. इसका उद्देश्य लोगों को पोषण के महत्व के बारे में जागरूक करना था.
शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए भोजन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज, फाइबर और पर्याप्त पानी का संतुलित होना जरूरी है.
सिर्फ पेट भर जाने का मतलब यह नहीं है कि शरीर की सभी nutritional requirements पूरी हो गईं. इसलिए रोज के भोजन में अलग-अलग food groups को शामिल करना जरूरी है.
सिर्फ रोटी-चावल से पूरी नहीं होती पोषण की जरूरत
अक्सर यह मान लिया जाता है कि घर का बना खाना अपने आप balanced और nutritious होता है. लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता.
अगर किसी meal में रोटी या चावल की मात्रा ज्यादा है और दाल, सब्जी, दही या दूसरे protein sources बहुत कम हैं, तो पेट भर सकता है, लेकिन शरीर को जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाएंगे.
यही वजह है कि एक balanced plate में अलग-अलग तरह के खाद्य पदार्थों को शामिल करना जरूरी है.
अनाज के साथ दाल या कोई अन्य protein source, हरी सब्जियां, मौसमी फल और दूध या दही जैसे food items भोजन को ज्यादा पौष्टिक बना सकते हैं.
महंगे Foods की जरूरत नहीं
संतुलित और पौष्टिक भोजन तैयार करने के लिए हमेशा महंगी चीजों की जरूरत नहीं होती. घरों में आसानी से उपलब्ध foods से भी balanced diet तैयार की जा सकती है.
रोज के भोजन में स्थानीय और सामान्य तौर पर मिलने वाली चीजों को सही combination में शामिल किया जा सकता है. इससे परिवार के सदस्यों की अलग-अलग nutritional needs को पूरा करने में मदद मिल सकती है.
थाली में अनाज जरूर शामिल करें
रोटी, चावल, दलिया, पोहा, उपमा और ओट्स जैसे foods अनाज के स्रोत हैं. इसके अलावा बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज भी भोजन का हिस्सा बनाए जा सकते हैं.
अनाज रोज के भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसके साथ दूसरे food groups को भी शामिल करना जरूरी है.
सिर्फ अनाज पर आधारित भोजन को balanced diet नहीं माना जा सकता. दाल, सब्जी, फल और डेयरी या दूसरे protein sources के साथ भोजन का बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है.
Protein के लिए दाल और दूसरी चीजें
शरीर की पोषण जरूरतों में protein की महत्वपूर्ण भूमिका है. इसके लिए दाल, राजमा, चना, छोले, सोयाबीन, पनीर, दूध, दही, अंडा, मछली या उपलब्ध अन्य protein sources को भोजन में शामिल किया जा सकता है.
खासकर बच्चों, किशोरों और बढ़ती उम्र के लोगों के लिए पर्याप्त protein महत्वपूर्ण माना जाता है.
इसलिए रोज की थाली में सिर्फ पेट भरने वाले foods के बजाय protein-rich foods को भी जगह देना जरूरी है.
रंग-बिरंगी सब्जियां बढ़ाएं
भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ दूसरी रंग-बिरंगी सब्जियों को भी शामिल करना चाहिए.
अलग-अलग रंग की सब्जियां कई तरह के vitamins, minerals और दूसरे nutrients उपलब्ध करा सकती हैं. इसलिए एक ही तरह की सब्जी रोज खाने के बजाय अलग-अलग vegetables को भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है.
सब्जियों की विविधता थाली को ज्यादा balanced बनाने में मदद करती है.
रोज की Diet में मौसमी फल
मौसमी फल भी रोज की diet का हिस्सा बनाए जा सकते हैं. फल खाने को प्राथमिकता देना और मीठे पेय या ज्यादा चीनी वाले juice की जगह पूरा फल लेना बेहतर विकल्प हो सकता है.
फल भोजन में विविधता लाने के साथ कई तरह के पोषक तत्व उपलब्ध करा सकते हैं. इसलिए रोज की खाने की आदतों में fruits को जगह देना उपयोगी माना जाता है.
दूध और दही से मिल सकते हैं Calcium और Protein
दूध, दही और दूसरे dairy products भी balanced diet का हिस्सा हो सकते हैं. ये calcium और protein जैसे पोषक तत्वों के source हो सकते हैं.
दूध या दही को रोज के भोजन में शामिल करने से थाली में पोषण की विविधता बढ़ाई जा सकती है.
हालांकि, एक संतुलित diet सिर्फ किसी एक food group पर निर्भर नहीं होती. अलग-अलग खाद्य पदार्थों का संतुलित combination जरूरी है.
Chips और Packaged Snacks की आदत से बचें
आज की busy lifestyle में chips, biscuits, instant noodles, sweets, sugary drinks और packaged snacks आसानी से रोज की diet का हिस्सा बन जाते हैं.
कभी-कभार इनका सेवन अलग बात है, लेकिन इन्हें रोजमर्रा के भोजन का विकल्प बना लेना ठीक नहीं है. ऐसे foods को regular meals की जगह लेने देने के बजाय balanced food को प्राथमिकता देना बेहतर है.
बच्चों और युवाओं में Screen Time के साथ बढ़ रही Snacking
बच्चों और युवाओं में screen time के साथ snacking की आदत भी बढ़ सकती है. TV या mobile देखते समय बिना ध्यान दिए ज्यादा खाना कुल calorie intake बढ़ा सकता है.
इसलिए खाने के समय भोजन पर ध्यान देना जरूरी है. पैकेट से सीधे खाने के बजाय एक तय मात्रा निकालकर खाने की आदत भी बेहतर food management में मदद कर सकती है.
इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कितना खाना खाया जा रहा है और अनजाने में ज्यादा खाने की संभावना कम की जा सकती है.
कैसी होनी चाहिए आपकी Balanced Plate
एक संतुलित थाली में अलग-अलग food groups का उचित combination होना चाहिए. इसमें अनाज, protein sources, सब्जियां, फल और दूध या दही जैसे foods शामिल किए जा सकते हैं.
साथ ही पर्याप्त पानी पीने की आदत भी जरूरी है. रोज के भोजन में variety बनाए रखना और सिर्फ एक तरह के food पर निर्भर न रहना balanced nutrition की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.
राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का संदेश यही है कि healthy eating के लिए बहुत जटिल बदलाव जरूरी नहीं हैं. रोज की थाली में सही food groups को शामिल करना, packaged snacks की मात्रा पर ध्यान देना और खाने के समय mindful रहना पोषण संबंधी आदतों को बेहतर बनाने की दिशा में उपयोगी कदम हो सकते हैं.


