भारत आज दुनिया की सबसे युवा बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की होने के कारण देश के पास एक ऐसा जनसांख्यिकीय अवसर है जो आने वाले दशकों की आर्थिक, सामाजिक और वैश्विक स्थिति को निर्धारित कर सकता है. पिछले एक दशक में भारत की युवा नीति केवल कल्याणकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं को राष्ट्र निर्माण के सक्रिय साझेदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में विकसित हुई है. यही कारण है कि आज भारतीय युवाओं को “अमृत पीढ़ी” के रूप में देखा जा रहा है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्रमुख वाहक है.
राष्ट्रीय युवा नीति 2014 ने शिक्षा, कौशल, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों के लिए आधार तैयार किया था. इसके बाद उभरते हुए दृष्टिकोण ने युवाओं को लाभार्थी से आगे बढ़ाकर विकास के नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया. प्रस्तावित राष्ट्रीय युवा नीति 2025 भविष्य के कौशल, उद्यमिता, डिजिटल भागीदारी, नेतृत्व और सतत विकास को केंद्र में रखती है, जो बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप है.
पेट्रोल-डीजल को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, 90 दिन तक इन ग्राहकों पर रहेगी रोक
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और नई संभावनाएं
भारत की शिक्षा व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से देखने को मिला. यह नीति शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि सीखने, नवाचार और बहु-विषयक विकास की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित करती है. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करना है, जहां ज्ञान, कौशल और अनुकूलन क्षमता समान रूप से महत्वपूर्ण हों.
स्कूली शिक्षा में बुनियादी ढांचे के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है. 2025-26 तक 1.49 लाख से अधिक स्कूलों को आईसीटी और डिजिटल पहलों के अंतर्गत लाया गया, जबकि 1.76 लाख से अधिक स्मार्ट क्लासरूम और 1.79 लाख आईसीटी प्रयोगशालाओं को मंजूरी मिली. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय और जनजातीय क्षेत्रों के लिए विकसित छात्रावास सुविधाओं ने सामाजिक तथा भौगोलिक रूप से वंचित वर्गों के लिए शिक्षा तक पहुंच बढ़ाई है. इसका प्रभाव नामांकन में वृद्धि और ड्रॉपआउट दर में कमी के रूप में दिखाई देता है.
उच्च शिक्षा क्षेत्र में भी व्यापक परिवर्तन हुए हैं. कुल नामांकन 2014-15 के 3.42 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 4.46 करोड़ तक पहुंच गया. नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क को 170 विश्वविद्यालयों ने अपनाया है, जबकि एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स से 2,469 संस्थान जुड़े हैं और 32 करोड़ से अधिक छात्र आईडी जारी की जा चुकी हैं. 15.48 करोड़ से अधिक सत्यापित अपार आईडी छात्रों की शैक्षणिक और कौशल उपलब्धियों को एकीकृत कर रही हैं.
डिजिटल शिक्षा का विस्तार भी उल्लेखनीय है. जून 2026 तक स्वयं प्लेटफॉर्म पर 18,580 से अधिक पाठ्यक्रम उपलब्ध थे, जिनमें 6.1 करोड़ से अधिक नामांकन और 53.7 लाख प्रमाणन दर्ज हुए. दीक्षा पर 135 भाषाओं में 3.66 लाख से अधिक ई-कंटेंट संसाधन उपलब्ध हैं. वहीं, वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन पहल ने 7,414 संस्थानों और लगभग 99 लाख उपयोगकर्ताओं को शोध संसाधनों तक पहुंच प्रदान की है.
भारत की उच्च शिक्षा क्षमता भी तेजी से बढ़ी है. मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2014 के 431 से बढ़कर 2025-26 में 818 हो गई. एमबीबीएस सीटें 1,28,976 और पीजी सीटें 85,822 तक पहुंच चुकी हैं. नए आईआईटी परिसरों के विस्तार, अंतरराष्ट्रीय कैंपसों की स्थापना और विदेशी विश्वविद्यालयों के आगमन की संभावनाएं भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं.
