नई दिल्ली. केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय रेलवे की क्षमता बढ़ाने के लिए 10,700 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं के तहत पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में करीब 656 किलोमीटर रेलवे नेटवर्क बढ़ाया जाएगा.
नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे की लाइन क्षमता बढ़ाना, भीड़ कम करना और ट्रेनों के संचालन को अधिक प्रभावी बनाना है.
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किन तीन रेल परियोजनाओं को मिली मंजूरी?
सरकार ने तीन प्रमुख मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इनमें खड़गपुर से झारसुगुड़ा चौथी लाइन, कटनी से पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर से पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं.
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद मौजूदा भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी. इनका दायरा पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों तक रहेगा.
रेलवे की लाइन क्षमता बढ़ेगी
अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं से रेलवे की लाइन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. इससे ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होगी और operational efficiency में सुधार आएगा.
इसके अलावा सेवा की reliability बढ़ाने और congestion यानी भीड़भाड़ कम करने में भी इन परियोजनाओं की भूमिका होगी. ज्यादा लाइन उपलब्ध होने से रेलवे को ट्रेनों के संचालन को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी.
दक्षिण भारत में भी 5 मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स मंजूर
कैबिनेट ने दक्षिण भारत से जुड़ी पांच मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है. ये परियोजनाएं तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों से होकर गुजरेंगी.
इन परियोजनाओं के जरिए भारतीय रेलवे के नेटवर्क में करीब 540 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी. इनकी कुल अनुमानित लागत 10,021 करोड़ रुपये से अधिक है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने की योजना है.
इन रूट्स पर होगा काम
दक्षिण भारत की मंजूर परियोजनाओं में अरक्कोणम से रेणिगुंटा तीसरी और चौथी लाइन, व्हाइटफील्ड से बेंगलुरु तीसरी और चौथी लाइन तथा होसुर से ओमलूर लाइन का दोहरीकरण शामिल है.
सरकार के मुताबिक, इन मंजूर परियोजनाओं से करीब 2,100 गांवों की connectivity बेहतर होगी. इन गांवों की कुल आबादी करीब 52 लाख बताई गई है.
इससे इन इलाकों में रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के साथ यात्रियों और माल परिवहन दोनों के लिए connectivity को बेहतर करने में मदद मिलेगी.
सात हाई डेंसिटी कॉरिडोर होंगे फोर-लाइन
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने सभी सात high density railway corridors को four-lining यानी quadrupling करने का फैसला किया है.
इन सात प्रमुख कॉरिडोर में दिल्ली-हावड़ा, मुंबई-हावड़ा, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-गुवाहाटी, दिल्ली-चेन्नई, हावड़ा-चेन्नई और मुंबई-चेन्नई रूट शामिल हैं.
इन कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 11,000 किलोमीटर के रेलवे नेटवर्क की है.
2,000 किलोमीटर की फोर-लाइनिंग पूरी
सरकार के मुताबिक, इन high density railway corridors में करीब 2,000 किलोमीटर की four-lining का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है.
अब जिन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, वे इन्हीं high density railway networks से संबंधित हैं. इनका उद्देश्य प्रमुख रेल मार्गों पर लाइन क्षमता बढ़ाकर ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारू बनाना है.
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रेलवे नेटवर्क को मिलेगा बड़ा विस्तार
एक तरफ 656 किलोमीटर नेटवर्क बढ़ाने वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण भारत में 540 किलोमीटर से जुड़े पांच मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को भी हरी झंडी दी गई है.
सरकार का फोकस प्रमुख रेलवे रूट्स पर अतिरिक्त लाइनें तैयार करने, congestion कम करने और संचालन क्षमता बढ़ाने पर है. इन परियोजनाओं के पूरा होने के साथ रेलवे नेटवर्क की क्षमता और connectivity में और विस्तार होने की उम्मीद है.

