Amroha Haridwar Ganga Expressway: अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन और निबंधन विभाग ने अपनी कमर कस ली है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि चिह्नीकरण और सर्वेक्षण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है. हाल ही में एआईजी स्टांप अनूप कुमार सिन्हा की ओर से विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलओ) को पत्र भेजकर अधिगृहीत की जाने वाली भूमि का पूरा ब्योरा मांगा गया है. इसमें संबंधित गांवों की गाटा संख्या, कुल क्षेत्रफल और वर्तमान सर्किल रेट की जानकारी शामिल है, जिसके आधार पर भूमि का मूल्यांकन कर अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा.
एक्सप्रेसवे का रूट और अमरोहा का हिस्सायह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे प्रयागराज-मेरठ गंगा एक्सप्रेसवे के मंगरौला टी-प्वाइंट (अमरोहा) से शुरू होकर हरिद्वार तक जाएगा. इस परियोजना की कुल लंबाई करीब 116.85 किलोमीटर है, जिसका लगभग 44 किलोमीटर हिस्सा अकेले अमरोहा जिले से होकर गुजरेगा. इस नए संपर्क मार्ग को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के बीच सहमति बन चुकी है.
परियोजना के मुख्य बिंदु (एक नज़र में)प्रभावित किसान
800 से अधिक किसानों की कृषि भूमि अधिगृहीत होने की संभावना. अमरोहा जिले की हसनपुर और धनौरा तहसील के कुल 62 गांव इसकी जद में आएंगे. एक्सप्रेसवे के दोनों ओर उद्योग, वेयरहाउस, होटल, पेट्रोल पंप और लॉजिस्टिक हब विकसित किए जाएंगे. जिले की लगभग 5 लाख गाटा संख्याओं का शत-प्रतिशत डेटा फीड किया जा चुका है. प्रभावित होने वाले प्रमुख गांवपरियोजना के दायरे में आने वाले तहसीलों के प्रमुख गांवों की सूची इस प्रकार है.
तहसील प्रभावित होने वाले मुख्य गांव हसनपुर मंगरौला, पाइंदापुर मुस्तकम, पिपलौती खुर्द, रूखालू, सिकरौली, गुलामपुर, भैंसरोली, करनखाल, बाईखेड़ा, लुहारी खादर, सोहरका, दीपपुर, आगापुर कला, मछरई, याकूबपुर, समला, बसेड़ा खुर्द, अब्दीपुर, कटाई और पूठी. धनौराअटारी, मुरीदपुर, मीरपुर, बल्दाना, वस्तौरा माफी, जलालपुर, मोहम्मदी, कौराला, रिछोटी, पारा खालसा और वलीपुर एलाइनमेंट को लेकर किसानों का विरोध और चुनौतियाँजहां एक तरफ इस एक्सप्रेसवे को क्षेत्र में उद्योग, पर्यटन, निवेश और रोजगार के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ किसानों का विरोध भी सामने आ रहा है.
करीब 12 गांवों के किसान नए एलाइनमेंट का लगातार विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि पहले के प्रस्ताव में कम उपजाऊ भूमि शामिल थी, लेकिन नए बदलाव के कारण उनकी अत्यधिक उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहण की जद में आ गई है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है. किसानों ने प्रशासन से एलाइनमेंट की दोबारा समीक्षा करने की मांग की है.
सर्किल रेट पर स्थितिएआईजी स्टांप के अनुसार, गंगा एक्सप्रेसवे की जद में आने वाले गांवों के सर्किल रेट में फिलहाल तत्काल बढ़ोतरी की कोई संभावना नहीं है. भूमि का मूल्यांकन पूरा होने के बाद नियमानुसार मुआवजा और अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. इसके पूर्व यूपीडा के निर्देशानुसार जिला प्रशासन सभी प्रभावित गांवों के बंदोबस्ती मानचित्रों का डिजिटलीकरण कर सौंप चुका है.


