उत्तराखंड में दिव्यांगजनों के सामाजिक, आर्थिक और न्यायिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है. मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव शाह की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में समाज कल्याण विभाग द्वारा जिला स्तरीय समिति और स्थानीय स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई. बैठक में दिव्यांगजनों से जुड़े 12 मामलों में विधिक संरक्षकता और सीमित संरक्षकता प्रदान करने का निर्णय लिया गया.
बैठक का उद्देश्य विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरतमंद परिवारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना था. अधिकारियों ने पात्र लाभार्थियों तक इस व्यवस्था की जानकारी पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया.
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12 मामलों में संरक्षकता देने का निर्णय
बैठक में दिव्यांगजनों से संबंधित ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों की विस्तृत समीक्षा की गई. समीक्षा के बाद कुल 12 मामलों में विधिक संरक्षकता और सीमित संरक्षकता प्रदान करने का निर्णय लिया गया.
यह पहल उन दिव्यांगजनों के हितों की रक्षा के लिए की गई है, जिन्हें अपने दैनिक जीवन और कानूनी मामलों में सहायता की आवश्यकता होती है.
विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता से जुड़े मामलों की हुई समीक्षा
समिति ने ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, बौद्धिक दिव्यांगता और बहु-दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों से संबंधित ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों पर विस्तार से चर्चा की.
प्रत्येक आवेदन का नियमानुसार परीक्षण करने के बाद पात्र मामलों में आवश्यक निर्णय लिए गए, ताकि संबंधित लाभार्थियों को समय पर सहायता मिल सके.
8 मामलों में विधिक अभिभावक होंगे नियुक्त
बैठक में स्थानीय स्तरीय समिति ने 8 मामलों में विधिक अभिभावक नियुक्त करने का निर्णय लिया.
वहीं दिव्यांगजन अधिकार नियमावली, 2019 के तहत गठित जिला स्तरीय समिति ने 4 मामलों में सीमित संरक्षकता प्रदान करने का फैसला किया.
इन निर्णयों का उद्देश्य दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके हितों से जुड़े आवश्यक निर्णयों में कानूनी सहायता सुनिश्चित करना है.
जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि पात्र दिव्यांगजन और उनके परिवारों तक इस व्यवस्था की जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए.
उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग और अन्य संबंधित विभाग व्यापक स्तर पर जागरूकता गतिविधियां संचालित करें, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें.
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उन्होंने यह भी कहा कि दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए सरकारी योजनाओं और कानूनी प्रावधानों की जानकारी लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है, जिससे जरूरतमंद परिवार समय पर सहायता प्राप्त कर सकें.
स्रोत: उत्तराखंड जिला प्रशासन.


