बिहार में मत्स्य पालन और डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) के तहत कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं लागू की हैं. मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया कि PMMSY के तहत बिहार के लिए ₹579.72 करोड़ की मत्स्य विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी ₹193.13 करोड़ है.
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PMMSY के तहत बिहार में ₹579.72 करोड़ की परियोजनाएं
मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2020-21 से लागू प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बिहार में मत्स्य पालन के समग्र विकास के लिए कई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है.
राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 से 2025-26 के दौरान विभिन्न जिलों को ₹107.30 करोड़ स्वीकृत किए गए, जिनमें से ₹73.59 करोड़ का उपयोग किया जा चुका है.
इन परियोजनाओं को मिली मंजूरी
बिहार में PMMSY के तहत कई प्रमुख परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
- इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क
- थोक मछली बाजार (Wholesale Fish Market)
- जलाशयों का एकीकृत विकास
- गुणवत्ता परीक्षण एवं रोग निदान प्रयोगशालाएं
- फिश ब्रूड बैंक
- हैचरी (Hatcheries)
इसके अलावा 15 जून 2026 को राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन पटना में किया गया, जिससे मत्स्य पालकों और उद्यमियों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और आधुनिक जानकारी उपलब्ध कराई जा सकेगी.
राष्ट्रीय गोकुल मिशन से डेयरी क्षेत्र को लाभ
मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) के तहत बिहार में देशी नस्लों के संरक्षण, पशुधन की आनुवंशिक गुणवत्ता सुधारने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं.
मुख्य उपलब्धियां:
- 64.87 लाख कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) किए गए.
- 29.16 लाख किसानों को इसका लाभ मिला.
- 10,122 सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तकनीक आधारित कृत्रिम गर्भाधान किए गए.
- 9,020 किसानों को इसका लाभ मिला.
- पूर्णिया में आधुनिक सीमेन स्टेशन स्थापित किया गया.
- पटना और मोतिहारी में दो इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रयोगशालाएं स्थापित की गईं.
- 5,433 MAITRI तकनीशियनों को प्रशिक्षित किया गया.
- मुंगेर और डुमरांव में 500-500 क्षमता वाले दो हीफर रियरिंग सेंटर स्वीकृत किए गए.
डेयरी विकास के लिए भी कई पहल
मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) के तहत बिहार में:
- प्रतिदिन 7 लाख लीटर चिलिंग क्षमता विकसित की गई.
- 21 डेयरी प्रयोगशालाओं को मजबूत किया गया.
- 13,590 गांव स्तर के गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए गए.
- 3,426 डीप फ्रीजर और विजी कूलर दिए गए.
- पिछले दो वर्षों में 11,834 डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया गया.
वहीं पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) के तहत 7.55 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले डेयरी प्रोसेसिंग यूनिटों को मंजूरी दी गई है.
किसानों को जागरूक करने पर भी जोर
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत किसानों के लिए फर्टिलिटी कैंप, दूध उत्पादन प्रतियोगिताएं, बछड़ा रैलियां, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सेमिनार और कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं, ताकि देशी नस्लों के संरक्षण और आधुनिक पशुपालन तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके.
Source: Ministry of Fisheries, Animal Husbandry & Dairying


