उत्तर प्रदेश की सियासत में फिलहाल 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज है. समाजवादी पार्टी ने दो उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं और अब भाजपा की सूची का इंतजार किया जा रहा है. भाजपा की संभावित सूची में कई दिग्गज नेताओं के नाम को लेकर चर्चा चल रही है. इसी बीच राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया चौधरी जयंत सिंह का नाम भी राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर चर्चा में है.
इस चर्चा के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई है. सियासी जानकारों के मुताबिक, जयंत चौधरी के दोबारा राज्यसभा जाने की स्थिति में इसके पीछे कई राजनीतिक समीकरण हो सकते हैं. एक तरफ इसे अखिलेश यादव की मदद से राज्यसभा पहुंचने के बाद सियासी समीकरण बदलने से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ एनडीए में शामिल होते समय भाजपा की ओर से राज्यसभा सीट देने के कथित वादे का भी जिक्र किया जा रहा है.
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दरअसल, राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत सिंह का नाम एक बार फिर राज्यसभा को लेकर चर्चा में है. सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा उन्हें दोबारा राज्यसभा भेज सकती है. जयंत चौधरी फिलहाल उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं. वह 2022 में समाजवादी पार्टी और आरएलडी के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे थे.
जयंत चौधरी का मौजूदा कार्यकाल 2028 तक है. ऐसे में अगर भाजपा उन्हें मौजूदा चुनाव के जरिए दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला करती है, तो यह सामान्य पुनर्निर्वाचन नहीं होगा. उन्हें अपनी मौजूदा राज्यसभा सीट से इस्तीफा देना होगा और इसके बाद बची हुई अवधि के लिए उस सीट पर उपचुनाव होगा.
इस स्थिति में एक तरफ जयंत चौधरी को नए कार्यकाल के लिए राज्यसभा भेजने का रास्ता खुलेगा, वहीं दूसरी तरफ उनके इस्तीफे से खाली होने वाली मौजूदा सीट पर बाकी कार्यकाल के लिए किसी दूसरे नेता को राज्यसभा भेजा जा सकता है. इसी वजह से रालोद के खाते में दो राज्यसभा सीट आने की संभावना को लेकर चर्चा हो रही है.
जयंत को नई ताकत देने की कोशिश
जयंत चौधरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 5 जुलाई 2022 से शुरू हुआ था और यह 2028 तक है. उनके दादा, पिता और खुद की कर्मभूमि मानी जाने वाली बागपत लोकसभा सीट से फिलहाल रालोद के डॉक्टर राजकुमार सांगवान सांसद हैं. इस सीट पर 2029 में चुनाव होना है.
ऐसे में 2028 में जयंत चौधरी का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनके मंत्रिमंडल में बने रहने को लेकर संशय की स्थिति बन सकती है. सूत्रों के मुताबिक, इस स्थिति को देखते हुए रालोद और भाजपा हाईकमान के कुछ पदाधिकारी चाहते हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले रालोद के साथ गठबंधन से राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए जयंत को नई और सुरक्षित राजनीतिक ताकत दी जाए.
इसी संदर्भ में जयंत चौधरी को दोबारा राज्यसभा भेजने की चर्चा हो रही है.
2029 में चारू को लोकसभा भेजने की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, अगर जयंत चौधरी भाजपा के सहयोग से दोबारा राज्यसभा जाते हैं तो इसके कई संभावित फायदे हो सकते हैं.
पहला, 2028 के बाद उनके मंत्री बने रहने का रास्ता बना रह सकता है. दूसरा, 2029 के लोकसभा चुनाव में जयंत चौधरी अपनी पत्नी चारू को बागपत लोकसभा सीट से मैदान में उतार सकते हैं.
तीसरा राजनीतिक पहलू समाजवादी पार्टी से जुड़े सियासी समीकरण को लेकर बताया जा रहा है. source के मुताबिक, अभी रालोद और जयंत चौधरी पर सपा की ओर से यह राजनीतिक बात कही जाती है कि सिर्फ आठ विधायकों के बावजूद सपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा था.
ऐसे में इस बार अगर जयंत चौधरी अपनी मौजूदा राज्यसभा सीट से इस्तीफा देकर भाजपा के सहयोग से नए कार्यकाल के लिए राज्यसभा पहुंचते हैं, तो सपा की ओर से उठाए जाने वाले इस मुद्दे का राजनीतिक संदर्भ बदल सकता है.
एक इस्तीफा जयंत को दिला सकता है दो सीट
रालोद के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी के मुताबिक, एनडीए में शामिल होते समय जयंत की पार्टी को एक राज्यसभा सीट देने की बात हुई थी. लेकिन इस बार रालोद के सामने दो राज्यसभा सीट हासिल करने की स्थिति बन सकती है.
एक सीट वह हो सकती है जिस पर जयंत चौधरी को भाजपा के कोटे से नए कार्यकाल के लिए राज्यसभा भेजा जाए. दूसरी सीट जयंत चौधरी के इस्तीफे से खाली होने वाली मौजूदा सीट होगी. इस सीट पर होने वाले उपचुनाव में रालोद को करीब एक साल नौ महीने के शेष कार्यकाल के लिए सीट मिलने की संभावना बताई जा रही है.
यानी source में दिए गए समीकरण के मुताबिक, जयंत चौधरी के इस्तीफे से रालोद के खेमे में दो राज्यसभा सीट आने का रास्ता बन सकता है.
2027 के लिए क्यों अहम है ये फैसला
वेस्ट यूपी की राजनीति में जयंत चौधरी की भूमिका को देखते हुए इस फैसले को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है. भाजपा ने वेस्ट यूपी में जाट राजनीति के लिहाज से आरएलडी के साथ गठबंधन को महत्वपूर्ण बनाए रखा है.
हालिया रिपोर्टों में भाजपा के भीतर वेस्ट यूपी के जाट चेहरों को लेकर मंथन की बात सामने आने का भी जिक्र किया गया है. हालांकि, फिलहाल जयंत चौधरी के नाम पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
अगर भाजपा उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला करती है, तो source के मुताबिक इसका असर सिर्फ एक राज्यसभा सीट तक सीमित नहीं हो सकता. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले वेस्ट यूपी की राजनीति में इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा सकता है.
बीजेपी के जाट नेताओं को मिल सकती है मायूसी
सियासी जानकारों के मुताबिक, अगर भाजपा के सहयोग से जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजा जाता है, तो भाजपा के कुछ जाट चेहरों की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है.
फिलहाल बागपत के पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री सत्यपाल सिंह तथा मुजफ्फरनगर के पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री संजीव बालियान समेत कुछ नाम संभावित उम्मीदवारों के तौर पर चर्चा में हैं.
हालांकि, जयंत चौधरी के नाम पर फैसला होने की स्थिति में राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं. source के मुताबिक, वेस्ट यूपी में भाजपा हाईकमान की ओर से जयंत चौधरी को जाट नेता के तौर पर महत्व दिए जाने की भी चर्चा है.
फिलहाल जयंत चौधरी को दोबारा राज्यसभा भेजने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. ऐसे में भाजपा की उम्मीदवार सूची आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी.
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