नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेल मंत्रालय की करीब 10,021 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में रेलवे की लाइन क्षमता बढ़ेगी.
स्वीकृत परियोजनाओं के तहत भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 540 किलोमीटर की वृद्धि होगी. इससे यात्रियों और माल परिवहन के लिए कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ रेलवे की operational efficiency और service reliability में सुधार होने की उम्मीद है.
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इन 5 रेल परियोजनाओं को मिली मंजूरी
कैबिनेट ने जिन पांच परियोजनाओं को मंजूरी दी है, उनमें अलग-अलग रेल मार्गों पर तीसरी, चौथी लाइन और दोहरीकरण से जुड़े काम शामिल हैं.
अरक्कोनम-रेनीगुंटा तीसरी और चौथी लाइन की लंबाई 77 किलोमीटर होगी. इसके अलावा व्हाइटफील्ड-बेंगलुरु तीसरी और चौथी लाइन के लिए 47 किलोमीटर का काम किया जाएगा.
होसुर-ओमलूर दोहरीकरण परियोजना 147 किलोमीटर की होगी. वहीं सलेम-करूर-डिंडीगुल दोहरीकरण 159 किलोमीटर का है.
इसके अलावा सिकंदराबाद (घाटकेसर)-काजीपेट मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना के तहत 110 किलोमीटर का रेल नेटवर्क विकसित किया जाएगा.
540 किलोमीटर बढ़ेगा रेलवे नेटवर्क
इन पांच परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 540 किलोमीटर की वृद्धि होगी. परियोजनाएं तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों को कवर करेंगी.
कैबिनेट के मुताबिक, लाइन क्षमता बढ़ने से इन मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी. मल्टी-ट्रैकिंग से operational congestion कम करने और सेवा की विश्वसनीयता बढ़ाने पर भी जोर है.
2,121 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी
स्वीकृत परियोजनाओं का असर रेलवे नेटवर्क से जुड़े ग्रामीण इलाकों पर भी पड़ेगा. सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से करीब 2,121 गांवों की connectivity बेहतर होगी.
इन गांवों की कुल आबादी करीब 52 लाख बताई गई है. लाइन क्षमता में बढ़ोतरी से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए अधिक सुचारू रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है.
कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक बेहतर पहुंच
इन रेल परियोजनाओं से दक्षिण भारत के कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने की संभावना है.
इनमें तिरुपति, सुब्रमण्य स्वामी मंदिर (तिरुत्तनी), श्री पद्मावती अम्मावारी मंदिर (तिरुचानूर), कोटिलिंगेश्वर देवालय, श्री सीथी ब्यारेस्वरा स्वामी मंदिर, बंगारू तिरुपति, कोलार गोल्ड फील्ड्स, होगेनक्कल जलप्रपात और होसुर किला शामिल हैं.
इसके अलावा मेट्टूर बांध, कोडाइकनाल की पहाड़ियां, सत्यमंगलम वन्यजीव अभयारण्य, नमक्कल अंजनेयर मंदिर, नमक्कल किला, कल्याण पसुपतेश्वर मंदिर, यादगिरिगुट्टा मंदिर, भोंगीर किला, सुरेंद्रपुरी और स्वर्णगिरि मंदिर जैसे स्थानों की कनेक्टिविटी को भी फायदा हो सकता है.
माल ढुलाई की क्षमता भी बढ़ेगी
ये रेल मार्ग सिर्फ यात्री परिवहन के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं हैं. सरकार के अनुसार, इनका इस्तेमाल कोयला, सीमेंट, लौह एवं इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए भी किया जाता है.
क्षमता विस्तार से अतिरिक्त freight traffic में करीब 47 मिलियन टन प्रति वर्ष यानी 47 MTPA की वृद्धि होने की संभावना है.
इससे इन महत्वपूर्ण औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स रूट्स पर माल परिवहन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
पीएम गति शक्ति के तहत बनाई गई योजना
इन परियोजनाओं की योजना PM Gati Shakti National Master Plan के तहत बनाई गई है. इसमें integrated planning और विभिन्न stakeholders के साथ consultation के जरिए multi-modal connectivity और logistics efficiency बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है.
सरकार के मुताबिक, परियोजनाओं का उद्देश्य लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए seamless connectivity उपलब्ध कराना है.
रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
कैबिनेट के मुताबिक, ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘New India’ के विजन के अनुरूप हैं. इनके जरिए क्षेत्र के व्यापक विकास को बढ़ावा देने और लोगों को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की दिशा में काम करने का लक्ष्य है.
परियोजनाओं के जरिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की उम्मीद भी जताई गई है.
पर्यावरण को भी मिलेगा फायदा
रेलवे को सड़क परिवहन की तुलना में पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन साधन बताया गया है. इन परियोजनाओं से देश के climate goals को हासिल करने और logistics cost को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
सरकार के अनुमान के मुताबिक, क्षमता विस्तार से करीब 8 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आ सकती है. इसके साथ लगभग 42 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम होने की संभावना है, जिसे करीब 2 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर बताया गया है.
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दक्षिण भारत में रेलवे विस्तार को नई रफ्तार
करीब 10,021 करोड़ रुपये की लागत वाली ये पांच परियोजनाएं दक्षिण भारत के चार राज्यों में रेलवे की क्षमता बढ़ाने से जुड़ी हैं. 540 किलोमीटर के अतिरिक्त नेटवर्क, 2,121 गांवों की बेहतर कनेक्टिविटी और freight capacity में 47 MTPA संभावित वृद्धि के साथ इन परियोजनाओं का असर यात्री और माल परिवहन दोनों पर पड़ सकता है.


