उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए CO-20016 और CO-18222 नाम की दो नई प्रजातियां उम्मीद बनकर सामने आई हैं. CO-20016 अगेती और CO-18222 सामान्य प्रजाति है. सहारनपुर में गन्ना विभाग और बिड़वी चीनी मिल ने इनकी पौध तैयार कराने का काम शुरू किया है. दोनों किस्में अभी शोध और आधिकारिक रिलीज की प्रक्रिया में बताई गई हैं. इसलिए मंजूरी से पहले बड़े क्षेत्र में इनकी बुवाई नहीं करनी चाहिए.
1300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन का दावा
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, बिड़वी चीनी मिल के एजीएम विकास सिंह ने बताया कि परीक्षणों में दोनों प्रजातियों से करीब 1300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गन्ना उत्पादन मिला. इसके मुकाबले CO-0238 से लगभग 1200 क्विंटल उत्पादन दर्ज किया गया. इस आधार पर नई प्रजातियों से करीब 100 क्विंटल अधिक उपज की संभावना जताई गई है.
रिपोर्ट में दोनों किस्मों का चीनी परता भी CO-0238 से थोड़ा अधिक बताया गया है. इससे किसानों और चीनी मिलों को फायदा मिलने की उम्मीद है. हालांकि, ये परीक्षणों के आंकड़े हैं. हर खेत में समान उत्पादन की गारंटी नहीं होती. मिट्टी, मौसम, सिंचाई और खेती के प्रबंधन से नतीजे बदल सकते हैं.
41 गांवों के 76 किसानों को मिला बीज
विकास सिंह के मुताबिक, मुजफ्फरनगर के रोहाना क्षेत्र के बड़कली गांव से करीब 184 क्विंटल बीज लाया गया. इसे 41 गांवों के 76 किसानों को वितरित किया गया. किसानों को गन्ने की एक आंख यानी बड़ के हिसाब से दो रुपये की दर पर बीज दिया गया. इसका उद्देश्य खेतों में पौधशालाएं तैयार करना है. बेहट गन्ना समिति क्षेत्र के तीन से चार किसानों को भी बीज दिया गया है.
जनवरी 2027 में रिलीज की उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2027 में गन्ना विभाग की कोर कमेटी की बैठक प्रस्तावित है. इसके बाद दोनों प्रजातियों को रिलीज किए जाने की उम्मीद है. मंजूरी मिलने पर फरवरी 2027 की बसंतकालीन बुवाई के लिए बीज उपलब्ध कराने की योजना है. यह संभावित समयसीमा है; अंतिम स्थिति विभाग की घोषणा से स्पष्ट होगी.
रेड रोट रोग से बचाव की उम्मीद
इन प्रजातियों की खासियत रेड रोट यानी लाल सड़न रोग के प्रति बेहतर प्रतिरोधक क्षमता बताई गई है. यह फफूंदजनित बीमारी गन्ने को नुकसान पहुंचाती है. CO-0238 के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के बाद उत्तर प्रदेश में रेड रोट की समस्या ने इसकी खेती को प्रभावित किया है.
मोटा तना और आसान छिलाई
दैनिक जागरण के अनुसार, दोनों प्रजातियों के गन्ने का तना मोटा और ठोस है. पत्तियों में कांटे या रोए नहीं होने से छिलाई आसान हो सकती है. रोग प्रतिरोधकता के कारण दवाओं पर खर्च घटने की संभावना भी जताई गई है. वास्तविक लागत खेत की स्थिति पर निर्भर करेगी.
किसानों के लिए जरूरी सलाह
किसानों को प्रमाणित और रोगमुक्त बीज लेना चाहिए. नई किस्म अपनाने से पहले गन्ना समिति या कृषि विभाग से अपने क्षेत्र के लिए इसकी उपयुक्तता पूछें. किसी एक प्रजाति पर निर्भर रहने के बजाय अनुशंसित किस्मों में विविधता रखना बेहतर है. कुल मिलाकर, दोनों प्रजातियों में संभावना है, लेकिन इनका वास्तविक प्रदर्शन आधिकारिक रिलीज और खेतों में खेती के बाद ही स्पष्ट होगा.
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