Author: Anusa

अनुषा पिछले 3 वर्षों से Readmeloud.com में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. हेल्थ, यूटिलिटी, टेक और ट्रैवल जैसे विषयों पर रिसर्च-बेस्ड और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करना उनकी विशेषज्ञता है. अनुषा को मीडिया इंडस्ट्री में 5 साल का अनुभव है. उन्होंने करियर की शुरुआत रिपोर्टिंग से की और लोकल प्रिंट मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कदम रखा. ईटीवी भारत जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ काम कर चुकी अनुषा को डिजिटल न्यूज़ और स्टोरीटेलिंग में मजबूत पकड़ हासिल है.

अम्मा…अम्मा… आटे की चिरैया बना दो,वो उड़े न तो वही कागज के पंख लगा दो,मैं हाथों में लेकर पूरे घर में दौड़ जाउंगी,आटे की चिरैया में थोड़ा रंग लगा दो,बस एक बार मेरा बचपन लौटा दो…. दादा मेरा हाथ थाम लो,ले चलो मुझे उन्हीं खेतों-बागों में,जहां दिन भर भगाते थे बंदर-गाय,जहां शाम को चाचू लाते थे गरम चाय,कुल्हड़ वाली वही चाय पिलवा दो,बस एक बार मेरा बचपन लौटा दो…. पापा….जब काम से वापस आते थे,हम दौड़कर उनको लिपट जाते थे,कुछ न कुछ जरूर लाए होंगे खाने के लिए,इसी आस में उनका पूरा झोला खंगाल जाते थे,शक्करपाले, पेठा और जलेबी खिलवा…

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मेरा सपना, मेरा बचपनआज भी वो बचपन याद आता है. वो तेरी-मेरी पेंसिल बड़ी-छोटी करना,वो छोटा-छोटी बातों पर शिकायत करना,वो फिर एक मिनट का रोना और एकमिनट का हंसना बहुता याद आता है. वो मम्मी के सोने पर जोर से शोर मचाना,और न चुप होने पर मार खाना,आज भी बहुत याद आता है. वो तेरा-मेरा घर-घर खेलना,वो एक साइकिल पर तेरा-मेरा घूमना,बहुत याद आता है. वो स्कूल न जाने के लिए पेट दर्दका बहाना बनाना और फिर एकचॉकलेट की बात सुनकर पेट दर्द भूल जानाआज भी बहुत याद आता है. -तुम्हारी…

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मां का नाम सुनते ही न जाने कितने ही लोगों के चेहरे उनके प्यार में झुक जाते हैं. मां वह शख्स है, जो खुद भूखी रहकर बच्चों का पेट भरती है. खुद धूप में रहकर बच्चे के लिए आंचल से छांव करती है. इंसान की मां हो या किसी जीव-जंतु की, उसका दिल कभी नहीं बदलता. इंटरनेट की दुनिया में आजकल सोशल मीडिया पर एक से बढ़कर एक अलग-अलग तरह के वीडियो देखने को मिलते हैं. हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ, जिसको देखकर लोग मिसालें देने लगे. मां अपने बच्चे के लिए किस तरह…

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हां, तुम्हारी फिक्र करना,रोज तुम्हें परेशान करना,तुम्हारी खुशियों में खुश हो जाना,रात को सबसे छुपकर तुमसे बात करना,अपनी यादों में बस तुम्हें याद करना.मुझे ये सब अच्छा लगने लगा है,हां, मुझे तुमसे प्यार होने लगा है….यूं तेरी छोटी-छोटी बातों पर हंसना,यूं तुझसे रूठना,मुझे ये सब अच्छा लगने लगा है,हां, मुझे तुमसे प्यार होने लगा है….वो तेरी मुस्कान को देखकर दिल को सुकून मिलना,वो पल-पल तेरी बातों को याद करना,मुझे ये सब अच्छा लगने लगा है,हां, मुझे तुमसे प्यार होने लगा है….वो तेरा डांटना, वो मेरा रोना,वो तेरा मनाना, वो मेरा न मानना,वो तेरा मुझे हंसाना, मनाना,मुझे ये सब अच्छा लगने…

