पटना, 8 अगस्त 2026. बिहार के प्रसिद्ध जीआई टैग वाले ‘मिथिला मखाना’ की विदेशों में मांग लगातार बढ़ रही है. राज्य के किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच का एक और रास्ता खुला है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को बताया कि पहली बार बिहार से 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना समुद्री मार्ग के जरिए ऑस्ट्रेलिया निर्यात किया गया है.
इस निर्यात को बिहार के कृषि उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. केंद्रीय मंत्री के अनुसार, मिथिला मखाना की बढ़ती वैश्विक मांग बिहार के किसानों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है. खास बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया भेजा गया मखाना सीधे दरभंगा के किसानों से खरीदा गया था.
जीआई टैग वाले मिथिला मखाना का ऑस्ट्रेलिया निर्यात
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी एपीडा के सहयोग से जीआई टैग वाला 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना बिहार से ऑस्ट्रेलिया भेजा गया है.
यह पहली बार है जब बिहार से मिथिला मखाना का समुद्री मार्ग के जरिए ऑस्ट्रेलिया निर्यात किया गया है. इससे बिहार के इस प्रमुख कृषि उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच बढ़ने की संभावना बनी है.
मिथिला मखाना को पहले ही जीआई टैग मिल चुका है, जिससे इसे क्षेत्र विशेष से जुड़े उत्पाद के रूप में पहचान मिली हुई है. अब इसके अंतरराष्ट्रीय निर्यात में बढ़ोतरी से बिहार के मखाना उत्पादकों के लिए नए बाजार खुलने की उम्मीद है.
दरभंगा के किसानों को मिला बाजार भाव से ज्यादा लाभ
ऑस्ट्रेलिया भेजे गए मखाने की खरीद सीधे दरभंगा के किसानों से की गई थी. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, इस पहल से जुड़े किसानों को बाजार भाव की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक लाभ मिला है.
किसानों को बेहतर कीमत मिलने से उन्हें अपने उत्पाद का अधिक मूल्य प्राप्त हुआ. अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधे जुड़ने की यह प्रक्रिया मखाना उत्पादकों के लिए बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है.
मिथिला मखाना की मांग अगर इसी तरह अलग-अलग विदेशी बाजारों में बढ़ती है, तो किसानों को अपने उत्पाद के लिए नए खरीदार और बेहतर बाजार मिलने की संभावना बढ़ सकती है.
कनाडा भी भेजा जा चुका है बिहार का मखाना
ऑस्ट्रेलिया से पहले बिहार के मखाने को समुद्री मार्ग से कनाडा भी निर्यात किया गया था. पिछले महीने पहली बार बिहार के मखाने का समुद्री मार्ग से कनाडा निर्यात किया गया था.
उस दौरान दरभंगा से सात मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा भेजा गया था. इस निर्यात को भी एपीडा की ओर से सुगम बनाया गया था.
कनाडा निर्यात से जुड़े किसानों को भी बेहतर कीमत मिली थी. उस समय केंद्रीय मंत्री ने बताया था कि इस पहल से जुड़े किसानों को पहले की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक बेहतर कीमत मिल रही है.
विदेशों में मांग बढ़ने से किसानों को नए अवसर
ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में मिथिला मखाना की पहुंच बढ़ने से बिहार के किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के नए अवसर खुल रहे हैं. इससे किसानों को केवल घरेलू बाजार पर निर्भर रहने के बजाय विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है.
मिथिला मखाना की बढ़ती वैश्विक मांग को बिहार के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विदेशी बाजारों में इसकी मांग बढ़ने से मखाना उत्पादन से जुड़े किसानों को बेहतर बाजार और मूल्य मिलने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं.
मखाना प्रोसेसिंग और पैकेजिंग उद्योग को भी फायदा
मिथिला मखाना का निर्यात बढ़ने से सिर्फ किसानों को ही फायदा मिलने की संभावना नहीं है. इसके साथ मखाना प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन से जुड़े उद्योगों को भी बढ़ावा मिल सकता है.
विदेशी बाजारों में उत्पाद की मांग बढ़ने पर प्रोसेसिंग और पैकेजिंग से जुड़े कारोबार में निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं. इससे कृषि उत्पाद को सीधे बेचने के बजाय उसे अलग-अलग वैल्यू-एडेड रूप में तैयार कर बाजार तक पहुंचाने के अवसर भी बढ़ सकते हैं.
हेल्दी स्नैक के तौर पर लोकप्रिय हो रहा मखाना
मिथिला क्षेत्र में उत्पादित मखाना अपनी गुणवत्ता और पौष्टिकता के लिए देश और विदेश में पहचान रखता है. इसे हेल्दी स्नैक के तौर पर भी लोकप्रियता मिल रही है.
विदेशों में हेल्दी और रेडी-टू-ईट खाद्य उत्पादों की मांग के बीच मिथिला मखाना के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में संभावनाएं बढ़ रही हैं. समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया और कनाडा तक मखाना पहुंचना इस उत्पाद की बढ़ती वैश्विक पहुंच को दर्शाता है.
बिहार के कृषि निर्यात को मिल सकती है नई गति
मिथिला मखाना के ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में निर्यात से बिहार के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने की संभावना बढ़ी है. किसानों को बेहतर कीमत मिलने के साथ मखाना प्रोसेसिंग और पैकेजिंग से जुड़े कारोबार के विस्तार के अवसर भी बन सकते हैं.
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18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना का पहली बार समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया निर्यात और इससे पहले सात मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाने का कनाडा निर्यात बिहार के मखाना उत्पाद के लिए बढ़ते विदेशी बाजार की ओर संकेत करता है. इससे राज्य के कृषि निर्यात को आगे बढ़ाने और किसानों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं.


