Aligarh Ring Road News: अलीगढ़ में प्रस्तावित रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद 37 गांवों में जमीन से जुड़े काम प्रभावित हैं. करीब दो महीने से इन गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगी हुई है. इससे बैनामा, नामांतरण, सीएलयू, गिफ्ट डीड, बंधक और विनिमय जैसे राजस्व कार्यों के लिए लोगों को तहसील और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.
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24 जून को जारी हुई थी अधिसूचना
केंद्र सरकार की ओर से 24 जून को अलीगढ़ रिंग रोड के लिए अधिसूचना जारी की गई थी. इसके बाद 9 जुलाई को प्रशासन ने कोल और गभाना तहसील के संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए. निर्देश के मुताबिक, प्रस्तावित रिंग रोड में आने वाली संभावित भूमि से जुड़े बैनामा, नामांतरण, सीएलयू, कॉलोनी विकास, गिफ्ट डीड, बंधक और विनिमय जैसे कार्यों के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एनओसी जरूरी कर दी गई.
जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे गांव में रोक लागू होने से उन जमीनों के सौदे भी प्रभावित हो रहे हैं, जिनके रिंग रोड परियोजना में शामिल होने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है. कई लोगों ने जमीन बेचने का सौदा पहले से तय कर रखा है, लेकिन बैनामा नहीं हो पा रहा है. वहीं, जमीन खरीदने के लिए रकम और अन्य तैयारियां कर चुके लोगों को भी इंतजार करना पड़ रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक, तहसील और एनएचएआई कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है कि किन गाटा संख्या की जमीन रिंग रोड की जद में आएगी.
सर्वे पूरा, शासन को भेजी गई रिपोर्ट
एनएचएआई के परियोजना निदेशक शेषनाथ यादव के अनुसार संबंधित भूमि का स्थानीय स्तर पर सर्वे पूरा हो चुका है. इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है. शासन से मंजूरी मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर गजट प्रकाशित किया जाएगा. इसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
गभाना के 10 और कोल के 27 गांव शामिल
प्रस्तावित अलीगढ़ रिंग रोड परियोजना में गभाना तहसील के 10 और कोल तहसील के 27 गांव, यानी कुल 37 गांव शामिल हैं. पला सल्लू, कौरह रुस्तमपुर, सांगोर, गिरधरपुर, खेरिया हैवत खां, कलुआ, दादूपुर कोटा, सुमेरपुर, समस्तपुर कोटा, अमरौली का नाम शामिल है.
कोल तहसील के 27 गांव
कोल तहसील के अंतर्गत कस्तली वैश्य, पला मजरा कस्ती वैश्य, चंदौखा, छेरत सुढ़ियाल, साठा, खेरूपुरा, सपेरा भानपुर, किठारा, जटपुरा, बरौठ, मोरथल, मोहनपुर, नयाबांस नरेंद्रगढ़ी, आजमाबाद मछुआ, सिकंदरपुर मछुआ, खान आलमपुर, इमलानी, मई, महमूदपुर जमालपुर, चंगेरी, भोजपुर, अलहदादपुर, पनैठी, अदौन, जुलूपुर सिहोर, बरौठा और हरदुआगंज शामिल हैं. इन सभी गांवों में जमीन से जुड़े निर्धारित कार्यों के लिए एनएचएआई की एनओसी की व्यवस्था लागू है.
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गाटा संख्या स्पष्ट होने का इंतजार
स्थानीय लोगों की मुख्य मांग है कि रिंग रोड की जद में आने वाली जमीन की गाटा संख्या स्पष्ट रूप से चिन्हित की जाए. इससे परियोजना में शामिल जमीन और उससे बाहर की भूमि को अलग किया जा सकेगा और सामान्य जमीन के लेनदेन से जुड़े मामलों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है. फिलहाल सर्वे रिपोर्ट शासन के स्तर पर है. गजट प्रकाशन और आगे की अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना की जमीन की स्थिति और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है.


