Ayodhya News: अयोध्या. डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी द्वारा स्वामी विवेकानंद सभागार में विश्व फार्मासिस्ट दिवस धूमधाम से मनाया गया. इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना’ रही. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ. संस्थान के निदेशक प्रो. शैलेन्द्र कुमार ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत तुलसी का पौधा व स्मृति-चिह्न भेंट कर किया.
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कुलपति ने क्या कहा?
कार्यक्रम में कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि फार्मेसी केवल औषधियों के वितरण तक सीमित नहीं है, यह मानव जीवन की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवा का आधारस्तंभ है. आज के समय में औषधि-अंतःक्रिया (ड्रग इंटरेक्शन) की निगरानी, सही मात्रा में दवाओं का सेवन और नशा उन्मूलन जैसे गंभीर विषयों पर समाज को जागरूक करने में फार्मासिस्ट की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है.
विद्यार्थियों को नवीन औषधि वितरण प्रणालियों और आधुनिक अनुसंधानों से निरंतर जुड़ना होगा. फार्मेसी के छात्र केवल डिग्री धारक न बनें, बल्कि सेवा-भावना, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को आत्मसात कर समाज के स्वास्थ्य के प्रति समर्पित प्रहरी बनें. विशिष्ट अतिथि राजर्षि दशरथ स्वायत्तशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मार्तोलिया ने क्लीनिकल फार्मेसी, दवा सुरक्षा, प्रतिकूल प्रभावों की निगरानी एवं रोगी परामर्श में फार्मासिस्ट की बदलती भूमिका को रेखांकित किया. विश्वविद्यालय की अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने विद्यार्थियों को उच्च मानवीय मूल्यों और सेवा-भाव से कार्य करने के लिए प्रेरित किया.
मुख्य कार्यक्रम से पूर्व आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. रंगोली प्रतियोगिता में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती फैकल्टी ऑफ फार्मेसी की अधिष्ठाता प्रो. शालिनी त्रिपाठी एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता को सराहा. वाद-विवाद प्रतियोगिता बी.टेक. की शिक्षिका डॉ. श्वेता कुमारी के मार्गदर्शन में संपन्न हुई. उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया.
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कौन-कौन मौजूद रहा?
मंच संचालन बी.फार्म. तृतीय वर्ष की छात्रा अंकिता त्रिपाठी और छात्र ओम त्रिपाठी ने किया. कार्यक्रम की रूपरेखा विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में तैयार की गई, जिसमें पूनम सिंह, ज्योति वैश्य, पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सिंधु सिंह सहित फार्मेसी व माइक्रोबायोलॉजी विभाग के शिक्षकों का विशेष योगदान रहा. अंत में डॉ. विमल यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का गरिमापूर्ण समापन हुआ.


