केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 31,552 करोड़ रुपये जुटाए हैं. खुदरा और संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी के बाद यह निर्गम सफलतापूर्वक पूरा हुआ. निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के अनुसार, यह राशि के लिहाज से भारत का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन गया है.
DIPAM सचिव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि OFS दोनों दिनों में ओवरसब्सक्राइब रहा. मजबूत मांग को देखते हुए सरकार ने ग्रीन शू विकल्प का पूरा उपयोग किया.
दोनों दिनों में ओवरसब्सक्राइब रहा OFS
सरकार के अनुसार LIC का ऑफर फॉर सेल पहले दिन गैर-खुदरा निवेशकों और दूसरे दिन खुदरा निवेशकों के लिए खोला गया था.
दोनों श्रेणियों से मजबूत मांग मिलने के बाद सरकार ने ग्रीन शू विकल्प का पूर्ण उपयोग किया, जिससे हिस्सेदारी बिक्री का आकार बढ़ाया गया.
82.23 करोड़ से अधिक शेयरों का हुआ आवंटन
DIPAM के अनुसार इस OFS के तहत कुल 82,23,33,558 शेयरों का आवंटन किया गया.
इस हिस्सेदारी बिक्री से सरकार ने 31,552 करोड़ रुपये जुटाए. राशि के आधार पर यह अब तक का भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बताया गया है.
LIC में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़कर 10 प्रतिशत
सरकार ने बताया कि OFS पूरा होने के बाद LIC में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई है.
इसके साथ ही सूचीबद्ध कंपनियों के लिए निर्धारित न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी (Minimum Public Shareholding – MPS) का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया गया है.
निवेशकों का जताया आभार
DIPAM सचिव ने कहा कि खुदरा और संस्थागत दोनों वर्गों के निवेशकों ने इस OFS में उत्साहपूर्वक भाग लिया और सरकार पर भरोसा जताया.
उन्होंने सफल निर्गम के लिए सभी निवेशकों का आभार भी व्यक्त किया.
382 रुपये था फ्लोर प्राइस
सरकार ने इससे पहले LIC में 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की थी, जिसमें 4 प्रतिशत तक का अतिरिक्त ग्रीन शू विकल्प भी शामिल था.
OFS का फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था.
गोल्ड प्राइस टुडे: MCX पर सोने ने बनाया नया रिकॉर्ड, 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंचा भाव
शेयर बाजार में भी दिखी बढ़त
बुधवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर LIC का शेयर 0.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 393 रुपये पर बंद हुआ.
सरकार के अनुसार यह विनिवेश प्रक्रिया LIC को सूचीबद्ध कंपनियों के लिए निर्धारित न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी के नियमों के अनुरूप लाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी. OFS पूरा होने के साथ यह लक्ष्य समय सीमा से पहले हासिल कर लिया गया.


