Unhealthy Foods In India: हमारे रोजमर्रा के खाने में ऐसी कई चीजें शामिल हैं, जिनके इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग देशों में अलग नियम हैं. कुछ खाद्य पदार्थों या उनके घटकों पर कहीं प्रतिबंध लगाया गया है, तो कहीं उनकी मात्रा और इस्तेमाल को सख्त नियमों के तहत रखा गया है. वहीं भारत में भी खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियम मौजूद हैं, लेकिन आम लोगों के बीच कुछ चीजों का इस्तेमाल काफी देखने को मिलता है.
हाल ही में एक रिपोर्ट में पान मसाला-गुटखा, मिलावटी डेयरी प्रोडक्ट्स, वनस्पति तेल, फूड कलर और MSG जैसी चीजों का जिक्र किया गया. हालांकि, इन सभी को सीधे तौर पर ‘विदेशों में बैन’ कहना सही नहीं होगा. अलग-अलग देशों में इनके लिए अलग नियम हैं.
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पान मसाला और गुटखा
तंबाकू वाले गुटखा और अन्य स्मोकलेस टोबैको प्रोडक्ट्स सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं. CDC के अनुसार स्मोकलेस टोबैको मुंह, भोजन नली और अग्न्याशय के कैंसर का कारण बन सकता है. इनमें निकोटीन होने के कारण लत भी लग सकती है.
पान मसाला और गुटखा में इस्तेमाल होने वाली सुपारी को लेकर भी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएं हैं. इसलिए तंबाकू वाले उत्पादों का सेवन न करना स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है.
मिलावटी दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स
दूध और उससे बने उत्पाद तभी सुरक्षित हैं जब वे तय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों. समस्या मिलावट या दूषित उत्पादों से पैदा होती है. ऐसे में केवल यह कहना सही नहीं है कि दूसरे देशों में दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स ‘बैन’ हैं.
भारत में भी FSSAI खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए नियम तय करता है. दूध, घी, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद खरीदते समय पैकेजिंग, लाइसेंस संबंधी जानकारी, एक्सपायरी और विश्वसनीय ब्रांड या विक्रेता पर ध्यान देना बेहतर है.
वनस्पति तेल और ट्रांस फैट
हाइड्रोजनेटेड या पार्टially hydrogenated oils को लेकर अमेरिका में कड़े कदम उठाए गए हैं. FDA ने पार्टially hydrogenated oils को सामान्य रूप से सुरक्षित यानी GRAS नहीं माना और खाद्य पदार्थों में इनके इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से हटाया गया. इसका कारण मुख्य रूप से कृत्रिम ट्रांस फैट से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम हैं.
ट्रांस फैट LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है और हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है. इसलिए पैकेज्ड और तले हुए खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले तेल की जानकारी पर ध्यान देना जरूरी है.
आर्टिफिशियल फूड कलर
जलेबी, मिठाई, कैंडी और कई अन्य खाद्य पदार्थों में रंगों का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन हर फूड कलर हर देश में समान रूप से स्वीकार्य नहीं है. खाद्य रंगों को लेकर अलग-अलग देशों के नियम अलग हो सकते हैं.
भारत में भी सभी रंग मनमाने तरीके से इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. FSSAI के नियमों में कुछ निर्धारित सिंथेटिक फूड कलर्स और उनके इस्तेमाल की शर्तें दी गई हैं. इसलिए किसी रंगीन खाद्य पदार्थ को देखकर सिर्फ उसके रंग के आधार पर उसे सुरक्षित या असुरक्षित मानना सही नहीं है.
अजीनोमोटो यानी MSG
MSG यानी मोनोसोडियम ग्लूटामेट का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है. इसे लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि यह कई देशों में पूरी तरह प्रतिबंधित है. लेकिन यह दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है.
अमेरिकी FDA MSG को सामान्य परिस्थितियों में ‘generally recognized as safe’ मानता है. FDA के अनुसार कुछ संवेदनशील लोगों को अधिक मात्रा में MSG लेने पर अस्थायी लक्षण महसूस हो सकते हैं, लेकिन सामान्य मात्रा में इसके इस्तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया गया है.
सिर्फ ‘विदेश में बैन’ सुनकर न बनाएं राय
किसी खाद्य पदार्थ के दूसरे देश में प्रतिबंधित या सीमित होने के कई कारण हो सकते हैं. किसी देश के खाद्य सुरक्षा कानून, इस्तेमाल की मात्रा, एडिटिव की अनुमति और वैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर नियम अलग-अलग होते हैं.
भारत में खाद्य पदार्थों और एडिटिव्स के लिए FSSAI के नियम लागू होते हैं. केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि दूसरे देशों में प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों की कोई एक आधिकारिक सूची FSSAI के पास उपलब्ध नहीं है और भारत में एडिटिव्स की अनुमति वैज्ञानिक जोखिम आकलन के आधार पर तय की जाती है.
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इसलिए खाने की किसी चीज को सिर्फ वायरल दावे के आधार पर पूरी तरह सुरक्षित या खतरनाक मानने के बजाय उसकी सामग्री, मात्रा, लेबल और खाद्य सुरक्षा मानकों को देखना ज्यादा जरूरी है.


