नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के सख्त रुख ने पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ा दी है. 1960 की इंडस वॉटर ट्रीटी के निलंबन के बाद अब झेलम और चिनाब के घटते बहाव ने इस्लामाबाद में खतरे की घंटी बजा दी है. कभी सूखे का डर, तो कभी मॉनसून में बाढ़ की आशंका-पाकिस्तान की शहबाज सरकार दोनों तरफ से घिरती नजर आ रही है.
सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पाकिस्तान की चिंता काफी बढ़ गई है. भारत के इस रणनीतिक फैसले को इस्लामाबाद अपने लिए बड़ा झटका मान रहा है. जल संसाधनों पर निर्भर पाकिस्तान को अब आशंका है कि भारत अपने हिस्से के पानी पर अधिक नियंत्रण स्थापित कर उसकी कृषि और अर्थव्यवस्था पर दबाव बना सकता है.
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पाकिस्तान में मचा हड़कंप
झेलम नदी और चिनाब नदी के बहाव में कमी को लेकर पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है. अधिकारियों का दावा है कि पानी के स्तर में उतार-चढ़ाव से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है. खासकर रबी और खरीफ फसलों के समय कम पानी मिलने की आशंका ने किसानों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है.
पाकिस्तान की एक उच्चस्तरीय बैठक में वॉटर ऐंड पावर डेवलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन ने कहा कि भारत झेलम और चिनाब बेसिन में बड़े प्रोजेक्ट्स पर भारी निवेश कर रहा है. उनका आरोप है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारत पानी रोकने की क्षमता को 15 दिन से बढ़ाकर लगभग 60 दिन तक कर सकता है.
पाकिस्तानी मीडिया के रिपोर्ट के मुताबिक
पाकिस्तानी मीडिया, विशेषकर की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार को सूखे का खतरा सताने लगा है. अधिकारियों का कहना है कि अगर जरूरत के समय पानी कम छोड़ा गया तो लाखों एकड़ खेती प्रभावित हो सकती है. वहीं मानसून में ज्यादा पानी छोड़े जाने से बाढ़ का भी खतरा मंडरा सकता है.
पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि बगलिहार बांध पर भारत पानी रोक रहा है, जिससे डाउनस्ट्रीम इलाकों में जल प्रवाह कम हुआ है. इस मुद्दे पर इस्लामाबाद ने भारत से स्पष्टीकरण मांगा है और कहा है कि जल प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है, ताकि क्षेत्रीय अस्थिरता न बढ़े.
मंगला बांध तक पानी के कम पहुंचने की बात भी पाकिस्तानी अधिकारियों ने उठाई है. उनका कहना है कि झेलम में जल स्तर गिरने से बिजली उत्पादन और सिंचाई दोनों प्रभावित हो सकते हैं. इससे ऊर्जा संकट और कृषि संकट एक साथ गहराने की आशंका व्यक्त की जा रही है.
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पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए जल समझौते को निलंबित किया. इसके साथ ही शाहपुर कंडी बांध जैसे प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि रावी का अधिकतम पानी भारत में ही उपयोग करने की योजना पर काम चल रहा है.


