नई दिल्ली: दिल्ली में ट्रैफिक का दबाव कम करने और राजधानी को बिना जाम हाईस्पीड कनेक्टिविटी देने की दिशा में अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) अहम भूमिका निभाने वाला है. करीब 75.7 किलोमीटर लंबा 6 लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे दिल्ली के तीसरे रिंग रोड के तौर पर विकसित किया जा रहा है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आने वाला भारी और कमर्शियल ट्रैफिक दिल्ली के अंदर घुसे बिना ही दूसरे राज्यों की ओर निकल सकेगा.
अलीपुर से द्वारका और एयरपोर्ट तक सीधा हाईस्पीड रूट
UER-II का कॉरिडोर अलीपुर में NH-44 से शुरू होकर बवाना, रोहिणी, मुंडका, नजफगढ़ और द्वारका होते हुए महिपालपुर के पास NH-48 से जुड़ेगा. यहां दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे और द्वारका एक्सप्रेसवे के साथ इंटरचेंज बनाया गया है. इससे दिल्ली के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों को एयरपोर्ट और गुरुग्राम की तरफ जाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. रोहिणी, नरेला, बवाना और पश्चिमी दिल्ली के इलाकों से एयरपोर्ट पहुंचने में लगने वाला समय भी कम होने की उम्मीद है.
पंजाब-हरियाणा से जयपुर तक नहीं लगाना पड़ेगा दिल्ली का चक्कर
इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा कमर्शियल ट्रैफिक को मिलेगा. सोनीपत, पानीपत, रोहतक, झज्जर, बहादुरगढ़ और पंजाब की तरफ से आने वाले वाहन दिल्ली के अंदर दाखिल हुए बिना UER-II के जरिए आगे बढ़ सकेंगे. जयपुर, राजस्थान और दक्षिण भारत की ओर जाने वाले ट्रकों को दिल्ली की भीड़भाड़ वाली सड़कों से गुजरने की जरूरत कम होगी. इससे इनर रिंग रोड, आउटर रिंग रोड, धौला कुआं और आश्रम जैसे प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव घटाने में मदद मिल सकती है.
दिल्ली का तीसरा रिंग रोड क्यों खास?
UER-II को दिल्ली के तीसरे रिंग रोड के रूप में देखा जा रहा है. इसका उद्देश्य पुराने इनर और आउटर रिंग रोड पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना है. कॉरिडोर पर फ्लाईओवर, अंडरपास, एलिवेटेड हिस्से और बड़े इंटरचेंज बनाए गए हैं, जिससे कई हिस्सों में सिग्नल-फ्री आवाजाही संभव होगी.
इन इलाकों को मिलेगा सीधा फायदा
- अलीपुर और नरेला: NH-44 और हरियाणा की तरफ बेहतर कनेक्टिविटी
- बवाना और रोहिणी: सोनीपत और KMP तक आसान पहुंच
- मुंडका: बहादुरगढ़ और NH-9 से कनेक्शन
- नजफगढ़: पश्चिमी दिल्ली से तेज कनेक्टिविटी
- द्वारका: द्वारका एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट से बेहतर संपर्क
- महिपालपुर: NH-48, दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट कनेक्शन
बहादुरगढ़ और KMP से भी जुड़ेगा कॉरिडोर
UER-II के जरिए मुंडका को बहादुरगढ़ और NH-9 से जोड़ने की व्यवस्था है. वहीं KMP लिंक के माध्यम से बवाना क्षेत्र को सोनीपत और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी मिलेगी. द्वारका की तरफ से यह कॉरिडोर एयरपोर्ट और द्वारका एक्सप्रेसवे तक तेज कनेक्टिविटी देगा. आगे इसे तुगलकाबाद और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे की दिशा में जोड़ने की योजनाओं से भी दिल्ली-NCR का रोड नेटवर्क और मजबूत होगा.
कचरे से भी बनी सड़क, पर्यावरण पर फोकस
UER-II के निर्माण में वेस्ट प्लास्टिक के साथ लैंडफिल से निकलने वाले कचरे के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है. गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल साइट से निकलने वाले कचरे का उपयोग परियोजना के कुछ हिस्सों में किया गया है. इससे सड़क निर्माण के साथ दिल्ली के कचरा प्रबंधन की चुनौती से निपटने की कोशिश भी की गई है.
एक्सप्रेसवे किनारे बनेंगे हाई-डेंसिटी डेवलपमेंट जोन
दिल्ली के नए मास्टर प्लान में UER-II, द्वारका एक्सप्रेसवे और दूसरे हाईस्पीड कॉरिडोर के आसपास विकास को बढ़ावा देने की योजना है. कॉरिडोर के दोनों तरफ निर्धारित क्षेत्र में बहुमंजिला आवासीय इमारतें, IT पार्क और कमर्शियल टाउनशिप विकसित करने का प्रावधान प्रस्तावित है. मेट्रो स्टेशन, नमो भारत कॉरिडोर और बस टर्मिनलों के आसपास भी ट्रांजिट आधारित विकास को बढ़ावा देने की योजना है.
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सड़क के साथ रेल कनेक्टिविटी पर भी जोर
दिल्ली में रिंग रेल नेटवर्क को दोबारा मजबूत करने की योजना पर भी जोर दिया जा रहा है. करीब 35 किलोमीटर के रिंग रेल नेटवर्क को मेट्रो, बस टर्मिनल और नए रिंग रोड कॉरिडोर से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा. यानी आने वाले समय में दिल्ली की कनेक्टिविटी सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहेगी. UER-II, द्वारका एक्सप्रेसवे, नमो भारत, मेट्रो और रिंग रेल मिलकर राजधानी के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को नया रूप देने की तैयारी में हैं.


