Sagar-Satna Expressway: मध्य प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला सागर-सतना एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट अब आगे बढ़ने की तैयारी में है. इस प्रस्तावित 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की डीपीआर लगभग तैयार हो चुकी है और मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) की ओर से इसका काम अंतिम चरण में बताया जा रहा है. करीब 9850 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट को मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट से मंजूरी भी मिल चुकी है.
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यह एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड और विंध्य को सीधे जोड़ने के साथ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच तेज कनेक्टिविटी का नया रास्ता तैयार करेगा.
भोपाल से रीवा, प्रयागराज और बनारस तक कनेक्टिविटी होगी मजबूत
सागर-सतना एक्सप्रेसवे का फायदा केवल सागर और सतना तक सीमित नहीं रहेगा. इसका सीधा असर भोपाल की उत्तर प्रदेश से कनेक्टिविटी पर भी पड़ेगा. भोपाल से सागर के बीच पहले से फोरलेन एक्सप्रेसवे मौजूद है. ऐसे में सागर से सतना तक एक्सप्रेसवे बनने के बाद भोपाल की कनेक्टिविटी सतना, रीवा, प्रयागराज, मिर्जापुर और बनारस जैसे प्रमुख शहरों से और बेहतर हो जाएगी.
इसके अलावा यह प्रोजेक्ट दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से इंटरकनेक्टिविटी देने में भी अहम भूमिका निभा सकता है. इससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन और व्यापार दोनों को गति मिलने की उम्मीद है.
सागर-सतना के बीच 73 किलोमीटर कम होगी दूरी
प्रस्तावित सागर-सतना एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 227 किलोमीटर होगी. फिलहाल पारंपरिक रूट से दोनों शहरों के बीच करीब 300 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी करीब 73 किलोमीटर तक कम हो जाएगी.
अभी सिंगल लेन सड़कों और स्थानीय ट्रैफिक के कारण सागर से सतना पहुंचने में करीब 7 से 8 घंटे लगते हैं. 4-लेन एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यह सफर घटकर करीब 3 से 4 घंटे रह जाने का अनुमान है. वहीं भोपाल और सतना के बीच की दूरी भी 70 से 80 किलोमीटर तक कम होने की बात कही गई है.
इन जिलों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे
सागर-सतना एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित रूट में ये प्रमुख जिले शामिल हैं:
- सागर
- दमोह
- पन्ना
- कटनी
- मैहर
- सतना
इस रूट के जरिए बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के बीच सीधा सड़क संपर्क और मजबूत होगा.
मालवा से पूर्वांचल तक आसान होगा माल परिवहन
इस एक्सप्रेसवे के तीन बड़े फायदे माने जा रहे हैं. पहला, यह यूपी के पूर्वांचल और बुंदेलखंड को मालवा और भोपाल से सीधे जोड़ने में मदद करेगा. सतना और रीवा की सीमाएं उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और मिर्जापुर से लगती हैं, इसलिए इस कॉरिडोर का क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा महत्व होगा.
दूसरा, सतना-रीवा से सीधी और सिंगरौली होते हुए छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और रायपुर तक पहुंचना आसान हो सकता है.
तीसरा, सागर देश के मध्य हिस्से में स्थित है. ऐसे में इस एक्सप्रेसवे के जरिए छत्तीसगढ़ और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाला माल गुजरात के बंदरगाहों और मुंबई तक कम समय में पहुंचाने में मदद मिल सकती है.
2028 से शुरू हो सकता है निर्माण
सागर-सतना एक्सप्रेसवे की डीपीआर MPRDC तैयार कर रहा है और इसका काम अंतिम चरण में है. राज्य सरकार की कैबिनेट से प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है. माना जा रहा है कि 2028 तक इसका निर्माण कार्य शुरू हो सकता है और 2030 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
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बुंदेलखंड-विंध्य के बीच बनेगा बड़ा कॉरिडोर
यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल हाईवे के रूप में विकसित किया जाएगा. इस पर वाहनों के 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की व्यवस्था होगी. सुरक्षा के लिए दोनों तरफ फेंसिंग और निर्धारित एंट्री-एग्जिट पॉइंट होंगे.
यही वजह है कि सागर-सतना एक्सप्रेसवे को बुंदेलखंड और विंध्य के बीच एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर माना जा रहा है. इसके बनने से सड़क संपर्क के साथ क्षेत्रीय व्यापार, परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.


