रायपुर/नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026. छत्तीसगढ़ में मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना यानी PMMSY के तहत बड़े स्तर पर परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. केंद्र सरकार के अनुसार, पिछले छह वर्षों में छत्तीसगढ़ के लिए PMMSY के तहत 956.86 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इनमें केंद्र की हिस्सेदारी 321.01 करोड़ रुपये है.
केंद्र सरकार ने बताया कि स्वीकृत केंद्रीय हिस्से में से 274.16 करोड़ रुपये छत्तीसगढ़ सरकार को जारी किए जा चुके हैं. इन योजनाओं का उद्देश्य मछुआरों और मछली किसानों की आर्थिक, सामाजिक और वित्तीय स्थिति मजबूत करने के साथ मत्स्य उत्पादन, एक्वाकल्चर, तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार व्यवस्था को बढ़ावा देना है.
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PMMSY के तहत 956.86 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर
मत्स्य विभाग के अनुसार, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान छत्तीसगढ़ में विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी गई.
इन परियोजनाओं के लिए कुल स्वीकृत राशि 956.86 करोड़ रुपये है, जबकि इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 321.01 करोड़ रुपये निर्धारित की गई. केंद्र के स्वीकृत हिस्से में से 274.16 करोड़ रुपये राज्य सरकार को जारी किए जा चुके हैं.
PMMSY को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के सतत विकास के उद्देश्य से लागू किया जा रहा है.
28 फिश सीड हैचरी और 3,200 हेक्टेयर नए तालाब
छत्तीसगढ़ में PMMSY के तहत मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए कई तरह की परियोजनाएं शुरू की गई हैं. इनमें 28 फिश सीड हैचरी और 3,200 हेक्टेयर नए फिश पॉन्ड शामिल हैं.
इसके अलावा राज्य में 287 Re-circulatory Aquaculture System यानी RAS यूनिट और 820 बायोफ्लॉक यूनिट को भी मंजूरी दी गई है. इन व्यवस्थाओं के जरिए मछली पालन में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है.
14 फिश फीड मिल और 511 छोटे परिवहन वाहन
मत्स्य क्षेत्र से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए अलग-अलग क्षमता की 14 फिश फीड मिल भी परियोजनाओं में शामिल हैं.
मछलियों के परिवहन को आसान बनाने के लिए 511 छोटे फिश ट्रांसपोर्ट वाहन भी स्वीकृत किए गए हैं. इसके अलावा जलाशयों में 8,500 केज लगाए जाने की परियोजना को भी मंजूरी दी गई है.
छत्तीसगढ़ में एक Integrated Aqua Park यानी Integrated Aqua Park भी PMMSY के तहत स्वीकृत किया गया है.
5.52 लाख मछुआरों को दुर्घटना बीमा कवरेज
PMMSY के तहत केवल उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि मछुआरों के सामाजिक सुरक्षा उपायों को भी योजना में शामिल किया गया है.
सरकार के अनुसार, हर साल 5.52 लाख मछुआरों को दुर्घटना बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके साथ ही 9,667 मछुआरों को आजीविका और पोषण सहायता भी दी जा रही है.
वहीं 4,189 मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC के माध्यम से संस्थागत ऋण तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है.
दस साल में मछली उत्पादन में बड़ा इजाफा
केंद्र सरकार के अनुसार, छत्तीसगढ़ में मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
राज्य में मछली उत्पादन वर्ष 2014-15 में 3.14 लाख मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 8.73 लाख मीट्रिक टन हो गया.
मत्स्य विभाग के अनुसार, PMMSY के तहत किए गए विभिन्न हस्तक्षेपों ने मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आय में वृद्धि, उद्यमिता को बढ़ावा देने और ग्रामीण रोजगार के अवसर पैदा करने में योगदान दिया है.
मछली किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा
PMMSY के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्वाकल्चर विस्तार और तकनीक को बढ़ावा मिलने से राज्य के मछली किसानों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है.
योजना के तहत मछली उत्पादन से लेकर परिवहन और फीड से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है. इसके साथ सामाजिक सुरक्षा और संस्थागत ऋण तक पहुंच जैसी सुविधाओं को भी जोड़ा गया है.
केंद्र सरकार के अनुसार, इन प्रयासों से मछली किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण स्तर पर रोजगार पैदा करने और मत्स्य क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने में मदद मिली है.
पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान कम करने पर जोर
मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के साथ मछलियों की कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना भी महत्वपूर्ण है. PMMSY के तहत परिवहन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने का उद्देश्य इस क्षेत्र की व्यवस्था को बेहतर बनाना है.
सरकार के अनुसार, इन हस्तक्षेपों ने पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान कम करने में भी योगदान दिया है.
2020-21 से 2026-27 तक PMMSY का कुल परिव्यय
केंद्र सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को वर्ष 2020-21 से 2026-27 तक कुल 20,750 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लागू किया जा रहा है. इसका उद्देश्य देशभर में मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर का सतत विकास करना है.
छत्तीसगढ़ में भी योजना के तहत उत्पादन, इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, सामाजिक सुरक्षा और बाजार विस्तार से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया जा रहा है.
यह जानकारी केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में दी.


