Utkarsh Gupta Ayodhya Motivational Story: न सुनी गई उसकी खामोशी, न देखे गए उसके ज़ख्म, ताने मिले उसे हजार, अपनों ने लगाए मिर्च के मरहम…. यह लाइनें पितृ सत्तात्मक समाज की महिलाओं के लिए कही जाएं तो शायद गलत नहीं होंगी. इस समाज ने महिलाओं को रिश्तों की जिम्मेदारी की डोर थमा कर उनका अस्तित्व छीन लिया है. चाहे घर संभालने वाली महिलाएं हों या फिर वर्किंग, दोनों को ही इस समाज के पुरुष ऐसी ट्रीट करते हैं, जैसे कि वह खुद भगवान हों…. यह कहना है उत्तर प्रदेश के अयोध्या के उत्कर्ष गुप्ता का.
जहां यह समाज महिलाओं के हक के बारे में बात करना तो दूर, दी जाने वाली यातनाओं को भी इग्नोर कर देता है, वहीं, यूपी के उत्कर्ष गुप्ता अपने कंटेंट के जरिये बखूबी उनकी आवाज बन रहे हैं. वह अपनी रील्स में समाज और परिवार में फंसी महिलाओं की तकलीफों को तो उजागर कर ही रहे हैं, साथ ही एक पुरुष का उसकी मां-बहन-बेटी और पत्नी के प्रति क्या कर्तव्य होते हैं, उनको भी बता रहे हैं. वैसे तो वह कई शॉर्ट फिल्मों में काम कर चुके हैं लेकिन इस समय वह सोशल मीडिया पर अपनी स्किल्स से समाज को सही राह दिखा रहे हैं.

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बता दें कि जिस उम्र में बच्चे ठीक से बोलना नहीं जानते हैं, ठीक से पढ़ना नहीं जानते हैं, उस उम्र की क्लास में उत्कर्ष ने अपने फ्यूचर को डिसाइड कर लिया था यानी की एक्टर बनने की मंजिल को फाइनल कर लिया था. बात कर रहे हैं प्रभु श्री राम की पावन धरा अयोध्या के अमराहा के रहने वाले उत्कर्ष गुप्ता की, जो कि आजकल अपने वीडियोज के जरिए सोशल मीडिया पर खूब धमाल मचा रहे हैं.
जिस पितृ सत्तात्मक सोच वाले भारत में लोग महिलाओं के बारे में उनकी तकलीफों के बारे में बोलना भी पसंद नहीं करते हैं, उनके बारे में वह न केवल खुलकर लोगों को बता रहे हैं बल्कि कैसे उन चीजों को खत्म किया जा सकता है, इसके बारे में भी बड़े ही मजेदार तरीके से सॉल्यूशन दे रहे हैं. आपने सुना होगा कि सोशल मीडिया पर पहचान बनाना बड़ा ही आसान होता है लेकिन असली पहचान तो उनकी मानी जानी चाहिए, जो कि इस समाज में बदलाव लाने का काम करें. कुछ ऐसा ही कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के उत्कर्ष गुप्ता.
वैसे तो वह सोशल मीडिया पर डिजिटल क्रिएटर हैं लेकिन वह इसे डिजिटल क्रिएशन के साथ-साथ अपनी एक्टिंग स्किल्स को लोगों के सामने पहुंचने का बेहतरीन प्लेटफार्म मानते हैं. आज आपको उत्कर्ष गुप्ता की जर्नी बताते हैं.
उनकी शुरुआती पढ़ाई ND DAV नाम के स्कूल से हुई हालांकि उन्होंने अपना एक्सपीरियंस वहां के लिए खास नहीं बताया. उनका कहना है कि वह ऐसा स्कूल था, जहां पर टीचर्स के बच्चों को ज्यादा प्रिविलेज मिलती थी. 6 से 10 तक उन्होंने उसी स्कूल में पढ़ाई की लेकिन उनका कुछ खास मन नहीं लगा. इसके बाद उन्होंने अयोध्या के जिंगल बेल अकादमी में एडमिशन लिया जहां पर महज 2 साल की पढ़ाई में ही सारा ड्रामा खत्म कर दिया.
अपनी मजेदार जर्नी के बारे में बताते हुए उत्कर्ष गुप्ता कहते हैं कि वह कक्षा 2 में ही डिसाइड कर चुके थे कि आगे चलकर वह एक्टर बनेंगे. Readmeloud.com से बातचीत करते हुए उत्कर्ष ने बताया कि इस वह कई बार स्कूल पर में हिस्सा लेते थे. जैसे-जैसे बड़े होते गए, उन्हें पता चला कि थिएटर में जाने के लिए हिंदी पर फोकस करना जरूरी है. ऐसे में वह अपने हिंदी पर काफी काम करते थे. 12th की पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने BHU से बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई शुरू की और साथ ही साथ थिएटर को भी चालू रखा. वह कई ड्रामा में पार्टिसिपेट करते थे. बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई पूरी होने के बाद साल 2019 में उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया में एडमिशन लिया और यहां पर उन्होंने अपनी एक्टिंग की पढ़ाई की.
वह बताते हैं कि तब तक कोरोना आ चुका था, इसके चलते उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा. हालांकि इस बीच उन्होंने दो मशहूर प्ले में काम किया- एक ‘मालविका अग्निमित्रम’ और दूसरा ‘बसावन मामा’. एक ऐसा प्ले है, जो कि मध्य प्रदेश से जुड़ा हुआ है और कई मशहूर जगहों पर उसका मंचन भी किया गया है. उत्कर्ष ने दो शॉर्ट फिल्मों गुलाब जामुन और धुंध में भी काम किया है. इन दोनों ही फिल्मों को काफी पसंद किया गया.
