Uttarakhand Metro: उत्तराखंड में शहरी और क्षेत्रीय परिवहन को मजबूत करने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं पर काम और योजना स्तर पर गतिविधियां जारी हैं. इनमें देहरादून में Metro Neo और हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र में मेट्रो कनेक्टिविटी के प्रस्ताव शामिल हैं. इसके साथ ही दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत नेटवर्क को आगे उत्तराखंड तक जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा होती रही है.
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ RRTS कॉरिडोर 82.15 किलोमीटर लंबा है और फरवरी 2026 से पूरी तरह परिचालन में है. इस कॉरिडोर में नमो भारत और मेरठ मेट्रो एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करते हैं.
यह भी पढ़ें- Navratri 2026: नवरात्रि में भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
हरिद्वार-ऋषिकेश में मेट्रो का प्रस्ताव
आपके दिए विवरण के मुताबिक, उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की योजना में हरिद्वार से ऋषिकेश के बीच करीब 32 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का प्रस्ताव शामिल है. प्रस्तावित लाइन में करीब 10 स्टेशन और एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना बताई गई है.
यह रूट हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र से शुरू होकर ऋषिकेश के चंद्रभागा ब्रिज क्षेत्र तक प्रस्तावित बताया गया है. हालांकि, इसके अंतिम अलाइनमेंट, निर्माण समयसीमा और संचालन को लेकर आधिकारिक स्वीकृतियां महत्वपूर्ण होंगी.
देहरादून के लिए Metro Neo का प्रस्ताव
देहरादून शहर में Metro Neo के प्रस्ताव पर भी काम किया जा रहा है. Metro Neo पारंपरिक मेट्रो की तुलना में अलग तकनीक पर आधारित शहरी परिवहन प्रणाली है और इसमें रबर-टायर आधारित वाहन इस्तेमाल किए जाते हैं.
प्रस्तावित नेटवर्क में देहरादून के प्रमुख हिस्सों को जोड़ने की योजना बताई गई है. इसका उद्देश्य शहर में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना और सड़क यातायात पर दबाव कम करना है.
दिल्ली-मेरठ से उत्तराखंड तक कनेक्टिविटी की चर्चा
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने के बाद इसे दूसरे क्षेत्रों तक विस्तार देने की संभावनाओं पर भी चर्चा है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत प्राथमिक RRTS कॉरिडोरों में दिल्ली-हरिद्वार-ऋषिकेश विस्तार शामिल नहीं है. केंद्र के अनुसार प्राथमिकता वाले कॉरिडोरों में दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ, दिल्ली-गुरुग्राम-अलवर और दिल्ली-पानीपत शामिल हैं. इसलिए हरिद्वार-ऋषिकेश तक नमो भारत के विस्तार को फिलहाल प्रस्ताव/संभावित भविष्य की कनेक्टिविटी के तौर पर देखना ज्यादा सही है.
ज्वालापुर और नेपाली फार्म बन सकते हैं अहम इंटरचेंज
प्रस्तावित योजनाओं के मुताबिक, ज्वालापुर और नेपाली फार्म जैसे स्थान भविष्य में अलग-अलग परिवहन प्रणालियों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट बन सकते हैं. ज्वालापुर क्षेत्र में हरिद्वार-ऋषिकेश मेट्रो और भविष्य के क्षेत्रीय रेल कनेक्शन के बीच इंटरचेंज की संभावना बताई गई है. वहीं नेपाली फार्म क्षेत्र को ऋषिकेश और देहरादून की ओर जाने वाली प्रस्तावित मेट्रो लाइनों के बीच कनेक्शन के रूप में देखा जा रहा है.
क्या दिल्ली से ऋषिकेश का सफर ढाई घंटे में होगा?
दिल्ली-मेरठ नमो भारत की गति और भविष्य के संभावित विस्तार को देखते हुए दिल्ली से उत्तराखंड के प्रमुख शहरों तक यात्रा समय घटने की संभावना जताई जाती है. मौजूदा दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ RRTS में नमो भारत की अधिकतम परिचालन गति 160 किमी प्रति घंटा है और इसकी डिजाइन स्पीड 180 किमी प्रति घंटा है.
हालांकि, दिल्ली से ऋषिकेश ढाई घंटे में पहुंचने का दावा अभी प्रस्तावित विस्तार के अंतिम अलाइनमेंट, स्टेशनों, परिचालन गति और इंटरचेंज समय पर निर्भर करेगा. इसलिए इसे फिलहाल संभावित यात्रा समय के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.
रोपवे और अन्य परियोजनाएं भी प्रस्तावित
हरिद्वार और ऋषिकेश में धार्मिक पर्यटन को ध्यान में रखते हुए रोपवे जैसी परियोजनाओं पर भी काम और प्रस्ताव सामने आए हैं. इनमें मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान बनाने वाली योजनाएं शामिल हैं. केंद्र सरकार की ओर से ऋषिकेश क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए रिशिकेश बाईपास की योजना भी प्रस्तावित की गई है. MoRTH के अनुसार, इसका उद्देश्य NH-34 पर यातायात दबाव कम करना है.
यह भी पढ़ें- Greater Noida West Metro: 5 लाख लोगों को बड़ी राहत! सेक्टर-51 से सेक्टर-4 तक मेट्रो को जल्द मिल सकती है मंजूरी
उत्तराखंड में बदल सकता है पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ढांचा
अगर प्रस्तावित मेट्रो, Metro Neo, क्षेत्रीय रेल और रोपवे परियोजनाएं आगे बढ़ती हैं, तो देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क अधिक एकीकृत हो सकता है. फिलहाल इन परियोजनाओं की अंतिम मंजूरी, फंडिंग, DPR और निर्माण समयसीमा अलग-अलग स्तरों पर निर्भर करेगी.


