ओडिशा के पुरी में आज से विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ होगा. इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ भव्य रथों पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे. देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के इस ऐतिहासिक उत्सव में शामिल होने की संभावना है.
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श्री जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक निकलेगी यात्रा
रथ यात्रा पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर श्री गुंडिचा मंदिर तक पहुंचेगी. गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है.
यह यात्रा लगभग तीन किलोमीटर की दूरी तय करती है. पूरे मार्ग में श्रद्धालु रथों की रस्सियां खींचकर भगवान के दर्शन का पुण्य प्राप्त करते हैं.
नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजेंगे भगवान
रथ यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहेंगे.
इसके बाद तीनों देवता बहुदा यात्रा यानी वापसी रथ यात्रा के माध्यम से पुनः श्री जगन्नाथ मंदिर लौटेंगे. बहुदा यात्रा भी इस पर्व का प्रमुख आकर्षण होती है.
सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार ने रथ यात्रा को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं.
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पूरे शहर में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. यातायात प्रबंधन, निगरानी और आपातकालीन सेवाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके.
रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
जगन्नाथ रथ यात्रा भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है. इस दौरान भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं. मान्यता है कि रथ यात्रा में शामिल होकर भगवान के दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
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FAQs
1. जगन्नाथ रथ यात्रा कहां आयोजित होती है?
विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा ओडिशा के पुरी शहर में आयोजित होती है.
2. रथ यात्रा में कौन-कौन से देवता शामिल होते हैं?
भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा रथ यात्रा में शामिल होते हैं.
3. रथ यात्रा कितनी दूरी तय करती है?
रथ यात्रा श्री जगन्नाथ मंदिर से श्री गुंडिचा मंदिर तक लगभग तीन किलोमीटर की दूरी तय करती है.
4. बहुदा यात्रा क्या है?
गुंडिचा मंदिर में नौ दिन प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन की श्री जगन्नाथ मंदिर वापसी को बहुदा यात्रा कहा जाता है.


