Shreya Ghoshal’s story about periods: बॉलीवुड की मशहूर सिंगर श्रेया घोषाल अपनी सुरीली आवाज के लिए दुनियाभर में पहचान रखती हैं. वह अपनी प्रोफेशनल जिंदगी के साथ-साथ निजी जिंदगी से जुड़े किस्से भी कई बार फैंस के साथ शेयर करती रही हैं. हाल ही में उन्होंने अपने पिता के साथ रिश्ते और बचपन की एक ऐसी याद के बारे में बताया, जिसे सुनकर पिता और बेटी के रिश्ते की मजबूती साफ नजर आती है.
हॉटरफ्लाई को दिए एक इंटरव्यू में श्रेया ने अपने पहले पीरियड्स से जुड़ा अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि जब उन्हें पहली बार पीरियड्स आए, उस समय वह ट्रेन में सफर कर रही थीं. वह ‘सारेगामापा’ के शूट से वापस घर लौट रही थीं. अचानक हुए इस अनुभव से वह काफी घबरा गई थीं.
ट्रेन में अचानक हुई परेशानी
श्रेया ने बताया कि जैसे ही उन्हें पहली बार पीरियड्स के बारे में पता चला, उन्हें लगा कि कुछ गड़बड़ हो गई है. उस समय उनके पिता भी उनके साथ थे. उन्होंने बिना झिझक अपने पिता को इस बारे में बताया.
स्थिति इसलिए भी मुश्किल थी क्योंकि वे उस वक्त चलती ट्रेन में थे. तत्काल ट्रेन से उतरकर किसी दुकान या मेडिकल स्टोर तक पहुंचना संभव नहीं था. ऐसे समय में श्रेया के पिता ने उन्हें समझाया और शांत रहने में मदद की.
उन्होंने बेटी को असहज महसूस नहीं होने दिया और ट्रेन में ही किसी तरह इंतजाम किया. श्रेया के लिए यह पल भले ही उस समय परेशानी भरा था, लेकिन पिता के सपोर्ट ने उन्हें काफी हिम्मत दी.
घर पहुंचते ही बेटी के लिए खरीदा सैनिटरी पैड
श्रेया ने अपने अनुभव को याद करते हुए बताया कि जब वे ट्रेन से उतरकर घर पहुंचे तो उनके पिता ने सबसे पहले उनके लिए सैनिटरी पैड खरीदा.
यह घटना छोटी लग सकती है, लेकिन श्रेया के लिए यह उनके पिता के सपोर्ट की बड़ी मिसाल थी. खासकर उस दौर में जब पीरियड्स को लेकर परिवारों में खुलकर बात करना आज की तुलना में ज्यादा मुश्किल माना जाता था.
श्रेया के इस किस्से से यह भी पता चलता है कि उनके पिता ने बेटी की परेशानी को समझने और उसे सहज महसूस कराने में किसी तरह की झिझक नहीं दिखाई.
बेटी के सिंगिंग करियर के लिए भी किया पूरा सपोर्ट
श्रेया घोषाल ने इंटरव्यू में सिर्फ पीरियड्स से जुड़ा किस्सा ही नहीं बताया, बल्कि यह भी बताया कि उनके पिता हमेशा उनके सपनों के साथ खड़े रहे.
जब श्रेया छोटी थीं और सिंगिंग में करियर बनाना चाहती थीं, तब आसपास के कुछ लोग उनके पिता से सवाल करते थे. लोगों का कहना था कि बेटी की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए और सिंगिंग के पीछे इतनी मेहनत क्यों की जा रही है.
हालांकि, श्रेया के पिता ने इन बातों को बेटी के सपनों के बीच नहीं आने दिया. वह अपनी बेटी की प्रतिभा को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थे. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी बेटी म्यूजिक करेगी और वह उसका पूरा साथ देंगे.
समाज की सोच से ज्यादा बेटी का सपना था जरूरी
श्रेया के मुताबिक, उनके पिता लोगों की ऐसी बातों से नाराज हो जाते थे. उन्हें लगता था कि बेटी को कम आंकना सही नहीं है. उन्होंने समाज की सोच की परवाह करने के बजाय अपनी बेटी की इच्छा और प्रतिभा को महत्व दिया.
श्रेया आज भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री की जानी-मानी सिंगर हैं. उनकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उन्होंने 12 साल की उम्र में माइक्रोफोन के पीछे कदम रखा था और उनका संगीत करियर करीब तीन दशक लंबा हो चुका है.
पिता का साथ बना श्रेया की ताकत
श्रेया घोषाल का यह किस्सा केवल उनके पहले पीरियड्स की कहानी नहीं है. इसमें एक पिता का वह रूप भी दिखाई देता है, जो बेटी की परेशानी में उसके साथ खड़ा रहता है और उसके सपनों को भी उतनी ही गंभीरता से लेता है.
चलती ट्रेन में पहली बार पीरियड्स आने जैसी असहज स्थिति में पिता का बेटी को संभालना और घर पहुंचते ही उसके लिए सैनिटरी पैड खरीदना श्रेया की जिंदगी की ऐसी याद बन गई, जिसे उन्होंने वर्षों बाद भी याद रखा. वहीं, सिंगिंग करियर के शुरुआती दौर में पिता का भरोसा उनके सफर में एक अहम सहारा बना.


