UP PCS Officers IAS Promotion 2025: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. राज्य के 33 पीसीएस अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में पदोन्नति देने की प्रक्रिया तेज हो गई है. इसके लिए 10 जून को दिल्ली में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें वर्ष 2010, 2011 और 2012 बैच के अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा.
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केंद्र सरकार ने चयन वर्ष 2025 के लिए उत्तर प्रदेश को आईएएस पदोन्नति कोटे के 33 पद आवंटित किए हैं. इसके बाद नियुक्ति विभाग ने संभावित अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियां (एसीआर) और सेवा अभिलेख जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. माना जा रहा है कि इस बार पदों की संख्या अधिक होने के कारण वर्ष 2010 और 2011 बैच के अधिकांश अधिकारियों के साथ 2012 बैच के कुछ अधिकारियों को भी आईएएस बनने का अवसर मिल सकता है.
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2010 बैच में आठ और 2011 बैच में 21 पीसीएस अधिकारी हैं. दोनों बैचों की कुल संख्या 29 होने के कारण चार पद शेष बचते हैं, जिससे 2012 बैच के अधिकारियों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं. डीपीसी में अधिकारियों की सेवा रिकॉर्ड, एसीआर और अन्य पात्रताओं के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा.
इन अधिकारियों के नामों पर हो सकता है विचार
वर्ष 2010 बैच से डॉ. विश्राम, अशोक कुमार कन्नौजिया, पुष्पराज सिंह, राजकुमार द्विवेदी, राकेश कुमार पटेल, आलोक कुमार, सुशीला और संजय कुमार सिंह के नाम शामिल हैं. वहीं 2011 बैच से पूनम निगम, संतोष बहादुर सिंह, पंकज वर्मा, प्रदीप कुमार यादव, योगानंद पांडे, विजय कुमार सिंह, अतुल कुमार, डॉ. सुनील कुमार वर्मा, हर्ष देव पांडे, शैलेंद्र कुमार सिंह, डॉ. नितिन मदान, प्रियंका सिंह, अमित कुमार, रिंकी जायसवाल, अमित सिंह, विवेक श्रीवास्तव, वैभव मिश्रा, नरेंद्र बहादुर सिंह, संदीप कुमार और गरिमा स्वरूप समेत कई अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं.
पीपीएस से आईपीएस पदोन्नति प्रक्रिया भी तेज
उधर, पुलिस विभाग में भी बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी है. प्रदेश के 29 पीपीएस अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. राज्य सरकार ने आईपीएस कैडर में रिक्त 29 पदों को भरने के लिए नियमों के अनुसार तीन गुना अधिक पीपीएस अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेज दिए हैं.
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यूपीएससी अब संबंधित अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, गोपनीय प्रविष्टियों और लंबित विभागीय जांचों की समीक्षा करेगा. लंबे समय से रिक्त पड़े आईपीएस पदों को भरने के लिए शासन और डीजीपी मुख्यालय ने प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए तेजी से आगे बढ़ाया है. यदि डीपीसी और यूपीएससी की प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं, तो जल्द ही उत्तर प्रदेश प्रशासनिक और पुलिस सेवा में बड़े स्तर पर पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है.


