देशभर में E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर चल रही चर्चाओं और सोशल मीडिया पर फैल रही विभिन्न आशंकाओं के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत प्रश्नोत्तर (FAQ) जारी कर कई महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिए हैं.
मंत्रालय ने कहा कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि यह दो दशकों से अधिक समय से चरणबद्ध तरीके से विकसित की गई राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है. सरकार का कहना है कि E20 को लेकर इंजन खराब होने, पुराने वाहनों को नुकसान पहुंचने या जल्दबाजी में लागू किए जाने जैसी कई बातें तथ्यों पर आधारित नहीं हैं.
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क्या भारत ने जल्दबाजी में E20 लागू किया?
सरकार के अनुसार, भारत ने एथेनॉल मिश्रण की शुरुआत वर्ष 2001 में पायलट परियोजना के रूप में की थी. इसके बाद.
- 2004 में कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई.
- 2006 में कई राज्यों में E5 लागू हुआ.
- 2013 में नीति को राजपत्र में अधिसूचित किया गया.
- 2018 में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति लागू हुई.
- 2021 में E20 का विस्तृत रोडमैप जारी किया गया.
- 2025-26 में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया गया.
मंत्रालय का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक परीक्षण, उद्योग परामर्श और चरणबद्ध निवेश के बाद लागू की गई है.
क्या पुराने वाहनों में E20 सुरक्षित है?
यह सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवालों में से एक है.
सरकार के अनुसार.
- E20 लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, ARAI, SIAM और अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ विस्तृत परीक्षण किए गए.
- विभिन्न परिस्थितियों में इंजन, ईंधन प्रणाली, रबर पार्ट्स, जंग लगने की संभावना और वाहन प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया.
- परीक्षणों में E20 को सुरक्षित पाया गया.
मंत्रालय ने यह भी बताया कि Maruti Suzuki ने वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें करीब 1.5 करोड़ पुराने (Non-E20 Certified) वाहन भी शामिल थे. कंपनी के अनुसार E20 के कारण इंजन, रबर पाइप या अन्य पुर्जों में कोई असामान्य खराबी सामने नहीं आई. Hero MotoCorp ने भी इसी तरह का अनुभव साझा किया है.
वाहन की मैनुअल में E10 लिखा है, तो क्या करें?
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कई पुराने वाहनों की मैनुअल में E10 Compatible इसलिए लिखा है क्योंकि वाहन का प्रमाणन उस समय के ईंधन मानकों के अनुसार हुआ था.
इसका अर्थ यह नहीं है कि बाद में वैज्ञानिक परीक्षण और नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद वही वाहन E20 उपयोग नहीं कर सकते.
सरकार का कहना है कि यदि हर देश पुराने मानकों पर ही अटका रहे, तो नई ईंधन तकनीकों को कभी लागू नहीं किया जा सकेगा.
क्या E20 से माइलेज कम होता है?
सरकार ने स्वीकार किया है कि कुछ वाहनों में 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज में कमी देखी जा सकती है.
हालांकि मंत्रालय का कहना है कि केवल माइलेज ही ईंधन की गुणवत्ता का पैमाना नहीं है.
E20 के प्रमुख लाभ बताए गए हैं.
- अधिक ऑक्टेन रेटिंग
- बेहतर एंटी-नॉक क्षमता
- तेज़ दहन
- स्मूथ एक्सेलेरेशन
- इंजन का स्वच्छ संचालन
- कम पार्टिकुलेट उत्सर्जन
- जीवनचक्र के दौरान लगभग 40 प्रतिशत तक कम कार्बन उत्सर्जन
सरकार का दावा है कि कुल मिलाकर E20 अधिक स्वच्छ और बेहतर गुणवत्ता वाला ईंधन है.
E20 सस्ता क्यों नहीं है?
कई उपभोक्ताओं का सवाल है कि यदि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है तो कीमत कम क्यों नहीं होती.
मंत्रालय के अनुसार.
- सरकार किसानों से एथेनॉल उचित मूल्य पर खरीदती है.
- मक्का आधारित एथेनॉल की खरीद कीमत लगभग ₹71.86 प्रति लीटर है.
- इसमें GST, परिवहन और भंडारण लागत अलग होती है.
सरकार का कहना है कि E20 का उद्देश्य केवल पेट्रोल सस्ता करना नहीं, बल्कि.
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना.
- वैश्विक तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देना.
- किसानों की आय बढ़ाना.
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना.
है.
एथेनॉल कार्यक्रम से देश को क्या लाभ मिला?
मंत्रालय के अनुसार Ethanol Blended Petrol Programme से अब तक.
- ₹1.97 लाख करोड़ से अधिक विदेशी मुद्रा की बचत हुई.
- लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात का विकल्प तैयार हुआ.
- लगभग 952 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन कम हुआ.
- किसानों को ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ.
सरकार का कहना है कि किसान अब केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता भी बन रहे हैं.
क्या E20 से पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग विकल्प मिलने चाहिए?
कुछ लोग E10, E20 और शुद्ध पेट्रोल तीनों विकल्प उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं.
मंत्रालय का कहना है कि भारत में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप, रिफाइनरी, डिपो और पाइपलाइन नेटवर्क संचालित हैं. ऐसे में तीन अलग-अलग ईंधन श्रृंखलाएं बनाए रखना अत्यंत महंगा और जटिल होगा.
सरकार का मानना है कि एक समान ईंधन व्यवस्था से वितरण अधिक प्रभावी और लागत कम रहती है.
सरकार की अपील
पेट्रोलियम मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे E20 को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट जानकारियों पर विश्वास न करें.
मंत्रालय के अनुसार E20 ईंधन को.
- ऑटोमोबाइल कंपनियों
- ARAI
- SIAM
- तेल विपणन कंपनियों
- नियामक संस्थाओं
द्वारा वैज्ञानिक परीक्षण और व्यापक फील्ड ट्रायल के बाद सुरक्षित घोषित किया गया है. उपभोक्ता इसे बिना किसी भ्रम के उपयोग कर सकते हैं.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या E20 पेट्रोल पुराने वाहनों के लिए सुरक्षित है?
सरकार के अनुसार व्यापक परीक्षण और फील्ड अनुभव के आधार पर E20 अधिकांश पुराने वाहनों के लिए सुरक्षित पाया गया है.
2. क्या E20 से माइलेज कम होता है?
कुछ वाहनों में 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है, लेकिन सरकार का कहना है कि E20 बेहतर प्रदर्शन और कम प्रदूषण जैसे कई अन्य लाभ भी देता है.
3. E20 का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है?
कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय बढ़ाना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और कार्बन उत्सर्जन कम करना.
4. क्या E20 पर वैज्ञानिक परीक्षण किए गए हैं?
हां. सरकार के अनुसार E20 को लागू करने से पहले ARAI, SIAM, ऑटोमोबाइल कंपनियों और अन्य विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा विस्तृत परीक्षण किए गए थे
Source: Ministry of Petroleum & Natural Gas


