Ghazipur Lekhpal Strike: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के रीढ़ कहे जाने वाले लेखपालों के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है. जनपद में बड़े पैमाने पर हुए तबादलों से नाराज उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन धरना और कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है. इसके चलते जिले की सभी सातों तहसीलों में राजस्व से जुड़े तमाम काम पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे आम जनता की परेशानियां बढ़ने के आसार हैं.
नियमों के विपरीत तबादले का आरोप
धरने पर बैठे लेखपालों का सीधा आरोप है कि जिलाधिकारी (डीएम) अनुपम शुक्ल ने नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर ट्रांसफर किए हैं. सदर क्षेत्र के लेखपाल राकेश राय का कहना है कि कई कर्मचारियों को उनकी मूल तहसील से 60 से 70 किलोमीटर दूर भेज दिया गया है. इतनी लंबी दूरी के कारण न सिर्फ उनके सरकारी कार्य प्रभावित होंगे, बल्कि उनका पारिवारिक जीवन भी पूरी तरह पटरी से उतर जाएगा.
लेखपाल संघ के नेता करुणाकांत ने इस कार्रवाई को पूरी तरह नियम विरुद्ध बताते हुए कहा कि नियमानुसार किसी भी लेखपाल का उसकी मूल तहसील से बाहर स्थानांतरण नहीं किया जाना चाहिए. लेकिन यहां नियमों की अनदेखी की गई है. जब तक इन स्थानांतरण आदेशों में संशोधन नहीं होता, हमारा आंदोलन और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा.
‘जनता दर्शन’ और मौखिक आदेशों का भारी दबाव
विवाद की दूसरी बड़ी वजह प्रशासनिक सख्ती और काम का दबाव है. लेखपालों का आरोप है कि जिलाधिकारी ‘जनता दर्शन’ में आने वाली शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए उन पर अत्यधिक दबाव बनाते हैं. लेखपालों के मुताबिक, जनता दर्शन में आने वाली कई शिकायतें एकपक्षीय होती हैं, जिनकी विस्तृत जांच जरूरी होती है. लेकिन प्रशासन की ओर से उसी दिन कार्रवाई मुकम्मल करने का दबाव रहता है.
सूत्रों के मुताबिक, डीएम अनुपम शुक्ल के कार्यकाल में जनता दर्शन को लेकर प्रशासनिक सक्रियता काफी बढ़ी है, जिसके चलते फरियादियों की भीड़ भी कई गुना बढ़ गई है. त्वरित राहत देने के लिए डीएम अक्सर फोन पर ही मौखिक निर्देश दे देते हैं कि अमुक मामले में क्या कार्रवाई हुई, इसकी रिपोर्ट शाम तक सौंपी जाए. अब इसी ‘शाम तक रिपोर्ट’ वाले कड़क रवैए और मौखिक आदेशों से राजस्व विभाग के लेखपाल बेहद परेशान हैं.
बढ़ सकती हैं मुश्किलें
एक तरफ जहां जनता की समस्याओं को तुरंत सुलझाने के लिए जिला प्रशासन की सख्ती बरकरार है, वहीं दूसरी तरफ लेखपालों ने गैर-तहसील ट्रांसफर और काम के तौर-तरीकों के खिलाफ कलमबंद हड़ताल कर दी है. प्रशासनिक सख्ती और लेखपालों के इस कड़े रुख को देखते हुए गाजीपुर का यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की आशंका है. यदि जल्द ही बीच का रास्ता नहीं निकला, तो तहसील स्तर पर आम नागरिकों के जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र और जमीन से जुड़े मामले लंबे समय के लिए लटक सकते हैं.


