Ayodhya News: अयोध्या स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में जनसंचार एवं पत्रकारिता और माइक्रोबायोलॉजी विभाग तथा ‘अवध चित्र साधना’, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय फिल्म प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यशाला में फिल्म, रंगमंच और डिजिटल तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को सिनेमा और कहानी कहने की बारीकियों की जानकारी दी.
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कार्यशाला के मुख्य वक्ता और भारतेन्दु नाट्य अकादमी के पूर्व निदेशक फिल्म आयाम प्रांत अरुण ने रंगमंच और संवाद के विकास पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने पाषाण काल की गुफा चित्रकारी से शुरू हुए ‘मेथड ऑफ कम्युनिकेशन’ से लेकर मिस्र, ग्रीक और रोमन सभ्यताओं के नाट्य इतिहास को समझाया. उन्होंने बताया कि संकट और युद्ध के दौर में मनोरंजन की जरूरत ने कॉमेडी नाटकों और सर्कस जैसी विधाओं को जन्म दिया. साथ ही उन्होंने शेक्सपियर के ग्लोब थिएटर और भारत में भरतमुनि द्वारा रचित नाट्यशास्त्र की महत्ता पर भी प्रकाश डाला.
पटकथा लेखन में टैगलाइन और लॉगलाइन का महत्व
स्क्रिप्ट राइटर एवं फिल्म निर्देशक गौतम सिद्धार्थ ने छात्रों को पटकथा लेखन के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया. उन्होंने कहा कि कहानी कहना मानव स्वभाव का अभिन्न हिस्सा है. कहानी यथार्थ और कल्पना के संतुलन से बनती है, जिसे लेखक अपने नजरिए से जीवंत करता है.
उन्होंने छात्रों को टैगलाइन, लॉगलाइन और कैरेक्टर बिल्डिंग के जरिए प्रभावी पटकथा तैयार करने के तरीके बताए. उन्होंने समझाया कि मजबूत किरदार और स्पष्ट कहानी किसी भी पटकथा को प्रभावशाली बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
सिनेमा में AI की भूमिका पर चर्चा
दूरदर्शन के पूर्व तकनीकी निदेशक जी.डी. मिश्र ने सिनेमा में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका पर व्याख्यान दिया. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में AI से बचना संभव नहीं होगा. उन्होंने छात्रों को ChatGPT, Gemini और Meta जैसे लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स के संतुलित उपयोग के बारे में बताया.
उन्होंने AI के इस्तेमाल के साथ फैक्ट-चेकिंग की अनिवार्यता पर भी जोर दिया. साथ ही मेटा आधारित AI वीडियो एडिटिंग की उपयोगिता से विद्यार्थियों को अवगत कराया.
किताबें पढ़ना और सूक्ष्म अवलोकन जरूरी
कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से फिल्म, पटकथा और तकनीक से जुड़े सवाल पूछे. विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया. समापन वक्तव्य में अरुण ने अध्ययन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कल्पनाशीलता, एकाग्रता और सूक्ष्म अवलोकन को विकसित करने के लिए पुस्तकों का अध्ययन जरूरी है.
कार्यक्रम का आयोजन माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र कुमार के निर्देशन में हुआ. कार्यशाला का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन अयोध्या महानगर के वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक हिंदी समाचार पत्र के संपादक अमित शंकर ने किया. कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और फिल्म निर्माण व कहानी कहने से जुड़ा व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया.


