Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं और घर में कलश स्थापना, अखंड ज्योत, दुर्गा सप्तशती पाठ और कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं. नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ से जुड़े कुछ नियम और परंपराएं भी बताई गई हैं. मान्यता है कि इन दिनों सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए और पूजा के दौरान कुछ गलतियों से बचना चाहिए.
हालांकि, इन नियमों की मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती हैं. ऐसे में इन्हें धार्मिक परंपरा के रूप में समझना चाहिए.
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पूजा स्थल को गंदा न रखें
नवरात्रि में पूजा स्थल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की परंपरा है. मान्यता है कि जिस स्थान पर मां दुर्गा की पूजा की जा रही है, वहां स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए. पूजा की चौकी, कलश और आसपास के स्थान को साफ रखें.
अगर घर में अखंड ज्योत जलाई गई है तो उसके आसपास कागज, कपड़ा या अन्य ज्वलनशील सामान न रखें.
व्रत में तामसिक भोजन से बचें
नवरात्रि के व्रत में आमतौर पर सात्विक भोजन करने की परंपरा है. कई भक्त इन दिनों मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक चीजों से दूर रहते हैं.
व्रत रखने वाले लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना और सेंधा नमक जैसे व्रत के खाद्य पदार्थ लेते हैं. उपवास के दौरान अपनी शारीरिक क्षमता का भी ध्यान रखना जरूरी है.
बिना जरूरत अखंड ज्योत को न छेड़ें
कई घरों में नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योत जलाने की परंपरा होती है. इसे लगातार जलाने के लिए दीपक में पर्याप्त मात्रा में घी या तेल रखना जरूरी है.
दीपक को ऐसी जगह रखें जहां तेज हवा न लगे. पंखे, खिड़की या ज्वलनशील वस्तुओं के बिल्कुल पास दीपक न रखें. पूजा की परंपरा के साथ अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है.
पूजा के दौरान अपशब्द और विवाद से बचें
नवरात्रि में भक्त पूजा और साधना के माध्यम से मन को शांत रखने का प्रयास करते हैं. धार्मिक मान्यताओं में इन दिनों क्रोध, झूठ, अपशब्द और अनावश्यक विवाद से बचने की सलाह दी जाती है.
घर में पूजा का माहौल है तो कोशिश करें कि आपसी विवाद और तनाव से दूर रहें. दूसरों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करना भी धार्मिक अनुशासन का हिस्सा माना जाता है.
व्रत को लेकर लापरवाही न करें
व्रत रखने वाले लोगों को अपनी दिनचर्या और खान-पान का ध्यान रखना चाहिए. पूरे दिन भूखे रहने से कमजोरी महसूस हो सकती है. इसलिए अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का तरीका चुनना चाहिए.
जिन लोगों को नियमित दवा लेनी पड़ती है या किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण खान-पान में सावधानी जरूरी है, उन्हें उपवास से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है.
पूजा सामग्री का अनादर न करें
नवरात्रि में मां दुर्गा को फूल, फल, प्रसाद, रोली, अक्षत और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है. पूजा के बाद बची हुई सामग्री को इधर-उधर फेंकने के बजाय धार्मिक परंपरा के अनुसार उचित स्थान पर रखें या विसर्जित करें.
फूल और पूजा सामग्री को कूड़े के साथ फेंकने से बचना चाहिए. स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री के निस्तारण का तरीका अपनाया जा सकता है.
कन्या पूजन और धार्मिक परंपराओं में दिखावा न करें
अष्टमी या नवमी के दिन कई परिवारों में कन्या पूजन किया जाता है. कन्याओं को भोजन कराने के साथ उन्हें उपहार या दक्षिणा देने की परंपरा है.
कन्या पूजन श्रद्धा से करना चाहिए. इसमें दिखावे या दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार सेवा और सम्मान को महत्व देना बेहतर है.
नवरात्रि में सात्विकता और श्रद्धा का रखें ध्यान
नवरात्रि के दौरान पूजा के नियम परिवार, क्षेत्र और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं. इसलिए किसी एक नियम को सभी लोगों के लिए अनिवार्य मानना जरूरी नहीं है. इन दिनों स्वच्छता, संयम, श्रद्धा और शांतिपूर्ण व्यवहार को प्राथमिकता देना धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है.
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पूजा करते समय सबसे जरूरी बात यह है कि धार्मिक परंपराओं का पालन अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया जाए. साथ ही अखंड ज्योत और अन्य अग्नि से जुड़े अनुष्ठानों में सुरक्षा को नजरअंदाज न करें.


