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Browsing: kavita
वो दिन बड़े सुहाने थे, जब हम सबसे बेगाने थे,गुड्डे-गुड़ियों के खेल थे, जज्बातों के मेल थे,जमाने वो अनसुने हो…
अजब सा सुकून आज मेरे दिल में छाया है,इक प्यारा सा घरौंदा मेरे घर में नजर आया है. कभी मैं…
तुम घने जंगल,तो लकड़ी हूं मैं,तुम लहराते सागर,तैरती इक मछली हूं मैं. भूलकर न गई तेरी नजर,बनारस की वो गली…

