Delay in builder flat possession: घर खरीदना किसी भी परिवार के लिए जिंदगी का बड़ा फैसला होता है. लोग अपनी जमा पूंजी लगाने के साथ होम लोन भी लेते हैं, ताकि अपना घर खरीद सकें. लेकिन परेशानी तब बढ़ जाती है, जब बिल्डर तय समय पर फ्लैट का पजेशन नहीं देता और दूसरी तरफ बैंक की EMI हर महीने खाते से कटती रहती है. ऐसी स्थिति में खरीदार को किराया, होम लोन EMI और दूसरे खर्चों का दोहरा बोझ उठाना पड़ सकता है.
ऐसे मामलों में खरीदारों के लिए Real Estate (Regulation and Development) Act यानी RERA काफी महत्वपूर्ण है. कानून के तहत प्रोजेक्ट की समयसीमा और खरीदारों के अधिकारों को लेकर कई प्रावधान किए गए हैं.
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पजेशन में देरी होने पर क्या है खरीदार का अधिकार
अगर बिल्डर ने एग्रीमेंट में तय समय तक फ्लैट का पजेशन नहीं दिया है, तो खरीदार के पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं. RERA की धारा 18 के तहत, निर्धारित समय पर प्रॉपर्टी का पजेशन नहीं मिलने की स्थिति में खरीदार कुछ परिस्थितियों में प्रोजेक्ट से बाहर निकलकर जमा रकम की वापसी और उस पर ब्याज मांग सकता है.
वहीं, अगर खरीदार फ्लैट लेना चाहता है और प्रोजेक्ट में बना रहना चाहता है, तो देरी की अवधि के लिए ब्याज या अन्य उपलब्ध राहत का दावा किया जा सकता है. हालांकि, वास्तविक राहत मामले के तथ्यों, एग्रीमेंट और संबंधित राज्य के RERA नियमों पर निर्भर करती है.
EMI बंद करना समाधान नहीं है
पजेशन में देरी के कारण कई खरीदार यह सोच सकते हैं कि जब घर मिला ही नहीं तो होम लोन की EMI क्यों भरें. लेकिन केवल बिल्डर की देरी के आधार पर बैंक की EMI अपने आप बंद नहीं हो जाती.
होम लोन का समझौता खरीदार और बैंक के बीच होता है. इसलिए EMI रोकने से पहले बैंक से बात करना और कानूनी सलाह लेना जरूरी है. बिना जानकारी के EMI रोकने पर क्रेडिट हिस्ट्री और लोन अकाउंट पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
यानी बिल्डर से विवाद अलग मामला है और बैंक की EMI की जिम्मेदारी अलग.
किराया भी देना पड़ रहा है तो क्या होगा
पजेशन में देरी होने पर कई खरीदारों को उस अवधि में किराए के मकान में रहना पड़ता है. ऐसे में उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ जाती है. RERA के तहत देरी के मामलों में ब्याज और अन्य राहत का दावा किया जा सकता है, लेकिन हर मामले में किराए की पूरी रकम अपने आप मिलने की गारंटी नहीं होती.
खरीदार को किराए की रसीद, बैंक स्टेटमेंट, होम लोन EMI का रिकॉर्ड और बिल्डर के साथ हुई बातचीत जैसे सभी दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए. ये दस्तावेज विवाद की स्थिति में महत्वपूर्ण हो सकते हैं.
बिल्डर को पहले लिखित शिकायत करें
अगर पजेशन में देरी हो रही है तो सबसे पहले बिल्डर या डेवलपर को लिखित शिकायत भेजना बेहतर होता है. इसमें एग्रीमेंट में दी गई पजेशन तारीख, अब तक की स्थिति और खरीदार की मांग स्पष्ट रूप से लिखी जानी चाहिए.
सिर्फ फोन पर बातचीत करने के बजाय ईमेल या दूसरे ऐसे माध्यम का इस्तेमाल करें जिसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके. बिल्डर की ओर से मिले जवाब भी संभालकर रखें.
RERA में शिकायत कैसे करें
अगर बिल्डर समस्या का समाधान नहीं करता है तो खरीदार संबंधित राज्य की RERA अथॉरिटी में शिकायत कर सकता है. RERA के तहत खरीदार देरी, पजेशन, रिफंड, ब्याज और अन्य संबंधित राहत के लिए कानूनी रास्ता अपना सकता है.
शिकायत से पहले अपने दस्तावेज तैयार रखना चाहिए, जिनमें बिल्डर-बायर एग्रीमेंट, अलॉटमेंट लेटर, भुगतान की रसीदें, बैंक लोन दस्तावेज, EMI का रिकॉर्ड, बिल्डर के साथ पत्राचार और प्रोजेक्ट की RERA जानकारी शामिल हो सकती है.
हाल के मामलों से भी समझें खरीदारों की ताकत
हाल के मामलों में RERA और उससे जुड़े न्यायिक मंचों ने देरी से परेशान खरीदारों को राहत दी है. उदाहरण के लिए, हरियाणा में एक मामले में दो साल की देरी के लिए बिल्डर को खरीदार को 10.8% सालाना ब्याज देने का निर्देश दिया गया.
एक अन्य मामले में हरियाणा RERA ने लंबे समय से अटके फ्लैट के मामले में खरीदार को ₹21 लाख से ज्यादा का मुआवजा दिया. आदेश में यह भी माना गया कि रिफंड मिलने के बावजूद परिस्थितियों के आधार पर अतिरिक्त मुआवजे का दावा अलग से किया जा सकता है.
EMI और पजेशन विवाद में ये गलती न करें
सबसे जरूरी बात यह है कि खरीदार बिना कानूनी और वित्तीय सलाह के होम लोन की EMI अचानक बंद न करे. साथ ही बिल्डर के मौखिक आश्वासन पर निर्भर रहने के बजाय हर बात लिखित में लें.
प्रोजेक्ट की RERA स्थिति भी जांचते रहें और एग्रीमेंट में पजेशन की तारीख, ग्रेस पीरियड तथा देरी की स्थिति में मिलने वाली राहत जैसे प्रावधान ध्यान से पढ़ें.
डिस्क्लेमर: RERA के तहत मिलने वाली राहत मामले के तथ्यों, राज्य के नियमों, एग्रीमेंट और संबंधित प्राधिकरण के आदेश पर निर्भर करती है. किसी खास मामले में कार्रवाई करने से पहले योग्य कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है.


