देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और जलाशयों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM Surya Sarovar Yojana – PM-SSY) को मंजूरी दे दी है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5,070 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय प्रावधान के साथ इस नई योजना को स्वीकृति दी है.
योजना के तहत देशभर में फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (Floating Solar PV) परियोजनाएं विकसित की जाएंगी, जिनके साथ ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Energy Storage System – ESS) भी स्थापित की जाएगी. सरकार का कहना है कि इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा और अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी.
5,070 करोड़ रुपये की योजना को कैबिनेट की मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को 5,070 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी गई है.
यह योजना अगले पांच वर्षों तक लागू रहेगी और देश में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित होगी
सरकार के अनुसार, योजना के तहत 5,000 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाएं विकसित की जाएंगी.
इन परियोजनाओं के साथ कम से कम दो घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता वाली को-लोकेटेड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) भी स्थापित की जाएगी, जिसकी कुल क्षमता 10,000 मेगावाट-घंटे (MWh) होगी.
इससे सौर ऊर्जा के अधिक प्रभावी उपयोग और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की नहीं होगी जरूरत
सरकार ने कहा कि इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए नई जमीन अधिग्रहित करने की आवश्यकता नहीं होगी.
फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं मौजूदा जलाशयों, नहरों और औद्योगिक तालाबों की सतह पर विकसित की जाएंगी. इससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और भूमि संबंधी चुनौतियां भी कम होंगी.
जलाशयों का होगा उत्पादक उपयोग
योजना के माध्यम से देश के मौजूदा जलाशयों, सिंचाई नहरों और औद्योगिक जल संरचनाओं का उत्पादक उपयोग किया जाएगा.
सरकार का मानना है कि इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि जल निकायों के बेहतर प्रबंधन और ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार को भी गति मिलेगी.
स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगा बल
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं और ऊर्जा भंडारण प्रणाली के संयोजन से बिजली उत्पादन अधिक स्थिर और प्रभावी होगा, जिससे भविष्य में हरित ऊर्जा के उपयोग को और बढ़ावा मिलेगा.
स्रोत: केंद्रीय मंत्रिमंडल की घोषणा.


