NEET Success Story: हरियाणा के जींद जिले के अहीरका गांव की रहने वाली दिव्या कारकी ने NEET UG परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 574 अंक प्राप्त किए हैं. इसके साथ ही उन्होंने ऑल इंडिया 20,903 रैंक हासिल की है. दिव्या की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करते हुए यह उपलब्धि हासिल की है. अब उनका सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना है.
साधारण परिवार से निकलकर बनाई बड़ी पहचान
दिव्या कारकी एक साधारण परिवार से हैं. उनके पिता दुर्गा बहादुर और माता जानुका एक निजी स्कूल में बतौर कुक काम करते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं होने के बावजूद माता-पिता ने अपनी बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. उनकी मेहनत और सहयोग का ही परिणाम है कि आज दिव्या ने राष्ट्रीय स्तर की कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की है.
बिना कोचिंग के पास की NEET UG परीक्षा
दिव्या ने बताया कि उन्होंने NEET UG की तैयारी के लिए किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया. उन्होंने अपनी पढ़ाई मुख्य रूप से स्वयं की मेहनत के दम पर की. जरूरत पड़ने पर उन्होंने केवल थोड़ी ऑनलाइन मदद ली. उनका कहना है कि नियमित पढ़ाई, सही योजना और आत्मविश्वास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया.
दिव्या ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने स्कूल के शिक्षकों और अपने माता-पिता को दिया. उन्होंने कहा कि परिवार और शिक्षकों के लगातार प्रोत्साहन ने उन्हें हमेशा बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया.
छोटे स्टोर रूम में की घंटों पढ़ाई
दिव्या की मां जानुका ने बताया कि घर में पढ़ाई के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी. इसी कारण दिव्या एक छोटे से स्टोर रूम में बैठकर पढ़ाई करती थीं. उन्होंने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान दिव्या रोजाना करीब 12 से 13 घंटे तक पढ़ाई करती थीं. उनकी मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ने आखिरकार उन्हें सफलता दिलाई.

पिता बोले- मेहनत और लगन का मिला फल
दिव्या के पिता दुर्गा बहादुर ने कहा कि उनकी बेटी ने पूरी ईमानदारी और कड़ी मेहनत के साथ परीक्षा की तैयारी की. उन्होंने बताया कि दिव्या बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखती थीं और उनका सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना है. परिवार को विश्वास है कि वह आगे भी इसी तरह मेहनत कर अपने लक्ष्य को हासिल करेंगी.
युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
दिव्या कारकी की सफलता यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत पूरी लगन से की जाए, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते. उनकी कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो बिना महंगी कोचिंग के भी अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर बड़े सपने पूरे करना चाहते हैं.


