IPS Umesh Khandbahale Success Story: फिल्म ’12th Fail’ और आईपीएस अधिकारी मनोज कुमार शर्मा की संघर्ष गाथा से तो आज पूरा देश वाकिफ है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक और ऐसे जांबाज आईपीएस अफसर हैं, जिनकी जिंदगी की कहानी हूबहू मनोज शर्मा से मिलती-जुलती है?यह कहानी है आईपीएस उमेश गणपत खंडबहाले की. जो कभी 12वीं में फेल होने पर लोगों के ताने सुनते थे, आज वही देश के गौरव हैं और वर्तमान में पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात हैं. 2015 की यूपीएससी परीक्षा में 704वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बनने वाले उमेश की यह यात्रा किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है.
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जब 12वीं में आए महज 21 नंबर, पिता के साथ बेचना पड़ा दूध
महाराष्ट्र के नासिक में त्र्यंबकेश्वर के पास ‘महिरावणी’ गांव के रहने वाले उमेश का परिवार बेहद गरीब था. साल 2003 में जब 12वीं का रिजल्ट आया, तो उमेश अंग्रेजी विषय में फेल हो गए. उन्हें इंग्लिश में सिर्फ 21 नंबर मिले थे. इस असफलता के बाद उनके पिता ने उन्हें अपने साथ काम पर लगा लिया. घर का खर्च चलाने और पेट पालने के लिए उमेश ने करीब दो साल तक दूध बेचने का काम किया. वह रोज अपने गांव से दूध इकट्ठा करते और नासिक के बाजार में बेचने जाते थे. इसके अलावा उन्होंने मजदूरी की, खेतों में काम किया और सामान ढोने जैसे कई छोटे-मोटे काम भी किए.
यशवंतराव चव्हाण यूनिवर्सिटी के बाहर से बदला जिंदगी का रास्ता
उमेश की जिंदगी में टर्निंग पॉइंट तब आया, जब एक दिन नासिक जाते समय उनकी नजर रास्ते में पड़ने वाली यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी (YCMOU) पर पड़ी. वह वहां रुके और यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से जानकारी ली. यहीं से उन्हें ओपन एजुकेशन सिस्टम के बारे में पता चला, जिसने उनकी बंद किस्मत के ताले खोल दिए.
आईपीएस उमेश खंडबहाले ने बताया कि हिम्मत जुटाई और फिर से पढ़ाई शुरू की. सबसे पहले ओपन स्कूलिंग के जरिए 12वीं की परीक्षा पास की. इसके बाद बीएससी हॉर्टिकल्चर में एडमिशन लिया. जिस अंग्रेजी विषय में फेल होकर कभी उनका दिल टूटा था, उसी को अपनी ताकत बनाते हुए उन्होंने केटीएचएम कॉलेज से इंग्लिश में बीए और फिर इंग्लिश लिटरेचर में एमए किया. असफलता के बाद कामयाबी पाने के लिए ‘रीस्टार्ट’ करना ही एकमात्र मूल मंत्र है.
तीसरे प्रयास में पूरा किया IPS बनने का सपना
साल 2012 में उमेश यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आ गए. 26 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला अटेंप्ट दिया. आखिरकार, कड़ी मेहनत और अटूट हौसले के दम पर साल 2015 में अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा क्रैक कर ली. 704वीं रैंक हासिल कर उमेश जब आईपीएस अधिकारी बनकर लौटे, तो वह अपने पूरे गांव से इस प्रतिष्ठित पद तक पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बने.
असफलता अंत नहीं, शुरुआत है
उमेश गणपत खंडबहाले की कहानी देश के उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो किसी एक परीक्षा में फेल होने के बाद निराश होकर बैठ जाते हैं. उमेश ने साबित कर दिया कि अगर आपके अंदर ‘रीस्टार्ट’ करने का जज्बा है, तो कोई भी कमजोरी आपको आपकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती.