कौशल विकास और रोजगारयोग्यता की नई दिशा
यदि शिक्षा युवाओं को आधार प्रदान करती है, तो कौशल विकास उन्हें आर्थिक अवसरों से जोड़ता है. 2015 में शुरू किया गया स्किल इंडिया मिशन इसी दृष्टि का परिणाम है. इसका लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं बल्कि उद्योग की मांग के अनुरूप कार्यबल तैयार करना है.
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना ने विभिन्न चरणों में करोड़ों युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया. पीएमकेवीवाई 1.0 के तहत 19 लाख से अधिक, पीएमकेवीवाई 2.0 में 1.10 करोड़ से अधिक और पीएमकेवीवाई 3.0 में 7 लाख से अधिक उम्मीदवार प्रशिक्षित हुए. वर्तमान पीएमकेवीवाई 4.0 कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों पर केंद्रित है. जून 2026 तक 36 राज्यों और 741 जिलों में 27 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है.
जन शिक्षण संस्थानों ने कौशल विकास को ग्रामीण और वंचित वर्गों तक पहुंचाया है. 2018 से मार्च 2026 तक 36.48 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया. वहीं, नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के माध्यम से 54.41 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को उद्योग आधारित अनुभव प्राप्त हुआ. सरकार द्वारा सीधे स्टाइपेंड सहायता ने सीखते हुए कमाना मॉडल को मजबूत बनाया है.
देशभर के 14,688 आईटीआई और 169 ट्रेडों का नेटवर्क औद्योगिक कौशल निर्माण की रीढ़ बना हुआ है. अक्टूबर 2025 में शुरू पीएम-सेतु कार्यक्रम, जिसकी अनुमानित लागत 60,000 करोड़ रुपये है, 1,000 सरकारी आईटीआई को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
भविष्य की तकनीकों के लिए भी तैयारी की जा रही है. जुलाई 2025 में शुरू एसओएआर कार्यक्रम कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को एआई साक्षरता प्रदान कर रहा है. आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट और सिस्को जैसी कंपनियों के सहयोग से यह पहल छात्रों को उभरती तकनीकी अर्थव्यवस्था के लिए तैयार कर रही है.
रोजगार सृजन और औपचारिक अर्थव्यवस्था का विस्तार
युवाओं के सशक्तिकरण का अंतिम उद्देश्य अवसरों का सृजन है. भारत में रोजगार वृद्धि का एक महत्वपूर्ण संकेतक श्रम बाजार का औपचारिक होना है. ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2020 से जून 2025 के बीच 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के 3.45 करोड़ से अधिक युवा औपचारिक कार्यबल में शामिल हुए.
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना, जिसके लिए 1 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार अवसरों को समर्थन देने का लक्ष्य रखती है. अक्टूबर 2022 से आयोजित रोजगार मेलों के माध्यम से 12 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं.
नेशनल करियर सर्विस पोर्टल भारत के डिजिटल रोजगार बाजार के रूप में उभरा है. वित्त वर्ष 2025-26 में इस मंच पर 78.86 लाख से अधिक नौकरी तलाशने वाले, 12.36 लाख नियोक्ता और 3.43 करोड़ से अधिक रिक्तियां दर्ज हुईं. यह रोजगार सूचना की असमानता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
दिल्ली-NCR में 1 करोड़ में कहां मिलेगा फ्लैट? फरीदाबाद बना मिडिल क्लास की पहली पसंद
विनिर्माण क्षेत्र में मेक इन इंडिया और पीएलआई योजनाओं ने रोजगार सृजन को नई गति दी है. मार्च 2026 तक पीएलआई योजना के तहत 2.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश हुआ, जिससे 22.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का उत्पादन और बिक्री हुई. इस पहल ने 14.15 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न किए, जबकि निर्यात 15.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा. स्मार्टफोन विनिर्माण में भारत की वैश्विक स्थिति विशेष रूप से मजबूत हुई है.
