Bhadohi Renamed Sant Ravidas Nagar: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी दौरे के दौरान एक बड़ा राजनीतिक व सामाजिक ऐलान किया है. सीएम योगी ने भदोही जिले का नाम बदलकर एक बार फिर ‘संत रविदास नगर’ करने की घोषणा की है. संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज के 650वें जयंती वर्ष के अवसर पर इसे दलित समुदाय के लिए योगी सरकार का एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
सीएम योगी ने यह घोषणा संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर की. राजनीतिक तौर पर भी इस फैसले को अहम माना जा रहा है. क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इसे दलित समाज को साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. इसी मौके पर योगी सरकार ने वाराणसी से ‘समरसता और संकल्प अभियान’ की भी शुरुआत की.
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कई बार बदला गया जिले का नाम
भदोही जिला 30 जून 1994 को अस्तित्व में आया था. साल 1997 में तत्कालीन बसपा सरकार ने इसका नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया था. इसके बाद दिसंबर 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार ने जिले का नाम फिर से भदोही कर दिया. अब योगी सरकार ने एक बार फिर इसका नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया है.
कौन थे संत रविदास?
संत शिरोमणि गुरु रविदास का जन्म वर्ष 1376 ईस्वी में वाराणसी के गोबर्धनपुर गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम संतोख दास और माता का नाम कर्मा देवी था. संत रविदास स्वामी रामानंदाचार्य के शिष्य और संत कबीर के समकालीन माने जाते हैं.
उन्होंने अपने दोहों और विचारों के माध्यम से समाज में जातिगत भेदभाव का विरोध किया तथा सामाजिक समरसता. समानता और मानवता का संदेश दिया. उनकी शिक्षाएं आज भी सामाजिक एकता और सद्भाव की प्रेरणा मानी जाती हैं.
2027 चुनावों के लिहाज से अहम कदम
उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) का यह फैसला दलितों को साधने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है. गुरु रविदास के 650वें जयंती वर्ष पर जिले का नाम उनके नाम पर पुनर्स्थापित कर सरकार ने सामाजिक समरसता का बड़ा संदेश देने की कोशिश की है.


