नई दिल्ली: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश के सबसे महत्वाकांक्षी हाईस्पीड रोड कॉरिडोर में शामिल है. करीब 1380 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली से मुंबई तक का सफर तेज और सुगम बनाने की तैयारी है. लिंक एक्सप्रेसवे को शामिल करने पर इसका नेटवर्क करीब 1450 किलोमीटर तक पहुंच जाता है. यह 8 लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसे भविष्य में 12 लेन तक विस्तार देने का प्रावधान है.
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6 राज्यों और 20 से ज्यादा बड़े शहरों को जोड़ेगा
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे दिल्ली से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से गुजरता है. इसके रूट और लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, अलवर, दौसा, जयपुर, सवाई माधोपुर, कोटा, मंदसौर, रतलाम, दाहोद, वडोदरा, भरूच, सूरत, नवसारी, वलसाड, पालघर और मुंबई समेत कई प्रमुख शहर जुड़ते हैं.
दिल्ली की तरफ से इसका कनेक्शन सराय काले खां और DND फ्लाईवे से है. आगे यह फरीदाबाद, बल्लभगढ़, नूंह और पलवल होते हुए राजस्थान में प्रवेश करता है.
राजस्थान में जयपुर और कोटा तक कनेक्टिविटी
राजस्थान में एक्सप्रेसवे अलवर, बांदीकुई, दौसा और सवाई माधोपुर के रास्ते कोटा और बूंदी क्षेत्र को जोड़ता है. बांदीकुई-जयपुर लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए जयपुर की कनेक्टिविटी भी मजबूत हुई है. राजस्थान में करीब 373 किलोमीटर का हिस्सा है और इसका लगभग 98 फीसदी काम पूरा बताया गया है.
मध्य प्रदेश में मंदसौर से झाबुआ तक रूट
मध्य प्रदेश में करीब 244 किलोमीटर का हिस्सा है, जिसमें मंदसौर, गरोठ, जावरा, रतलाम और झाबुआ जैसे इलाके शामिल हैं. इस हिस्से का काम पूरा हो चुका है. लिंक रूट के जरिए इंदौर, उज्जैन और भोपाल जैसे शहरों को भी एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है.
गुजरात में वडोदरा से सूरत तक कनेक्टिविटी
गुजरात में एक्सप्रेसवे दाहोद, गोधरा, वडोदरा, भरूच, सूरत, नवसारी, वलसाड और वापी जैसे प्रमुख इलाकों को जोड़ता है. वडोदरा-भरूच का करीब 86 किलोमीटर हिस्सा यातायात के लिए खोला जा चुका है, जबकि गोधरा-वडोदरा का हिस्सा भी ट्रायल के तहत इस्तेमाल किया गया है.
महाराष्ट्र में JNPT होगा आखिरी पड़ाव
महाराष्ट्र में करीब 174 किलोमीटर का हिस्सा है. इसमें पालघर, ठाणे, वसई-विरार और मुंबई क्षेत्र शामिल हैं. एक्सप्रेसवे का अंतिम कनेक्शन जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) तक प्रस्तावित है. पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण समेत कई चुनौतियों के कारण महाराष्ट्र वाला हिस्सा अभी निर्माणाधीन है.
वन्यजीवों के लिए खास इंतजाम
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की खासियत सिर्फ इसकी लंबाई नहीं है. वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कई जगह वाइल्डलाइफ ओवरपास और अंडरपास बनाए गए हैं. राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स क्षेत्र में सुरंग का निर्माण भी इस परियोजना का अहम हिस्सा है.
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कब पूरा होगा दिल्ली-मुंबई का पूरा सफर?
परियोजना के पूरी तरह तैयार होने के बाद दिल्ली से मुंबई की सड़क यात्रा का समय करीब 24 घंटे से घटकर 12-14 घंटे तक आने की उम्मीद है. फिलहाल एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों पर यातायात शुरू हो चुका है, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में निर्माण जारी है. पूरे कॉरिडोर को 2027 के अंतिम महीनों तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के तहत भारतमाला परियोजना के फेज-1 का हिस्सा है.


