Harish Rana Last Video: दिल को झकझोर देने वाला एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. यह वीडियो गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा से जुड़ा है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु (पैसिव यूथिनिसिया) की अनुमति मिल चुकी है. बेटे को अंतिम विदाई देने से पहले का यह 22 सेकंड का वीडियो इतना भावुक है कि इसे देखकर लोगों की आंखें नम हो रही हैं.
वीडियो में देखा जा सकता है कि ब्रह्माकुमारी संस्था की एक सिस्टर हरीश राणा के घर पहुंचती हैं और उन्हें तिलक लगाते हुए कहती हैं, “सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ… ठीक है.” यह शब्द सुनते ही वहां मौजूद परिवार के लोग भावुक हो जाते हैं.
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वीडियो में यह भी दिख रहा है कि ब्रह्माकुमारी की दीदी लवली के स्पर्श करते ही हरीश की आंखों में हलचल होती है. उनके होठ हल्के-हल्के कांपते नजर आते हैं और गले से कुछ निगलने जैसी हरकत दिखाई देती है. हरीश की इस मार्मिक विदाई का दृश्य देख सोशल मीडिया पर लोग बेहद भावुक हो रहे हैं.
बताया जा रहा है कि हरीश राणा का परिवार करीब 18 सालों से ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ा हुआ है. पहले उनका परिवार दिल्ली के द्वारका इलाके में रहता था, लेकिन वहां लिफ्ट की सुविधा न होने के कारण बाद में गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में आकर रहने लगा.
दरअसल, गाजियाबाद निवासी हरीश राणा के परिवार ने इच्छामृत्यु की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी. करीब तीन साल तक चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी. इसके बाद हरीश को उनके घर से दिल्ली के एम्स अस्पताल लाया गया, जहां पैसिव यूथिनिसिया की प्रक्रिया के तहत उनका लाइफ सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
हरीश राणा करीब 13 साल से स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में थे. एक भीषण हादसे के बाद उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि वह न बोल सकते थे और न ही चल-फिर सकते थे. मशीनों और मेडिकल सपोर्ट के सहारे ही उनकी सांसें चल रही थीं.
इस फैसले से पहले हरीश के पिता अशोक राणा ने परिवार के सभी सदस्यों से माफी मांगते हुए कहा कि यह फैसला लेना उनके लिए बेहद कठिन था. उन्होंने कहा कि एक पिता के तौर पर वह कभी नहीं चाहते थे कि ऐसा दिन आए, लेकिन बेटे की तकलीफ देखकर मजबूर होकर यह कदम उठाना पड़ा. अब सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद भारत में पहली बार किसी व्यक्ति को इस तरह इच्छामृत्यु दी जा रही है. हरीश राणा की यह कहानी हर किसी के दिल को झकझोर रही है और लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है कि जिंदगी और मौत के बीच का यह फैसला कितना कठिन होता है.