स्टार्टअप क्रांति और युवा उद्यमिता
भारत का स्टार्टअप परिदृश्य पिछले दशक की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक है. 2014 से पहले जहां केवल लगभग 350 स्टार्टअप थे, वहीं जून 2026 तक डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2.3 लाख से अधिक हो चुकी है. इससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है.
120 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियां, जिनका कुल मूल्य 350 अरब डॉलर से अधिक है, इस परिवर्तन का प्रमाण हैं. महत्वपूर्ण बात यह है कि लगभग 50 प्रतिशत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप अब टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं. इससे स्पष्ट है कि नवाचार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहा.
स्टार्टअप्स ने अप्रैल 2026 तक 23 लाख से अधिक रोजगार सृजित किए. इस विकास को मजबूत वित्तीय अवसंरचना का समर्थन प्राप्त है. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सूक्ष्म उद्यमियों को 20 लाख रुपये तक का बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराती है. स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम के तहत 215 से अधिक इनक्यूबेटरों को 945 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. वहीं, 10,000 करोड़ रुपये के फंड ऑफ फंड्स ने 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में 25,500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश को सक्षम बनाया है.
स्वास्थ्य, खेल और डिजिटल भागीदारी से समग्र विकास
युवा सशक्तिकरण केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं है. मेरा युवा भारत मंच ने सीखने, स्वयंसेवा, करियर सेवाओं और नागरिक भागीदारी को एकीकृत किया है. जून 2026 तक इस मंच पर 2.19 करोड़ से अधिक युवा पंजीकृत थे. 1.45 लाख से अधिक स्वयंसेवी अवसरों और लाखों अनुभव-आधारित कार्यक्रमों ने युवाओं को व्यावहारिक सीखने के अवसर प्रदान किए हैं.
स्वास्थ्य क्षेत्र में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, टेली-मानस, आयुष्मान भारत और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसी पहलों ने समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण को मजबूत किया है. किशोर-अनुकूल स्वास्थ्य क्लीनिकों में सेवाएं लेने वालों की संख्या 39 लाख से बढ़कर 1.7 करोड़ हो गई. टेली-मानस को जून 2026 तक 39.52 लाख से अधिक कॉल प्राप्त हुईं. वहीं, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 100 करोड़ से अधिक डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड जुड़े हैं.
खेलों में भी संरचनात्मक परिवर्तन दिखाई देता है. खेलो इंडिया मिशन के तहत 1,067 केंद्र और 35 स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं. 23,080 एथलीटों को सहायता प्रदान की जा रही है और प्रत्येक को प्रतिवर्ष 6.28 लाख रुपये तक का समर्थन मिलता है. फिट इंडिया आंदोलन ने 23.68 करोड़ से अधिक लोगों को शारीरिक गतिविधियों से जोड़ा है, जबकि 4.5 लाख से अधिक स्कूलों को फिट इंडिया स्कूल फ्लैग से सम्मानित किया गया है.
7 दिनों से खेत के चक्कर काट रही गाय को ग्रामीण मान बैठे चमत्कार, डॉक्टरों ने खोला राज
भारत का युवा विकास मॉडल अब केवल शिक्षा, रोजगार या कल्याण तक सीमित नहीं है. यह शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता, स्वास्थ्य, खेल, डिजिटल भागीदारी और नागरिक नेतृत्व को जोड़ने वाला एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र बन चुका है. 2014 से 2026 के बीच का परिवर्तन यह दर्शाता है कि भारत ने पहुंच से सशक्तिकरण और भागीदारी से नेतृत्व की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाया है. यदि यह गति बनी रहती है, तो अमृत पीढ़ी केवल विकसित भारत 2047 की लाभार्थी नहीं होगी, बल्कि उसकी सबसे बड़ी निर्माता भी साबित होगी.
Source: Press Information Bureau (PIB), Delhi


