Nepal Violence: नेपाल अभी कुछ महीने पहले हुए छात्र-युवा आंदोलनों से उबर भी नहीं पाया था कि एक बार फिर सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलस उठा है. 26 जुलाई से शुरू हुई इस हिंसा ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया, जिसमें 15 साल के मासूम गणेश यादव सहित तीन लोगों की मौत हो चुकी है. इस घटना के बाद से पूरे देश में भारी आक्रोश है और प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार तथा गृह मंत्री सुदान गुरुंग चौतरफा दबाव में आ गए हैं.
मेरठ में 6 महीने के मासूम की हत्या का खुलासा, मां और उसके प्रेमी पर बेटे को नाले में फेंकने का आरोप
कौन था 15 साल का गणेश यादव?
गणेश यादव नेपाल के औराही रूरल म्युनिसिपैलिटी-2 का रहने वाला एक साधारण और सीधा-साधा 15 वर्षीय किशोर था. सुनसरी जिले से फैली हिंसा की लपटें जब सिराहा के गोलबाजार पहुंचीं, तो वहां स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शन के दौरान पुलिस और भीड़ के बीच हिंसक झड़प हो गई. इसी दौरान चली गोली लगने से मासूम गणेश यादव की मौके पर ही मौत हो गई.
गृह मंत्री सुदान गुरुंग की बढ़ी मुश्किलें, जनता ने रोका रास्ता
गणेश यादव की मौत के बाद जनआक्रोश इस कदर बढ़ा कि सरकार के लिए स्थिति संभालना बेहद मुश्किल हो गया है. ‘नेपाल न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जब गृह मंत्री सुदान गुरुंग पीड़ित परिवार से सांत्वना व्यक्त करने धनुषा जिले की ओर रवाना हुए, तो लोगों का गुस्सा भड़क उठा. हजारों की संख्या में उग्र प्रदर्शनकारियों ने धनुषा के बनिनिया चौक पर गृह मंत्री के काफिले को रोक दिया. हाथों में तख्तियां लिए लोगों ने नारे लगाए कि जब तक गणेश यादव को न्याय नहीं मिलता और दोषियों को सजा नहीं दी जाती, तब तक गृह मंत्री को इलाके में कदम नहीं रखने दिया जाएगा. बालेन शाह सरकार और गृह मंत्री के खिलाफ हुई इस भीषण नारेबाजी और घेराबंदी के कारण सुरक्षा तंत्र के हाथ-पांव फूल गए.
सुनसरी से कैसे भड़की दंगे की आग?
‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, इस पूरे विवाद की शुरुआत सुनसरी जिले में दो समुदायों के बीच हुई एक मामूली झड़प से हुई थी, जिसने बाद में भयानक रूप ले लिया. सबसे पहले सुनसरी के दीवानगंज में 24 वर्षीय ओम प्रकाश मेहता की गोली मारकर हत्या कर दी गई. हिंसा में गंभीर रूप से घायल 20 वर्षीय जया प्रकाश मेहता की विराटनगर के न्यूरो अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. सिराहा के गोलबाजार में झड़प के दौरान गणेश यादव की जान जाने से मामला पूरे तराई क्षेत्र में आग की तरह फैल गया.
4 जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू, सेना ने संभाली कमान
तीन मौतों के बाद हालात बेकाबू होते देख प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं, चार जिलों में कर्फ्यू सुनसरी, सप्तरी, सिराहा और धनुषा में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है. स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स के साथ-साथ नेपाली आर्मी (सेना) की भारी टुकड़ियों को फ्लैग मार्च के लिए जमीन पर उतार दिया गया है. तनाव की स्थिति को देखते हुए पूरा तराई इलाका छावनी में बदल चुका है, लेकिन जनता का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है.


