Hathras News: उत्तर प्रदेश के हाथरस शहर के निवासियों और यहां से गुजरने वाले मुसाफिरों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है. शहर की सड़कों पर दिन-ब-दिन बढ़ते गाड़ियों के दबाव और बार-बार लगने वाले भीषण जाम से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है. लोक निर्माण विभाग (PWD) ने शहर को जाम के झाम से मुक्ति दिलाने के लिए एक शानदार मास्टरप्लान तैयार किया है.
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दो प्रमुख नेशनल हाईवे आपस में जुड़ेंगे
इस नई योजना के तहत शहर के बाहर से होकर गुजरने वाला एक नया बाईपास बनाया जाएगा. यह बाईपास दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों मथुरा-बरेली नेशनल हाईवे और आगरा-अलीगढ़ नेशनल हाईवे को आपस में सीधे कनेक्ट करेगा. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बाहरी और भारी वाहनों को शहर के अंदर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा.
शहर की सीमा से बाहर ही निकल जाएंगे भारी वाहन
फिलहाल स्थिति यह है कि मथुरा-बरेली और आगरा-अलीगढ़ रूट पर चलने वाले भारी कमर्शियल वाहनों को हाथरस शहर के बीच से होकर गुजरना पड़ता है. इसके कारण शहर की संकरी सड़कों पर दिनभर चक्काजाम की स्थिति बनी रहती है. नया बाईपास शुरू होने के बाद, ये भारी वाहन शहर के बाहर-बाहर ही अपने गंतव्य के लिए निकल जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.
जानिए कहां से कहां तक बनेगा यह बाईपास (रूट मैप)
PWD की प्रस्तावित योजना के मुताबिक, इस बाईपास की कुल लंबाई करीब 12 किलोमीटर होगी. यह मेंडू रोड स्थित गांव सोखना के पास से शुरू होगा. यहां से आगे बढ़ते हुए यह जलेसर रोड को क्रॉस करेगा. अंत में यह गांव पापरी के पास जाकर आगरा-अलीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) में मिल जाएगा. इस सटीक रूट सिलेक्शन से हाथरस शहर का एक बहुत बड़ा हिस्सा कवर हो जाएगा, जिससे मुख्य बाजारों में ट्रैफिक का लोड न के बराबर रह जाएगा.
समय और ईंधन की होगी भारी बचत
इस बाईपास के निर्माण से केवल हाथरस के स्थानीय निवासियों को ही नहीं, बल्कि लंबी दूरी का सफर तय करने वाले ट्रक और बस चालकों को भी बड़ी सहूलियत होगी. शहर के भीतर रेंगते ट्रैफिक से मुक्ति मिलने के कारण ड्राइवरों के समय की बचत होगी. साथ ही, बिना रुके गाड़ी चलने से ईंधन (Fuel) कम खर्च होगा, जिससे प्रदूषण के स्तर में भी गिरावट आएगी.
क्या है प्रोजेक्ट का लेटेस्ट स्टेटस?
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस प्रोजेक्ट को अपनी ऑफिशियल कार्ययोजना में शामिल कर लिया है. अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में कागजी औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है और प्रोजेक्ट की सटीक लागत (बजट) का आकलन चल रहा है.
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जैसे ही इसका विस्तृत एस्टीमेट (DPR) तैयार हो जाएगा, इसे अंतिम मंजूरी के लिए शासन (लखनऊ) को भेज दिया जाएगा. शासन से हरी झंडी और बजट अलॉट होते ही निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. हाथरस के लोग अब इस बेहद जरूरी सड़क के निर्माण का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.


