Iran Israel War: मध्य एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है. इस संघर्ष का असर भारत पर भी गहराने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि दोनों ही देश भारत के करीबी साझेदार माने जाते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान में कई ठिकानों पर हमला किया है. हमलों को लेकर यह भी दावा किया गया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालय के आसपास विस्फोट हुए. वहीं पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता से सत्ता परिवर्तन की अपील की है.
भारत के लिए क्यों अहम है ईरान?
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं. भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता रहा है. वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान चाबहार बंदरगाह को लेकर अहम समझौता हुआ था.
चाबहार बंदरगाह
यह बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी रास्ते भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच मिलती है, बिना पाकिस्तान के भू-भाग का इस्तेमाल किए. हालांकि हालिया बजट में चाबहार के लिए प्रावधान न होने से रणनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो भारत की मध्य एशिया तक पहुंच प्रभावित हो सकती है. वहीं चीन और पाकिस्तान पहले से ही इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं.
ग्वादर बंदरगाह
पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह, जहां चीन बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है, भारत के चाबहार प्रोजेक्ट का जवाब माना जाता है. अगर ईरान अस्थिर होता है या चाबहार परियोजना प्रभावित होती है, तो चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अफगानिस्तान और पाकिस्तान को साथ लेकर मध्य एशिया में अपने प्रभाव को विस्तार देना चाहता है. ऐसे में भारत-अफगान व्यापार भी प्रभावित हो सकता है.
रेयर अर्थ मिनरल्स और ऊर्जा पर असर
ईरान के रास्ते भारत का व्यापार कजाकिस्तान जैसे देशों से भी होता है. यूरेनियम और अन्य रेयर अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति पर भी संकट गहरा सकता है. युद्ध की स्थिति में तेल की कीमतों में उछाल तय माना जा रहा है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा.
भारतीयों की सुरक्षा बड़ी चिंता
ईरान में 25 हजार से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं. हालात बिगड़ने पर भारत सरकार को बड़े स्तर पर निकासी अभियान चलाना पड़ सकता है. विदेश मंत्रालय ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर सतर्कता बरतने को कहा है.
पाकिस्तान को कैसे मिल सकता है फायदा?
हालांकि ईरान और पाकिस्तान के संबंध हाल के वर्षों में तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन यदि ईरान कमजोर होता है तो क्षेत्र में पाकिस्तान खुद को एक प्रमुख इस्लामिक राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर सकता है. विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यदि अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए पाकिस्तान की जमीन या सहयोग लेता है, तो इस्लामाबाद को आर्थिक और सामरिक लाभ मिल सकता है.


