भारत की रक्षा तकनीक और नौसेना क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. Pune स्थित Bharat Forge ने आंध्र प्रदेश सरकार के साथ मिलकर देश की पहली Private Sector Marine Gas Turbine Facility स्थापित करने का फैसला किया है. यह परियोजना विशाखापट्टनम में विकसित की जाएगी.
यह सुविधा Marine Gas Turbine (MGT) की Repair, Overhaul और Indigenous Development पर काम करेगी, जो भारतीय नौसेना के लिए बेहद अहम मानी जा रही है.
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Visakhapatnam क्यों चुना गया?
यह नया कॉम्प्लेक्स Andhra Pradesh Defence Manufacturing Corridor के लगभग 80 एकड़ क्षेत्र में बनाया जाएगा. इसकी लोकेशन Naval Dockyard, INS Eksila और Eastern Naval Command Headquarters के करीब होगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस रणनीतिक लोकेशन से भारतीय नौसेना को तेजी से तकनीकी सहायता और इंजन सर्विसिंग मिल सकेगी.
क्या होता है Marine Gas Turbine?
Marine Gas Turbine युद्धपोतों और बड़े नौसैनिक जहाजों का मुख्य propulsion system होता है. भारतीय नौसेना के कई frontline warships इन्हीं इंजनों पर निर्भर हैं. अभी तक इनके maintenance और overhaul के लिए विदेशी सप्लाई चेन पर काफी निर्भरता रही है.
हाल के वर्षों में वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने के कारण नौसेना के maintenance cycle पर असर पड़ा था. ऐसे में भारत में यह सुविधा विकसित होना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
दो चरणों में पूरा होगा प्रोजेक्ट
Phase 1 में क्या बनेगा?
पहले चरण में Bharat Forge Marine Gas Turbine Repair और Overhaul Complex तैयार करेगा. यहां:
- turbine blades repair
- combustion liner restoration
- component manufacturing
- NDE testing
- hot section restoration
जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. कंपनी ने दावा किया है कि Naval Dockyard के लिए 72 घंटे के turnaround support capability भी तैयार की जाएगी.
Phase 2 होगा और ज्यादा एडवांस
दूसरे चरण में भारत का पहला Private Marine Gas Turbine Development and Assembly Hall बनाया जाएगा. यहां full-spectrum hot test cell भी स्थापित होगा, जो अलग-अलग propulsion ratings पर काम कर सकेगा.
इसी चरण में भारत में पहली बार Indigenous Marine Gas Turbine विकसित और qualify करने का लक्ष्य रखा गया है.
‘विदेशी निर्भरता खत्म होगी’
Bharat Forge के Vice Chairman Amit Kalyani ने कहा कि भारतीय युद्धपोत लंबे समय से विदेशी इंजनों पर निर्भर रहे हैं और अब यह स्थिति बदलने जा रही है. कंपनी का लक्ष्य Marine Gas Turbine technology को भारत में विकसित करना है.
यह परियोजना ‘Aatmanirbhar Bharat’ और Defence Self-Reliance मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है.
कितने लोगों को मिलेगा रोजगार?
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस परियोजना से करीब 750 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा हो सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे Visakhapatnam और Andhra Pradesh Defence Corridor में defence manufacturing ecosystem को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा.
Rajnath Singh और Chandrababu Naidu की मौजूदगी में हुआ समझौता
यह MoU Puttaparthi में आयोजित Aerospace and Defence Investment Conclave के दौरान साइन किया गया. इस मौके पर रक्षा मंत्री Rajnath Singh और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu भी मौजूद रहे. इसी कार्यक्रम में कई अन्य defence manufacturing projects की भी घोषणा की गई थी.
भारत की Naval Power को मिलेगा बड़ा फायदा
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना सिर्फ एक manufacturing unit नहीं बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा और strategic independence की दिशा में बड़ा कदम है. अगर भारत भविष्य में खुद के marine propulsion systems विकसित करने में सफल होता है, तो इससे:
- विदेशी निर्भरता कम होगी
- maintenance cost घटेगी
- warship readiness बढ़ेगी
- defence exports को भी मदद मिल सकती है
और भारत वैश्विक defence manufacturing map पर और मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है.
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