Delhi NCR Metro: दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) और नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) ने अपने नए मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण की तैयारियां तेज कर दी हैं. इससे बाहरी दिल्ली, हरियाणा और गौतम बुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी.
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रिठाला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर (फेज-4)
बाहरी दिल्ली और हरियाणा के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए डीएमआरसी ने फेज-चार के तहत रिठाला-कुंडली कॉरिडोर पर काम शुरू कर दिया है. डीएमआरसी ने नरेला क्षेत्र से हरियाणा के कुंडली/नाथूपुर तक करीब 15.4 किलोमीटर लंबे हिस्से के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसी साल के अंत तक निर्माण कार्य आरंभ हो जाएगा.
कितना होगा खर्च?
इस पर लगभग ₹1,373.36 करोड़ की लागत आएगी. इस हिस्से पर कुल 11 स्टेशन बनेंगे, जिनमें से 10 एलिवेटेड और 1 एट-ग्रेड (जमीन के लेवल पर) होगा. इसके अलावा एलिवेटेड वायाडक्ट, डिपो और रैंप का निर्माण किया जाएगा. यह कॉरिडोर रेड लाइन के जरिए हरियाणा के कुंडली, नाथूपुर और दिल्ली के नरेला को सीधे गाजियाबाद से जोड़ेगा. इसके निर्माण को पूरा करने के लिए 3 साल की अवधि निर्धारित की गई है.
नोएडा सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन और ग्रेनो डिपो से बोड़ाकी रूट
एनएमआरसी (NMRC) ने नोएडा सेक्टर-142 से सेक्टर-38ए बॉटनिकल गार्डन और ग्रेटर नोएडा डिपो से बोड़ाकी रूट पर मेट्रो निर्माण के लिए एजेंसी का चयन कर लिया है. केंद्र सरकार की कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब अगले 3-4 महीनों में धरातल पर काम शुरू होने की उम्मीद है. सिविल कार्यों के लिए लार्सन एंड टुब्रो (L&T) कंपनी को चुना गया है. सिविल निर्माण पर लगभग ₹1200 करोड़ का खर्च अनुमानित है. यह दोनों एक्वा लाइन के एक्सटेंशन रूट होंगे. वर्तमान में एक्वा लाइन नोएडा के सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा डिपो तक संचालित हो रही है.
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इस नए रूट पर कुल 8 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं. सेक्टर-38ए बॉटनिकल गार्डन, सेक्टर-44, नोएडा ऑफिस सेक्टर-96, सेक्टर-97, सेक्टर-105, सेक्टर-108, सेक्टर-93, पंचशील ब्वॉय इंटर कॉलेज स्टेशन इन दोनों ही परियोजनाओं के पूरा होने से इन दोनों मेट्रो परियोजनाओं के पूरा होने से दिल्ली-एनसीआर के लाखों यात्रियों को तेज, सुविधाजनक और बेहतर सार्वजनिक परिवहन मिलेगा. साथ ही सड़क पर वाहनों का दबाव कम होने से ट्रैफिक जाम और यात्रा समय में भी कमी आने की उम्मीद है.


