Bulandshahr industrial area: बुलंदशहर में लंबे समय से बंद पड़ी कताई मिल की जमीन अब रोजगार और विकास का नया केंद्र बनने जा रही है. करीब 78 एकड़ क्षेत्र में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा, जिसके लिए जमीन उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) को हस्तांतरित कर दी गई है. प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत यहां विभिन्न उद्योगों की स्थापना की तैयारी शुरू हो गई है.
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यह कताई मिल साल 2000 के बाद से बंद पड़ी थी और वर्ष 2002 में यहां कार्यरत लगभग 750 कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) देकर मिल को पूरी तरह बंद कर दिया गया था. तब से यह विशाल परिसर वीरान पड़ा था. अब सरकार ने इस जमीन का उपयोग औद्योगिक विकास के लिए करने का फैसला लिया है.
जानकारी के अनुसार, करीब 78.56 एकड़ जमीन को साफ कर लिया गया है. एक निजी कंपनी ने परिसर में फैली झाड़ियों और पुराने ढांचों को हटाने का काम पूरा कर दिया है. जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है और अब UPSIDA यहां आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित करेगा, जहां कई तरह की औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जाएंगी.
दरअसल, प्रदेश सरकार ने पिछले साल राज्य की छह बंद कताई मिलों की जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई थी. इसी योजना के तहत इन मिलों की जमीन UPSIDA को सौंपने का निर्णय लिया गया, ताकि नए निवेश को आकर्षित किया जा सके और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकें.
इस औद्योगिक क्षेत्र के विकसित होने से बुलंदशहर के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. अब तक नौकरी के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करने वाले युवाओं को अपने जिले में ही काम मिलने की संभावना बनेगी. हालांकि, इस बीच मिल के पूर्व कर्मचारियों का बकाया भुगतान अभी भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है. उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल संयुक्त संघ मोर्चा के अध्यक्ष हरीश शर्मा का कहना है कि कर्मचारियों का करीब 6 करोड़ रुपये का बकाया अभी तक नहीं मिला है. उनका कहना है कि मिल की इमारत तोड़कर जो स्क्रैप बेचा गया है, उसकी राशि से कर्मचारियों का भुगतान किया जाना चाहिए.
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प्रदेश में जिन छह बंद कताई मिलों की जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना है, उनमें सीतापुर के महमूदाबाद, फतेहपुर, प्रयागराज के मऊआइमा, गाजीपुर के बहादुरगंज, फर्रुखाबाद के कम्पिल और बुलंदशहर की कताई मिल शामिल हैं. इन सभी जगहों पर औद्योगिक गतिविधियां शुरू होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.