लोगों ने मोहब्बत में पहाड़ तोड़ दिए, इमारतें बनवा दीं और मैंने….
उत्कर्ष बताते हैं कि उन्होंने यूपीएससी की तैयारी भी कि जॉब भी की. साथ ही साथ कई अलग-अलग जगह पर प्रोडक्शन काम भी किया लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. उनकी जिंदगी सही ट्रैक पर नहीं चल रही थी. वह करना तो बहुत कुछ चाहते थे लेकिन शायद वह ‘किक’ नहीं मिल रही थी, जो वह चाहते थे. मजेदार बात तो यह है कि उन्होंने एसएससी की तैयारी भी की. इसके बाद बाद उन्होंने सोशल मीडिया का रुख किया. आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्कर्ष गुप्ता कभी भी इंस्टाग्राम पर आना ही नहीं चाहते थे लेकिन कहते हैं ऊपर वाला हर किसी के लिए पहले से ही रास्ता बना कर रखता है. कुछ ऐसा ही हुआ इनके साथ उत्कर्ष के साथ. वह बताते हैं कि वह सिर्फ खुद के लिए सफल नहीं होना चाहते हैं बल्कि उस शख्स के लिए भी सक्सेस होना चाहते हैं कि जिसके साथ वह अपनी जिंदगी देखते हैं. Readmeloud.com से उन्होंने कहा कि ‘लोगों ने मोहब्बत में पहाड़ तोड़ दिए, इमारतें बनवा दीं, मैंने एल्गोरिदम क्रैक किया है….. ‘
उत्कर्ष बताते हैं कि उन्होंने महज 1 महीने के अंदर इंस्टाग्राम पर करीब 45 से 46 वीडियो डाले. फिर भी चमत्कार नहीं हुआ उनकी हिम्मत दम तोड़ने लगी थी लेकिन फिर उन्होंने सास-बहू से जुड़ा एक वीडियो जब अपने इंस्टाग्रा अकाउंट पर डाला तो उसने उनकी जिंदगी बदल दी. अगली सुबह जब उन्होंने अपना फोन चेक किया तो उस पर मिलियंस में Views थे. उनको इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था कि उनका कंटेंट लोगों को इतना ज्यादा पसंद आया. इस बात की सच्चाई जानने के लिए उन्होंने एक बार फिर इस रील का पार्ट 2 अपलोड किया, उसने भी ताबड़तोड़ व्यूज और लाइक्स हासिल किए. इसके बाद उत्कर्ष को हिम्मत मिली और वह सोशल मीडिया पर न केवल अपनी एक्टिंग स्किल्स को तराशने लगे बल्कि उन लोगों के लिए भी आवाज उठा रहे हैं, जिनके बारे में यह पढ़ा-लिखा समाज भी बात नहीं करना चाहता है.
मां से विरासत में मिला है Poetry का टैलेंट
उत्कर्ष कहते हैं कि उन्हें शायरी लिखना-पढ़ना काफी पसंद है. इसके लिए प्रेरणा वह अपनी मां को मानते हैं. उनका कहना है कि यह शायद उन्हें विरासत में मिला है. उनकी मां अपने कॉलेज टाइम पर शायरी लिखती थी और आकाशवाणी में भी उन्हें पढ़ती थी. इसके साथ ही अपनी मां के साथ कंटेंट क्रिएशन को लेकर वह मजेदार बात बताते हैं कि जब उन्होंने पहली बार उनसे रील्स बनाने की बात कही तो उन्होंने मना कर दिया लेकिन जब बाद करियर के उत्कर्ष के लिए आई तो उन्होंने अपने कैमरा फीयर को छोड़कर बेटे के साथ एक्टिंग करना शुरू किया. उनके वीडियोज उनका छोटा भाई सूट करता है.
मैसेज बॉक्स में लोग देते हैं धन्यवाद
उत्कर्ष गुप्ता बताते हैं कि उनके वीडियो से कई महिलाएं और पुरुष खुद को रिलेट करते हैं और पर्सनली मैसेज करते हैं. साथ ही साथ उनकी आवाज बनने के लिए वह उन्हें धन्यवाद भी देते हैं. उत्कर्ष का कहना है कि हर दिन जब अपना इंस्टाग्राम अकाउंट का मैसेज बॉक्स खोलते हैं तो उसमें सैकड़ों लोग अपनी आवाज को समाज तक पहुंचाने के लिए उनसे गुजारिश करते हैं. जब भी कभी आप उत्कर्ष गुप्ता की वीडियो के कमेंट सेक्शन में जाएंगे तो आप वहां पर देखेंगे कि तमाम लोग उन्हें आम जिंदगी से जुड़ा कंटेंट बनाने के लिए धन्यवाद कहते हैं.
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आज उत्कर्ष की सोच समाज के उन पुरुषों और लड़कों के लिए एक तीखी चोट हैं, जो कि स्त्री पर जुल्म करने को अपनी मर्दानगी समझते हैं. आखिर में उनके लिए ये चंद लाइनें ही कहेंगे-
गलत का विरोध खुलकर कीजिए,
चाहे राजनीति हो या समाज,
इतिहास डरकर चलने वालों का लिखा जाता है
तलवे चाटने वालों का नहीं.


