नई दिल्ली, 8 अगस्त 2026. यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाए जाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया यानी PCI ने स्थिति साफ कर दी है. PCI ने कहा है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पूरी तरह मुफ्त रहेगा. इसके अलावा छोटे कारोबारियों को भी UPI भुगतान स्वीकार करने के लिए किसी तरह का MDR या ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं देना होगा.
PCI का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब UPI के बढ़ते इस्तेमाल और इसके डिजिटल ढांचे को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए भुगतान कंपनियों और अन्य हितधारकों के बीच MDR को लेकर चर्चा चल रही है. हालांकि, इस बहस का असर आम UPI यूजर्स और छोटे कारोबारियों पर नहीं पड़ेगा.
मिथिला मखाना की विदेशों में बढ़ी मांग, पहली बार ऑस्ट्रेलिया पहुंचा बिहार से 18 मीट्रिक टन मखाना
उपभोक्ताओं से UPI इस्तेमाल करने का शुल्क नहीं
PCI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने स्पष्टीकरण में कहा कि वर्ष 2016 में लॉन्च होने के बाद से UPI उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहा है. संगठन के मुताबिक, व्यक्तियों से किसी तरह का ट्रांजैक्शन शुल्क लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है.
इसका मतलब है कि लोग अपने बैंक खाते से UPI के जरिए सामान्य डिजिटल भुगतान करते रहेंगे और इसके लिए उन्हें अलग से कोई शुल्क नहीं देना होगा. PCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि UPI को देश के सभी वर्गों तक डिजिटल भुगतान की सुविधा पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था.
छोटे कारोबारियों पर भी नहीं लगेगा MDR
PCI ने छोटे व्यापारियों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है. संगठन के अनुसार, छोटे कारोबारियों पर MDR लागू नहीं है और उन्हें UPI भुगतान स्वीकार करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता.
इसमें छोटे दुकानदार, किराना कारोबारी और अन्य छोटे व्यवसाय शामिल हैं, जिनके लिए UPI डिजिटल भुगतान स्वीकार करने का आसान माध्यम बन चुका है. छोटे कारोबारियों को बिना अतिरिक्त लागत के डिजिटल भुगतान से जोड़ना UPI की मूल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.
इसलिए UPI पर MDR को लेकर चल रही चर्चा का सीधा असर छोटे व्यापारियों पर नहीं पड़ने वाला है.
MDR को लेकर क्यों चल रही है चर्चा
UPI के जरिए लेनदेन की संख्या लगातार बढ़ने के साथ इसके संचालन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने की लागत भी चर्चा का विषय बनी हुई है. PCI के अनुसार, मौजूदा बहस उपभोक्ताओं से शुल्क वसूलने को लेकर नहीं है. चर्चा ऐसे डिजिटल इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने की है, जो हर महीने बहुत बड़ी संख्या में लेनदेन संभाल रहा है.
पिछले कुछ समय से बड़ी मर्चेंट कैटेगरी पर सीमित MDR लगाए जाने की संभावनाओं को लेकर भी रिपोर्टें सामने आती रही हैं. जुलाई में आई रिपोर्टों में बड़ी कंपनियों और अधिक कारोबार वाले मर्चेंट्स पर संभावित शुल्क की बात कही गई थी, जबकि छोटे व्यापारी और व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले भुगतान को इससे अलग रखने की संभावना बताई गई थी.
यूपीआई बना डिजिटल भुगतान का बड़ा माध्यम
UPI ने देश में डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक बड़ी संख्या में व्यापारी अब डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं.
खास तौर पर छोटे दुकानदारों, ठेला विक्रेताओं, किराना कारोबारियों और सूक्ष्म कारोबारियों के लिए UPI ने नकद भुगतान के अलावा एक आसान डिजिटल विकल्प उपलब्ध कराया है. इससे छोटे कारोबारियों के लिए ग्राहकों से डिजिटल भुगतान लेना आसान हुआ है.
तकनीकी ढांचे और साइबर सुरक्षा पर बढ़ रहा खर्च
UPI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इसके पीछे मौजूद तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाए रखने की जरूरत भी बढ़ी है. इसमें सर्वर क्षमता, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने की व्यवस्था, तकनीकी अपग्रेड और लेनदेन की क्षमता बढ़ाने जैसे पहलू शामिल हैं.
PCI के अनुसार, UPI अब एक बड़े रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम के रूप में काम कर रहा है. इसलिए इसके इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत करना जरूरी है.
बैंकों और फिनटेक कंपनियों का रहा है योगदान
PCI के मुताबिक, पिछले करीब एक दशक में बैंकों, फिनटेक कंपनियों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI और भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने UPI नेटवर्क के निर्माण और संचालन में महत्वपूर्ण निवेश किया है.
UPI के विस्तार के साथ इस पूरे डिजिटल पेमेंट सिस्टम की क्षमता बढ़ाने और इसे सुरक्षित रखने के लिए लगातार तकनीकी निवेश की जरूरत बनी हुई है. इसी वजह से UPI के भविष्य के वित्तीय मॉडल को लेकर चर्चा हो रही है.
आम यूजर और छोटे दुकानदारों के लिए क्या बदला
फिलहाल PCI के स्पष्टीकरण के मुताबिक आम उपभोक्ताओं को UPI इस्तेमाल करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा. इसी तरह छोटे कारोबारियों से भी UPI भुगतान स्वीकार करने पर MDR नहीं लिया जाएगा.
यानी रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों और छोटे दुकानदारों के लिए UPI की मौजूदा मुफ्त व्यवस्था जारी रहेगी. MDR को लेकर चल रही चर्चा मुख्य रूप से इस डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने से जुड़ी है.