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भागदौड़ भरी इस जिंदगी में आजकल लोगों को अपना ध्यान रखने का समय नहीं मिलता है. कामकाज में इंसान इतना ज्यादा व्यस्त हो गया है कि उसे अपने खाने-पीने तक का ध्यान रखने का समय नहीं है. इसका खामियाजा उसे तरह-तरह की शारीरिक बीमारियों को झेलकर चुकाना पड़ता है. खानपान और पानी की कमी का शरीर में सबसे ज्यादा असर इंसान के बालों पर पड़ता है. जरा सा मौसम बदला तो बाल झड़ना शुरू. जरा सा पानी की कमी हुई तो भी बाल गिरने शुरू हो जाते हैं. अब तो बॉलीवुड में गंजेपन को लेकर कई तरह की फिल्में भी…

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देवों के देव महादेव और सबके चहेते भगवान भोलेनाथ भक्तों में काफी प्रिय है. कहा जाता है कि महादेव तो सच्चे मन से चढ़ाए गए लोटे भर जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं. भगवान शंकर का दिन सोमवार माना जाता है. जिन भी भक्तों को अपनी कोई इच्छा मांगनी होती है, वह सोमवार के दिन ही शिव मंदिर में जाकर पूजा करते हैं. सोमवार को कई लोग भगवान महादेव का व्रत भी रखते हैं. सोमवार के दिन सच्चे और पवित्र भाव से की गई पूजा को महादेव अवश्य स्वीकारते हैं. कई लोग सोमवार के दिन व्रत भी रखते हैं.…

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जब वह सलाखों से बाहर निकले तो उनके चेहरे पर एक शिकन तक न थी… ऐसा लग रहा था कि मानों सजा नहीं, किसी तीर्थ से लौटकर आए हों… फिल्मों में तो गुंडों के नाम के पीछे ‘भाई’ लगता है लेकिन अपने असली नाम के पीछे ‘भाई’ जैसे पवित्र शब्द को लगाकर दागदार करने वाले ये दरिंदे मुस्कुराहट के साथ जेल से बाहर आए तो लोगों ने इनका ऐसे स्वागत किया, जैसे मानों जंग जीतकर आए हों. फूल-मालाएं पहनाई गईं…माथे पर तिलक किया गया…पैर छूकर आशीर्वाद लिया गया… बस करो ऐ समाज, और कितना गिरोगे तुम सब…अरे वो दरिंदे हैं…कोई…

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चाणक्य नीति:- वैसे तो मानव समाज के कल्याण के लिए कई तरह के नियम-कायदे बताए जाते हैं लेकिन समाज और मानव की भलाई के लिए भारत के मशहूर आचार्य चाणक्य ने जो बातें बताई हैं, वह शत-प्रतिशत सच साबित हुई हैं. इतना ही नहीं, जिस भी इंसान ने आचार्य चाणक्य की इन नीतियों का अपने जीवन में अनुसरण किया है, उसकी कई समस्याओं का अंत भी हो जाता है. चाणक्य नीति में पुरुषों के लिए कई अहम बातें बताई गई हैं. आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में ऐसी 4 खास बातों का उल्लेख किया है, जिन्हें पुरुषों को जानना…

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तुम घने जंगल,तो लकड़ी हूं मैं,तुम लहराते सागर,तैरती इक मछली हूं मैं. भूलकर न गई तेरी नजर,बनारस की वो गली हूं मैं,फूल-फूल मंडराने वाले भंवरे,सपनों भरी तितली हूं मैं. होगा तू कोई खिला फूल,मासूम इक कली हूं मैं.चेहरे देख तेरे हजार,जलन में जली हूं मैं. उठी न तेरे दिल में कभी,हां वो खलबली हूं मैं,महसूस कर ये चाहतें,नादां नहीं जरा चुलबुली हूं मैं.

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सुबह उठ जाएं जो एक बार,दिन भर जुटे रहते हैं हम,न लेकर चैन की सांस,घंटों काम करते रहते हैं हम.आखिर क्या चाहते हैं हम… अकेले थे आए, अकेले है जाना,फिर क्यों भूल बैठे हैं आज मुस्कुराना,खुशियां रहती हैं अब रूठी सी,करीब रहने लगे हैं गम,आखिर क्या चाहते हैं हम… खुद की भी एक मासूम सी जिंदगी है,कमाई से कहीं ज्यादा वो बड़ी है,भूल गए कि तुम खुद हो एक अनमोल रत्न,जिसके लिए जहां में लेने पड़ते हैं सो जन्म,आखिर क्या चाहते हैं हम…आखिर क्या चाहते हैं हम…

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