देश में राष्ट्रीय राजमार्गों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए केंद्र सरकार ग्रीन हाईवे (प्लांटेशन, ट्रांसप्लांटेशन, ब्यूटीफिकेशन एंड मेंटेनेंस) नीति-2015 के तहत लगातार काम कर रही है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि पिछले पांच वर्षों में देशभर के लगभग 1.32 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों पर 3.61 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं.
सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरित पट्टी विकसित करने के साथ-साथ सड़क निर्माण में पर्यावरण अनुकूल तकनीकों और पुनर्चक्रित (Recycled) सामग्री के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है.
1.32 लाख किलोमीटर हाईवे पर हुआ पौधारोपण
मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों के मध्य भाग (मीडियन) और सड़क किनारे उपलब्ध भूमि पर भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पौधारोपण किया जा रहा है.
पिछले पांच वर्षों में लगभग 1.32 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों को हरित बनाने के लिए 3.61 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए.
कई राज्यों में बड़े स्तर पर लगाए गए पौधे
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न राज्यों में हर वर्ष लाखों पौधों का रोपण किया गया.
वर्ष 2025-26 में प्रमुख राज्यों में लगाए गए पौधों की संख्या (लाख में):
- आंध्र प्रदेश – 6.16 लाख
- गुजरात – 6.05 लाख
- मध्य प्रदेश – 5.80 लाख
- महाराष्ट्र – 5.25 लाख
- उत्तर प्रदेश – 4.59 लाख
- पंजाब – 4.55 लाख
- राजस्थान – 4.06 लाख
- तमिलनाडु – 3.40 लाख
- ओडिशा – 3.44 लाख
सड़क निर्माण में बढ़ रहा पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में पर्यावरण अनुकूल निर्माण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
इसके तहत कई टिकाऊ और पुनर्चक्रित सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं:
- फ्लाई ऐश और पोंड ऐश
- रिक्लेम्ड एस्फाल्ट पेवमेंट (RAP)
- निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (C&D) अपशिष्ट
- प्लास्टिक कचरे से तैयार बिटुमिनस मिश्रण
- जूट और कॉयर जैसे प्राकृतिक जियोटेक्सटाइल
- स्लैग
- बायो बिटुमेन और शीरा (Molasses)
- क्रम्ब रबर
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के उपचारित पानी का उपयोग
मंत्रालय के अनुसार, इन सामग्रियों का उपयोग तकनीकी मानकों और व्यवहार्यता के आधार पर किया जाता है, जिससे सड़कों की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ पर्यावरण पर प्रभाव भी कम पड़ता है.
मियावाकी तकनीक और ड्रोन से होगी निगरानी
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावाकी पद्धति से पौधारोपण शुरू किया गया है.
इसके अलावा पौधों की निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है. जहां सड़क निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई आवश्यक होती है, वहां प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) और पेड़ों का प्रत्यारोपण (Tree Transplantation) भी किया जाता है.
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हरित तकनीकों से घट रहा पर्यावरणीय प्रभाव
मंत्रालय के अनुसार, ऊर्जा दक्ष निर्माण तकनीकों, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और बेहतर पर्यावरण प्रबंधन उपायों के कारण सड़क निर्माण के दौरान कार्बन उत्सर्जन कम करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय प्रभाव को घटाने में मदद मिल रही है.
यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी.
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय.


