UP News: सस्ती ढुलाई, नए रोजगार और पर्यटन को नई उड़ान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. कानपुर से वाराणसी के बीच गंगा जलमार्ग विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य गंगा को आस्था की धारा के साथ-साथ विकास की सतत जीवनदायिनी नदी के रूप में स्थापित करना है.
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार की Sagarmala Programme के अंतर्गत इस जलमार्ग को विस्तार देने की रूपरेखा तैयार की जा रही है. फिलहाल Inland Waterways Authority of India (IWAI) वाराणसी टर्मिनल से Haldia तक मालवाहक जहाजों का संचालन कर रहा है. अब इसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए वाराणसी से कानपुर तक जलमार्ग जोड़ने के लिए सर्वेक्षण और तकनीकी अध्ययन शुरू कर दिया गया है.
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पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
योजना के तहत उन्नाव और कानपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को गंगा के रास्ते जोड़ने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. प्रस्ताव में फ्लोटिंग रेस्त्रां, क्रूज सेवा और रिवर टूरिज्म जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई है. गंगा किनारे बसे ऐतिहासिक घाट, धार्मिक स्थल और प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं. यदि नियमित क्रूज सेवा शुरू होती है तो कानपुर से वाराणसी की यात्रा एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव में बदल सकती है.
व्यापार के लिए सस्ता और सुगम विकल्प
औद्योगिक दृष्टि से भी यह परियोजना अहम मानी जा रही है. कानपुर के चमड़ा, वस्त्र, प्लास्टिक और अन्य उत्पाद जलमार्ग के जरिए पूर्वी भारत के बंदरगाहों तक कम लागत में पहुंचाए जा सकेंगे. जलमार्ग से माल ढुलाई सड़क और रेल परिवहन की तुलना में अधिक किफायती मानी जाती है. इससे ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी.
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को संबल
इस परियोजना से होटल, हस्तशिल्प, खानपान और परिवहन जैसे क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है. स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और छोटे व्यापारियों को नए बाजार उपलब्ध होंगे.
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तकनीकी पहलुओं पर मंथन
जानकारी के मुताबिक, विस्तृत सर्वेक्षण और कार्ययोजना तैयार कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया है. जलस्तर, ड्रेजिंग, टर्मिनल निर्माण और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे पहलुओं पर विशेषज्ञों की राय ली जा रही है. मंजूरी मिलने के बाद कानपुर गंगा जलमार्ग का अहम पड़ाव बन सकता है और शहर की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है.


