Kanpur Trans Ganga City Four Lane Bridge: कानपुर से उन्नाव की ट्रांसगंगा सिटी तक कनेक्टिविटी बेहतर करने वाली फोरलेन पुल परियोजना अब धरातल पर उतरने लगी है. करीब एक दशक से फाइलों और स्वीकृतियों में उलझी इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है. कटरी शंकरपुर और लोधवा खेड़ा गांवों में 100 से अधिक किसानों की जमीन का सर्वे पूरा कर लिया गया है. अब अभिलेखों का मिलान कर नियमानुसार अधिग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी.
प्रशासन का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द जमीन उपलब्ध कराकर निर्माण एजेंसी को कार्यस्थल सौंप दिया जाए. सेतु निगम के मुताबिक, भूमि उपलब्ध होने पर आगामी एक महीने में निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है.
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753 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा वाई आकार का पुल
गंगा नदी पर बनने वाले इस वाई आकार के फोरलेन पुल का टेंडर 14 मई को 500.50 करोड़ रुपये में फाइनल किया गया था. आगरा की पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड और हरियाणा की एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड संयुक्त रूप से इसका निर्माण करेंगी. भूमि अधिग्रहण समेत परियोजना की कुल लागत करीब 753 करोड़ रुपये बताई गई है. पुल के लिए कटरी शंकरपुर और लोधवा खेड़ा में 100 से अधिक किसानों की जमीन चिह्नित की गई है. राजस्व विभाग की टीम सर्वे पूरा कर चुकी है. अब भूमि की प्रकृति, राजस्व अभिलेखों और प्रभावित किसानों का विवरण तैयार किया जाएगा. इसके बाद एडीएम भूमि अध्यापित कार्यालय के माध्यम से अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
भैरोघाट और धोबीघाट पर भी जमीन होगी उपलब्ध
पुल निर्माण के लिए भैरोघाट और धोबीघाट क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने को सेतु निगम ने नगर निगम को पत्र भेजा है. इन क्षेत्रों में मौजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी. वहीं, रानीघाट स्थित जलकल पंपिंग स्टेशन के पास बने 33 आवासों को पहले ही निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है. इनकी जगह भैरोघाट के पास नए मकान बनाए जाने की योजना है. पुनर्वास पर करीब 13 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
करीब चार किलोमीटर लंबा होगा पुल
प्रस्तावित पुल की लंबाई करीब चार किलोमीटर होगी. यह रानीघाट और धोबीघाट से शुरू होकर उन्नाव में ट्रांसगंगा सिटी के गेट नंबर-दो के पास जुड़ेगा. इसका लगभग 1,825 मीटर हिस्सा गंगा नदी के ऊपर बनेगा. पुल बनने के बाद कानपुर से ट्रांसगंगा सिटी तक आने-जाने में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है. साथ ही औद्योगिक क्षेत्र को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा, जिससे कारोबार और माल परिवहन को भी फायदा हो सकता है.
2015 में तैयार हुआ था परियोजना का खाका
ट्रांसगंगा सिटी फोरलेन पुल परियोजना का खाका वर्ष 2015 में तैयार किया गया था. शुरुआत में पुल को सरसैया घाट से जोड़ने की योजना थी, लेकिन यातायात के दबाव को देखते हुए डिजाइन में बदलाव किया गया. इसके बाद रानीघाट और धोबीघाट से ट्रांसगंगा सिटी को जोड़ने की योजना बनाई गई. डीपीआर में संशोधन, बजट और विभिन्न स्वीकृतियों के चलते परियोजना करीब एक दशक तक अटकी रही. अब टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और भूमि अधिग्रहण शुरू होने के बाद निर्माण की उम्मीद बढ़ी है.
अधिकारियों ने क्या कहा?
सेतु निगम के प्रबंध निदेशक धर्मवीर सिंह के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है. भूमि उपलब्ध होते ही आगामी एक महीने में निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य है. वहीं, एडीएम वित्त एवं राजस्व विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि कटरी शंकरपुर और लोधवा खेड़ा में भूमि सर्वे पूरा कर लिया गया है. किसानों की जमीन से संबंधित अभिलेखीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद नियमानुसार अधिग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी.
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